हिंदुओं व अन्य से पाक, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में हुए जुल्म का सबूत मांगेगी मोदी सरकार

Daily news network Posted: 2019-01-12 12:59:17 IST Updated: 2019-01-14 08:44:30 IST

नई दिल्ली।

उन बंगाली हिंदू प्रवासियों के लिए कानूनी मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई है जिन्होंने भारत में शरण ली है। गृह मंत्रालय का कहना है कि जो भारतीय नागरिकता मांगेंगे उन्हें नागरिकता के लिए आवेदन करने से पहले यह साबित करना होगा कि वे पड़ोसी देश में धार्मिक अत्याचार के शिकार हैं। इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक ने संयुक्त संसदीय समिति को बताया है कि इस श्रेणी के तहत भारत नागरिकता के लिए आवेदन करने वाले अन्य को यह साबित करना होगा कि वे धार्मिक अत्याचार के कारण भारत आए हैं। अगर उन्होंने भारत पहुंचने के वक्त ये घोषणा नहीं की थी तो अब उनके लिए इस तरह का दावा करना मुश्किल होगा।

 

 

 


नागरिकता संशोधन बिल लोकसभा में पारित हो चुका है लेकिन राज्यसभा में लटक गया। केन्द्र सरकार ने जेपीसी की रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया है। जेपीसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि जब स्टेट से धार्मिक उत्पीडऩ के कारण तीन देशों से भारत आए अल्पसंख्यक समुदायों से ताल्लुक रखने वाले लोगों के भविष्य के संबंध पूछा गया लेकिन उन्होंने भारत पहुंचने के वक्त इसकी घोषणा नहीं की। आईबी ने कहा है कि भविष्य में किए जाने वाले दावे की जांच की जाएगी। फैसला लेने से पहले रॉ के जरिए भी जांच होगी। सबसे दिलचस्प बात यह है कि अभी तक 31 हजार 313 लोगों ने ही औपचारिक रूप से घोषणा की है कि वे धार्मिक अत्याचार के कारण भारत आए हैं। आईबी के डायरेक्टर ने कहा कि हां, क्योंकि उन्होंने दावा किया था, इसलिए उन्होंने आवेदन किया। कई अन्य भी हो सकते हैं जो आए और पहले ही विभिन्न तरीकों से भारतीय नागरिकता ले चुके हों।

 

 

 


उन्होंने शायद पासपोर्ट, राशन कार्ड हासिल कर लिया हो। अन्य सभी दस्तावेज उन्होंने शायद प्राप्त कर लिए हैं। शायद उन्होंने मतदाता सूचियों में भी खुद को रजिस्टर्ड करवा लिया हो। इसलिए सभी व्यावहारिक उद्देश्यों के लिए, वे पहले से ही देश के नागरिक हैं, अगर उनमें से किसी ने गलत तरीके से यह(नागरिकता)प्राप्त की है तो इसकी पहचान के लिए पहले से ट्राइब्लूनल्स हैं। यह बिल उन लोगों के लिए है जिन्होंने आवेदन कर लिया है और जिन्होंने दावा किया है कि उनका उनके संबंधित देश में उत्पीडऩ हुआ है। समिति ने पूछा कि बिल पारित होने पर क्या उन सभी लोगों को नागरिकता प्रदान की जाएगी जिन्होंने आवेदन किया था, या आगे भी वैरिफिकेशन होगा?

 

 

 

 


इसके जवाब में आईबी डायरेक्टर ने कहा, सर, जब कभी बिल पारित होगा,एक चीज के बारे में सोचा जा सकता है कि जिन सभी ने आवेदन किया है, जो कई सालों से यहां हैं, हम उनके भारत में स्टे के दौरान एक और वैरिफिकेशन कर सकते हैं। यह तब होगा अगर सुरक्षा एजेंसियों, आईबी, लोकल पुलिस या लोकल इंटेलिजेंस के संज्ञान में कोई विपरीत चीज नजर आती है और जो यहां किसी एक्टिविटी के लिए आया है या कोई गतिविधि नजर आती है जो देश के लिए नुकसानदेह तो, उनके  मामले की संवीक्षा  हो सकती है लेकिन हम अलग से इसकी जांच करेंगे।