NRC पर संघ की सरकार को नसीहत, जानिए क्या कहा

Daily news network Posted: 2019-09-10 17:08:36 IST Updated: 2019-09-10 19:33:10 IST
  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सोमवार को कहा कि असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी की अंतिम सूची में कुछ त्रुटियां हैं और आगे बढ़ाने से पहले सरकार को उन्हें दूर करना चाहिए। संघ ने हालांकि इस पूरी कवायाद को स्वागत योग्य कदम बताया।

गुवाहाटी।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सोमवार को कहा कि असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी की अंतिम सूची में कुछ त्रुटियां हैं और आगे बढ़ाने से पहले सरकार को उन्हें दूर करना चाहिए। संघ ने हालांकि इस पूरी कवायाद को स्वागत योग्य कदम बताया। सूत्रो ने कहा कि संघ की वार्षिक समन्वय बैठक के पहले दिन शनिवार को इस बात पर चिंता जताई गई कि असम में प्रकाशित अंतिम एनआरसी सूची में कई वास्तविक नागरिक छूट गए हैं, जिसमें से अधिकतर का दाव है कि वे हिंदू हैं।

 



भाजपा के महासचिव और पूर्वोत्तर के सात राज्यों के प्रभारी राम माधव ने असम में हुई एनआरसी की कवायद और उसकी अंतिम सूची के बारे में बैठक में जानकारी दी। संघ की समन्वय बैठक के अंतिम दिन यहां संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए संघ के सह कार्यवाहक दत्तात्रेय होसबोले ने एनआरसी को एक जटिल मुद्दा करार दिया क्योंकि कई बांग्लादेशी प्रवासियों के नाम मतदाता सूची में शामिल हैं।



उन्होंने कहा, बांग्लादेश के 35 से 40 लाख अवैध प्रवासी असम में बसे हैं और पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा उन्हें  वैध दस्तावेज जारी किये गए, जिससे यह पूरा मुद्दा बेहद जटिल हो गया है। उन्होंने  कहा कि बैठक में एनआरसी पर चर्चा हुई। सरकार को आगे बढ़ने से पहले एनआरसी सूची में सुधार करने का सुझाव देते हुए होसबोले ने कहा,  एनआरसी की अंतिम सूची कानून नहीं है... इसमें कुछ त्रुटियां और गलतियां हैं सरकार को उन्हें हटाकर आगे बढ़ना चाहिए।


 


 हालांकि उन्होंने प्रदेस की भाजपा सरकार की एनआरसी की पुरी कवायद के लिए तारीफ की और कहा कि सत्ता में आने के बाद तय समय में उन्हें यह काम पूरा करना था। बैठक में मौजूद सूत्रों के मुताबिक एनआरसी मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई और कई वास्तविक नागरिकों को इस सूची में जगह नहीं मिलने पर चिंता जताई गई, खासतौर पर उनके लिए जो पड़ोसी राज्यों से आकर असम में बसे थे। उन्होंने कहा कि संघ नेताओं ने इस बात पर भी चिंता जताई कि सूची से बाहर हुए 19  लाख लोगों में से अधिकतर हिंदू हैं। भाजपा ने अद्यतन एनआरसी सूची की आलोचना की थी और कहा था कि अगर भारतीय नागरिकों की अपीलों पर विदेशी न्यायाधिकरण द्वारा विपरित फैसला सुनाया जाता है तो सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए कानून लाएगी।