12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म तो होगी फांसी, अध्यादेश लागू

Daily news network Posted: 2018-04-23 16:37:36 IST Updated: 2018-04-23 16:47:04 IST
  • राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने पर फांसी की सजा देने के प्रावधान वाले अध्यादेश को मंजूरी दे दी है । इसके साथ ही इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गयी है और यह अध्यादेश अब लागू हो गया है।

नई दिल्ली

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 12 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने पर फांसी की सजा देने के प्रावधान वाले अध्यादेश को मंजूरी दे दी है । इसके साथ ही इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी गयी है और यह अध्यादेश अब लागू हो गया है। 






गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में कल केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में बच्चियों के साथ दुष्कर्म के दोषियों को फांसी की सजा का प्रावधान करने वाले आपराधिक कानून संशोधन अध्यादेश 2018 के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया था । इस अध्यादेश के जरिए चार कानूनों में संशोधन किये गए हैं । 





बाद में इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा गया । इस अध्यादेश को अब संसद के मानसून सत्र मेँ पेश किया जाएगा । अध्यादेश से बाल यौन शोषण  संरक्षण अधिनियम (पोक्सो ), भारतीय दंड संहिता, साक्ष्य अधिनियम आपराधिक कानून प्रक्रिया संहिता में संशोधन किया गया है । सूरत, उन्नाव और कठुआ में पिछले दिनों हुई दुष्कर्म की  घटना के बाद ऐसे आरोपियों के सख्त  सजा देने की देशभर में भांग उठने लगी थी जिसे देखते हुए सरकार ने यह कदम  उठाया  है । कानून में बदलाव के बाद 12 साल तक की बच्ची  के साथ दुष्कर्म के दोषी को मौत की सजा होगी । 




 

पॉक्सो के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, दोषियों  के लिए अधिकतम सजा उम्रकैद  है और न्यूनतम सात साल की जेल है। अध्यादेश के मुताबिक, नाबालिगों से दुष्कर्म के मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की व्यवस्था की जाएगी तथा फॉरेंसिक जांच के जरिए सबूतों को जुटाने की व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाएगा। पुरे मामले की सुनवाई दो माह में करनी होगी तथा छह महीने के भीतर अपील का निपटारा करना होगा। पूरा मामला कुल 10 महीने में निपटना अनिवार्य किया गया है। 

 




अध्यादेश में 16 साल से कम उम की लड़कियों के साथ  दुष्कर्म के दोयियों को न्यूनतम 20 साल की सजा का प्रावधान किया गया है। ऐसे मामलों के आरोपियों को अग्रिम जमानत नहीं मिलेगी । दुष्कर्म के अन्य मामलों में न्यूनतम सात माल के सश्रम कारावास को बढ़ाकर 10 वर्ष किया है जिसे अधिकतम, आजीवन कारावास में बदला जा सकता है। 





इस मामले में जमानत की अपील पर फैसला देने से पहले अदालत सरकारी वकील तथा पीड़िता के प्रतिनिधि को 15 दिन का नोटिस देगी । सरकारी वकील के नए पद सृजित होंगे तथा दुष्कर्म मामलों के लिए सभी थानों और अस्पतालों को विशेष फरेंसिक किट दी  जाएगी  । दुष्कर्म मामलों के लिए सभी राज्यों में विशेष फारेंसिक लैब बनेगी। ये सभी कदम तीन महीने के भीतर उटाए जाएगें । 






अध्यादेश में यौन अपराधियों की निगरानी के लिए राष्टीय स्तर पर डैटाबेस बनाने का भी प्रावधान किया गया है। राष्टीय अपराध नियन्त्रण ब्यूरो  (एनसीआरबी) को  इसकी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी । यौन अपराधियों का डैटाबेस बनाने वाला भारत दुनियाभर में नौवां देश होगा। फिलहाल अमरीका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड, न्यूजीलैंड दक्षिण अफ्रीका, त्रिनिडाड  और टोबेगो में यौन अपराधियों वा इस तरह का डेटाबेस रखा जाता है।