आेरंग पार्क में गैंडों की संख्या को लेकर वन मंत्री को संदेह, कहा- क्या पुरूष गैंडों ने भी दिया जन्म

Daily news network Posted: 2018-04-05 12:08:42 IST Updated: 2018-04-05 12:40:24 IST
आेरंग पार्क में गैंडों की संख्या को लेकर वन मंत्री को संदेह, कहा- क्या पुरूष गैंडों ने भी दिया जन्म
  • असम के आेरंग नेशनल पार्क से एक चौकानें वाली बात सामने आर्इ है। आेरंग पार्क में गैंडों की जनगणना के बाद पता चला है कि पिछले तीन सालों में यहां 36 गैंडों की संख्या में बढ़ोतरी हुर्इ है।

गुवाहाटी।

असम के आेरंग नेशनल पार्क से एक चौकानें वाली बात सामने आर्इ है। आेरंग पार्क में गैंडों की जनगणना के बाद पता चला है कि पिछले तीन सालों में यहां 36 गैंडों की संख्या में बढ़ोतरी हुर्इ है। वन विभाग मंत्री प्रमिला रानी ने 2006 से लेकर अभी तक हुई गैंडों की संख्या में बढ़ाेतरी को लेकर संदेह व्यक्त किया है। उन्होंने बुधवार को कहा कि तीन साल में अचानक से 36 गैंडों की वृद्धि असंभव है। अगर वास्तव में एेसा हुआ है तो पुरूष गैंडों ने भी जन्म दिया होगा।

 

 


 

 इस मसले पर वन मंत्री ने आगे कहा कि 2006  की जनगणना के मुताबिक आेरंग नेशनल पार्क महज 68 गैंडे थे, इसके बाद इनकी संख्या में गिरावट आर्इ थी आैर 2009 में पार्क में 64 गैंडे ही बचे थे, लेकिन अचानक से 2012 में आेरंग में गैंडों की संख्या 100 हो गर्इ। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अचानक से 36 गैंडों की वृद्धि वास्तव में असंभव है। उन्होंने आगे कहा कि अगर एेसा है तो मुमकिन है कि आेरांग में पुरूष गैंडों ने भी बच्चों को जन्म दिया होगा। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में गैंडों की हुर्इ जनगणना की जांच होनी चाहिए।

 

 


 हालांकि वन मंत्री ने काजीरंगा नेशनल पार्क अौर अन्य पार्कों में गैंडों की आबादी की जनगणना को क्लीन चिट दे दी है। साथ ही उन्होंने अपने एक बयान में कहा कि अारटीआर्इ कार्यकर्ता भबेन हांडिक्यू के द्वारा प्रेस कांफ्रेंस में यह साबित हो जाएगा कि केएनपी आैर आेरंग नेशनल पार्क पर लगाएे गए आरोप सही है या नहीं।

 

 


 बुधवार को वन मंत्री ने कहा कि राज्य में शिकार के कारण गैंडों की मौत काफी कम हो गर्इ है। इसके साथ ही उन्होंने खुलासा किया है कि 2013 में 40 गैंडाें की मौत हुर्इ थी। 2017 में 9 और 2018 में 2 गैंडों की मौत हुर्इ है। बता दें कि पेश की गर्इ रिपोर्ट 31 मार्च 2018 को तैयार की गई है।

 

 



रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल 72 गैंडों की मौत स्वास्थ्य संबंधित बीमारियों के कारण हुर्इ थी। इसके अलावा 39 गैंडों ने बाढ़ में अपनी जान गवांर्इ थी। 21 सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हुए थे। जबकि 18 गैंडे टाइगर का शिकार हुए थे। हालांकि 2018 में तीन महीनों के अंदर 3 गैंडे टाइगर का शिकार बन चुके है। इसके अलावा इस साल 14 गैंडों की नेचुरल मौत हुर्इ हैं। वन मंत्री की रिपार्ट के मुताबिक 2012 तक 387 गैंडे प्राकृतिक कारणों, शिकार, बाढ़ , दुर्घटना आैर टाइगर का शिकार हुए है।

 


 

 बता दें कि हाल ही में आरटीआर्इ कार्यकर्ता भबेन ने असम में गैंडाें की जनगणना को लेकर गंभीर आरोप लगाया था। कांजीरंगा नेशनल पार्क में हुए जनगणना को लेकर उन्होंने कहा था कि राजनीतिक लाभ उठाने के कारण गैर सरकारी संगठन, वन अधिकारी आैर राजनेताआें ने मिलकर गैंडों की संख्या के साथ हेर फेर कर रहे है।

 

 

 


 उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आैर वन अधिकारियों का लक्ष्य 2020 तक 3000 तक बढ़ाना था। इसलिए गैर सरकारी संगठन, वन अधिकारी आैर राज्य के नेता एेसा कर रहे है। भबेन ने आेरंग को छोड़कर बाकी वाइल्ड लाइफ पार्क के गैडों की संख्या का 2016- 2017 का सही आंकड़ा जानने के लिए दो आरटीआर्इ भी दाखिल की थी।