कैग की रिपोर्ट में खुलासा, सरकारी खजाने को चूना लगा चुके हैं जगदीश मुखी

Daily news network Posted: 2018-04-09 17:10:08 IST Updated: 2018-04-09 17:10:08 IST
कैग की रिपोर्ट में खुलासा, सरकारी खजाने को चूना लगा चुके हैं जगदीश मुखी
  • सरकारी राजस्व को चूना लगाने को लेकर नियंत्रक एक महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में असम के मौजूदा राज्यपाल जगदीश मुखी का नाम भी सामने आया है।

गुवाहाटी।

सरकारी राजस्व को चूना लगाने को लेकर नियंत्रक एक महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में असम के मौजूदा राज्यपाल जगदीश मुखी का नाम भी सामने आया है। जिसको लेकर वे विवादों में चल घिरते नजर आ रहे हैं। हालांकि उनके खिलाफ यह आरोप उनके वर्तमान कार्यकाल को लेकर नहीं आया है। जिस समय के कार्यकलापों को लेकर मुखी पर यह आरोप लगा है उस समय वे अंडमान निकोबार द्वीप समूह के उप राज्यपाल थे। कैग की रिपार्ट में उनके अलावा अंडमान के ही पूर्व उपराज्यपाल अजय कुमार सिंह का नाम भी आया है।

 

 



मुखी आैर सिंह पर लगे आरोपाें के मुताबिक दोनों ने दिल्ली आेर गुरूग्राम स्थित अपने निजी आवासों को शिविर कार्यालय बनाकर सरकारी राजस्व को चूना लगाया था। बता दें कि पांच अप्रैल को कैग ने संसद के दोनों सदनों में अपनी रिपाेर्ट पेश की, जिसमें लिखा हुआ था कि दोनों उपराज्यपालों ने अपने निजी आवास को कैम्प कार्यालय में बदला है। जिसके वे दावेदार नहीं थे।

 

 


गृह मंत्रालय से नहीं मिला काेर्इ जवाब

 

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मामला केंद्र शासित होने के कारण पिछले सितंबर में ही गृह मंत्रालय को दे दिया गया था। जिसका जवाब अभी तक नहीं आया। गृह मंत्रालय की आेर से 20 अप्रैल 1987 को जारी पत्र(U-14016/31/85-UTS) के जरिए यह स्पष्ट कर दिया गया है कि नियुक्तियों की शर्तों में उपराज्यपालों को किराए के भुगतान के पूरी तरह से सुसज्जित आवास की व्यवस्था है, लेकिन कैम्प कार्यालय स्थापित करने का कोर्इ प्रावधान नहीं है।

 


रिपोर्ट का खुलासा

 कैग ने अपनी रिपाेर्ट में खुलासा किया है कि तत्कालीन उपराज्यपाल ले. जनरल अजय कुमार सिंह ने सितंबर 2013 में अपने गुरूग्राम के सेक्टर 17बी स्थति अपने आवास को आधार पर कैम्प घोषित किया कि दिल्ली प्रवास के दौरान उन्हें कार्यालय के काम निपटाने होंगे। 

 

 

 

23 लाख 18 हजार का लगाया चूना

 

बता दें कि सेना के दक्षिणी कमान के पूर्व कमांडर इन चीफ ले जनरल अजय कुमार ने जुलार्इ 2014-मर्इ 2016 तक उन्हें पुंडुचेरी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था। रिपोर्ट के मुताबिक कैम्प कार्यालय को कार्मचारियों आेर जरूरी चीजों के लिए नर्इ दिल्ली स्थति अंडमान निकाबार द्वीप समूह के स्थानीय  आयुक्त के कार्यालय से संबंध कर दिया गया था। इसके साथ ही टेलीफोन बिल, पानी, बिजली, वाहनों के खर्चे, आैर आउटसोर्स किए गए कर्मचारियों के वेतन तक पर व्यय रकम (23 लाख 18 हजार रु) स्थानीय आयुक्त के लिए आवंटित किए गए थे।

 

 

 

सिंह जैसा ही मुखी का हाल

यही हाल मुखी के मामले में हुआ था जब वे अजय सिंह के बाद उपराजयपाल बनकर आए थे। मुखी ने 6 लाख 27 हजार का चूना लगाया था। कैग ने इस बात पर हैरानी जतार्इ है कि दिल्ली में अंडमान निकोबार का 54 बिस्तर  का अतिथि गृह होने के साथ उपराज्यपाल के रिहायशी व्यवस्था होने के बाद भी कैम्प कार्यालय बनाया गया।