यहां डामर से नहीं प्लास्टिक से बनी सड़क

Daily news network Posted: 2018-04-09 19:36:44 IST Updated: 2018-04-09 21:55:11 IST
  • मेघालय के पश्चिम खासी हिल्स के नोंगकिंजेंग गांव में डामर से नहीं बल्कि प्लास्टिक वेस्ट से सड़क बनाई गई है। हाल ही में इस गांव में एक किमी सड़क का निर्माण प्लास्टिक वेस्ट से किया गया है।

शिलॉन्ग

मेघालय के पश्चिम खासी हिल्स के नोंगकिंजेंग गांव में डामर से नहीं बल्कि प्लास्टिक वेस्ट से सड़क बनाई गई है। हाल ही में इस गांव में एक किमी सड़क का निर्माण प्लास्टिक वेस्ट से किया गया है।

 

 हाल ही में इस गांव में एक किमी सड़क का निर्माण प्लास्टिक वेस्ट से किया गया है। इस रोड को कोयंबटूर के वासुदेवन द्वारा विकसित प्रौद्योगिकी, गरम डामर के साथ कटे हुए प्लास्टिक के कचरे को मिलाकर बनाया गया है, जो सड़क को अधिक टिकाऊ बनाता है और शहरी इलाकों में कचरे की समस्या का समाधान भी करता है।


 बता दें कि इजीनियरिंग कॉलेज (टीसीई), मदुरई में केमिस्ट्री के प्रॉफेसर राजगोपालन वासुदेवन डामर के बदले प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल कर रोड बनवाते हैं। प्लास्टिक मैन ऑफ इंडिया के नाम से मशहूर प्रोफेसर राजगोपालन वासुदेवन अपने इनोवेशन से प्लास्टिक के कचरे से रोड बना रहे हैं।

 


 इस इनोवेशन के लिए उन्हें 10 साल कड़ी मेहनत करनी पड़ी। उन्होंने सबसे पहले 2002 में अपनी तकनीक से थिएगराजार कॉलेज के परिसर में प्लास्टिक कचरे से रोड का निर्माण कराया, इसके बावजूद उन्हें अपनी तकनीक को मान्यता दिलाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अंतत: 2004 में तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को अपना प्रोजेक्ट दिखाने के बाद उन्हें कामयाबी मिली।


 कई देशी-विदेशी कंपनियों ने राजगोपालन वासुदेवन को पेटेंट खरीदने का ऑफर दिया। लेकिन पैसों का मोह छोड़ उन्होंने भारत सरकार को यह टेक्नोलॉजी मुफ्त में दी। उनकी इस तकनीक से अबतक हजारों किमी. से अधिक पक्की सड़कें बन चुकी हैं। उनके इनोवेशन से जहां एक तरफ कम खर्च में मजबूत सड़क का निर्माण हो रहा है वहीं पर्यावरण के लिए सबसे खतरनाक माने जाने वाले प्लास्टिक का सदुपयोग भी हो रहा है।


 राजगोपालन वासुदेवन को प्लास्टिक से सड़क बनाने के काम की पहचान और सराहना करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इसी माह पद्मश्री से सम्मानित किया है।


 पश्चिम खासी हिल्स के डिप्टी कमिश्नर अरुनकुमार केम्भवी ने बताया कि हमने सड़क बनाने के लिए 470 किलो पॉलिथीन बैग, प्लास्टिक कप, चिप्स पैकेट और फोम पैकेजिंग जैसे प्लास्टिक अपशिष्ट का उपयोग किया है। यह कचरा जिला मुख्यालय नोंगस्टाइन और शिलांग से एकत्र किया गया था। इस एक किलोमीटर के रोड के लिए केवल 33 लाख रुपए का खर्च आया है। अगर इस तकनीक का उपयोग करके मेघालय में सभी सड़कों का निर्माण किया जाता है, तो हम प्लास्टिक के खतरों से छुटकारा पा सकते हैं।

 


 उन्होंने कहा, 'वर्ल्ड इकोनोमी फोरम की रिपोर्ट के मुताबिक प्लास्टिक बने रोड ज्यादा टिकाऊ होते हैं। इसपर बदलते मौसम, बाढ़, तेज गर्मी और ठंड का प्रभाव कम पड़ता है। नोंगलावी प्रथम और नोंगलावी द्वितीय में इसी तरह के सड़क का निर्माण किया जा रहा है, जो इस महीने के अंत तक पूरा होने की संभावना है।'