जम्मू कश्मीर से भागकर त्रिपुरा आए थे 31 रोहिंग्या मुसलमान, सभी रिहा

Daily news network Posted: 2019-02-08 14:03:54 IST Updated: 2019-02-08 17:37:31 IST
  • 6 रोहिंग्या मुस्लिमों के जेल से रिहा होने के साथ ही सभी 31 शरणार्थी अब फ्री हैं। ये सभी पिछले चार दिन से भारत बांग्लादेश बॉर्डर पर फंसे हुए थे।

अगरतला।

6 रोहिंग्या मुस्लिमों के जेल से रिहा होने के साथ ही सभी 31 शरणार्थी अब फ्री हैं। ये सभी पिछले चार दिन से भारत बांग्लादेश बॉर्डर पर फंसे हुए थे। उनके वकील ने यह जानकारी दी। आपको बता दें कि 31 लोगों के समूह में से 17 बच्चों और 8 महिलाओं को रिहा किया जा चुका है। भारत में रोहिंग्याओं के लिए काम कर रहे संगठन रोहिंग्या रिफ्यूजी कमेटी(आरआरसी) की ओर से जमानती मुचलके भरने के बाद 6 पुरुष रोहिंग्याओं को बुधवार रात रिहा किया गया।

 

 


 वेस्ट त्रिपुरा डिस्ट्रिक्ट व सेशन जज एसएल त्रिपुरा ने सोमवार को सभी 6 रोहिंग्या मुस्लिमों को जमानत दी। उनके वकील प्रसेनजीत देबनाथ ने यह जानकारी दी। मोहम्मद शाकिर जो आरआरसी के फील्ड प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त है, वह नई दिल्ली से यहां आया था, उसने कहा, उन्होंने 6 पुरुष शरणार्थियों के लिए 1.80 लाख जमा करवाए। आरआरसी ने 8 महिलाओं व 17 बच्चों के लिए भी जमानत की राशि का भुगतान किया। मंगलवार को उन्हें बिशालगढ़ सेंट्रल जेल से रिहा किया गया। कोर्ट ने 22 जनवरी को महिलाओं व बच्चों को जमानत दी थी।

 

 


 शेष 6 रोहिंग्या मुस्लिमों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। हालांकि महिलाओं और बच्चों को जमानत मिलने के बावजूद जेल में ही रहना पड़ा क्योंकि उनकी जमानत राशि का भुगतान करने के लिए कोई नहीं आया। प्रत्येक के लिए 50-50 हजार की जमानत राशि भरने के बाद जज त्रिपुरा ने सोमवार को सभी को रिहा करने का आदेश दिया। जमानत राशि आरआरसी ने जमा करवाई। 31 रोहिंग्या जो जम्मू कश्मीर से आए थे, 18 जनवरी से त्रिपुरा में भारत बांग्लादेश सीमा से लगी कंटीले तारों की बाड़बंदी के पार नो मैन्स लैंड पर फंसे हुए थे।

 

 

 


सीमा सुरक्षा बल ने गृह मंत्रालय से विचार विमर्श के बाद उन्हें 22 जनवरी को वेस्ट त्रिपुरा जिले में अमतोली पुलिस थाने को सौंप दिया था। बाद में उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। उनकी ओर से कोर्ट में पेश हुए देबनाथ ने इस आधार पर उनके लिए जमानत मांगी थी कि उनके साथ अवैध प्रवासियों जैसा बर्ताव नहीं किया जा सकता क्योंकि भारत ने यूनाइटेड नेशंस हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूजीज के प्रस्तावों पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कोर्ट से अपील की थी कि अपनी माताओं की गैर मौजूदगी में निर्दोष बच्चों की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। कोर्ट ने महिलाओं और बच्चों को जमानत दे दी लेकिन कोई भी जमानती मुचलके भरने के लिए पेश नहीं हुआ। इस कारम उन्हें बिशालगढ़ सेंट्रल जेल भेज दिया गया। पुरुष रोहिंग्याओं को भी उसी जेल में भेजा गया।