असम में 50 प्रतिशत तक बढ़ेगा विधायकों आैर राज्य मंत्रियों का वेतन

Daily news network Posted: 2018-04-06 12:39:41 IST Updated: 2018-04-06 12:52:02 IST
असम में 50 प्रतिशत तक बढ़ेगा विधायकों आैर राज्य मंत्रियों का वेतन
  • असम में संसदीय मामलो के मंत्री चंद्रमोहन पटवारी ने गुरूवार ने विधानसभा के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष,राज्य के मुख्यमंत्री समेत विरोधी दलपति आैर विधानसभा के सभी सदस्यों के वेतन में 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।

गुवाहाटी।

असम में संसदीय मामलो के मंत्री चंद्रमोहन पटवारी ने गुरूवार को विधानसभा के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष,राज्य के मुख्यमंत्री समेत विपक्ष के नेताओं आैर विधानसभा के सभी सदस्यों के वेतन को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है।

 

 


मंत्री द्वारा सदन में पेश किए गए इस विधेयक में द असम स्पीकर्स एंड डिप्टी स्पीकर्स सैलरीज, अलावेंसेस एंड एमेनिटीज बिल 2018, द असम लेजिस्लेटिव असेम्बली मेंबर्स सैलरीज अलावेंसेस, एमेनिटीज एंड पेंशंस बिल 2018 आैर द असम मिनिस्टर्स एंड लीडर आॅफ द अपोजिशन सैलरीज अलावेंसेस, एमेनिटीज एंड पेंशंस बिल 2018 शामिल है।

 

 


मौजूदा सैलरी आैर बढ़ने के बाद की सैलरी


विधानसभाध्यक्ष और उपाध्यक्ष का वेतन बढ़ाने के विधेयक के मुताबिक, उनकी तनख्वाह मौजूदा 80,000 रूपये और 75,000 रूपये से बढ़ाकर प्रतिमाह क्रमश: 1.2 लाख रूपये और एक लाख रूपये करने का प्रस्ताव दिया गया है। इस तरह दोनों के मौजूदा वेतन में क्रमश: 50 प्रतिशत और 33.33 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। वेतन के अलावा दोनों को संसदीय मदद और व्यय के रूप में 30,000 रूपये का भत्ता भी मिलेगा।



मुख्यमंत्री का वेतन

 

 मुख्यमंत्री को मौजूदा वेतन 90,000 रूपये की तुलना में 1.3 लाख रूपये मिलेगा। इसके अलावा भत्ते का भी प्रस्ताव है। कुल मिलाकर हर महीने 1.64 लाख रूपये मिलेगा।



विपक्ष के नेता का वेतन

 

 

 कैबिनेट मंत्रियों और विपक्ष के नेता का वेतन मौजूदा 80,000 रूपये से बढ़ाकर 1.1 लाख रूपये किया गया है। सभी विधायकों का वेतन भी मौजूदा 60,000 रूपये प्रतिमाह को बढ़ाकर 80,000 रूपये करने का प्रस्ताव दिया गया है। पूर्व विधायकों की पेंशन बढ़ाने का भी प्रस्ताव दिया गया है।

 

 


 विधायकों का वेतन


सभी विधायकों का वेतन भी मौजूदा 60,000 रुपये प्रतिमाह को बढ़ाकर 80,000 रुपये  करने का प्रस्ताव दिया गया है. पूर्व विधायकों की पेंशन बढ़ाने का भी प्रस्ताव दिया गया है।

 



मां-बाप की देखभाल नहीं की तो कटेगी सैलरी


आपको बता दें कि 2017 में असम विधानसभा ने एक विधेयक पारित किया था। जिसमें यह प्रावधान किया गया था कि अगर राज्य सरकार के कर्मचारी अपने अभिभावकों और दिव्यांग भाई-बहनों की देखभाल नहीं करेंगे तो उनके मासिक वेतन में 10 प्रतिशत की कटौती की जाएगी और वेतन से काटी गई राशि उनके अभिभावकों या भाई-बहनों को दी जाएगी। असम कर्मचारी अभिभावक जवाबदेही एवं निगरानी विधेयक, 2017 के प्रावधानों के तहत राज्य सरकार या असम में किसी अन्य संगठन के कर्मचारी अपने अभिभावकों या दिव्यांग भाई बहनों की देखभाल करेंगे।