मिलिए पद्मश्री पियोंग टेमजेन जमीर से, जिन्होंने नागालैंड में 2 हजार हिंदी के शिक्षक तैयार किए

Daily news network Posted: 2018-04-08 14:55:27 IST Updated: 2018-04-08 14:55:27 IST
मिलिए पद्मश्री पियोंग टेमजेन जमीर से, जिन्होंने नागालैंड में 2 हजार हिंदी के शिक्षक तैयार किए
  • पियोंग टेमजेन जमीर मूल से नागालैंड के लोंगसा गांव के रहने वाले हैं। नागालैंड में हिंसी को पसंद नहीं किया जाता था।

कोहिमा।

पियोंग टेमजेन जमीर मूल से नागालैंड के लोंगसा गांव के रहने वाले हैं। नागालैंड में हिंसी को पसंद नहीं किया जाता था। इन्होंने जब लोगों को हिंदी सिखाना शुरु किया तो पृथक क्षेत्र की मांग कर रहे अलगाववादी इन्हें धमकी देने लगे। ये डरे नहीं और हिंदी भाषा सिखाने और उसके प्रचार प्रसार का फैसला किया। 1963 में महाराष्ट्र के वर्धा चले गए। जहां हिंदी भाषा की पढ़ाई की। वापस नागालैंड आए तो हिंदी शिक्षक के रूप में काम करना शुरु किया। कुछ दिन पढ़ाने के बाद बीएड की डिग्री लेने के लिए आगरा चले गए। डिग्री पूरी होने पर वापस घर आए और हिंदी ट्रेनिंग कॉलेज में इंस्ट्रक्चर के तौर पर नौकरी शुरु की। गांव और शहर के लोगों के विरोध की वजह से 1982 में नौकरी छोड़ दी। इसी साल विधानसभा चुनाव भी लड़ा जिसमें हार का सामना करना पड़ा। ये पूरे नागालैंड में दो हजार से अधिक हिंदी के शिक्षक तैयार कर चुके हैं।



 



आखिर क्यों हैं चर्चा में

पियोंग को हाल ही में नागालैंड में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नागरिक अलंकरण पद्मश्री से सम्मानित किया है। बता दें कि इन्होंने सबसे पहले अपने घर के सदस्यों और गांव के लोगों को हिंदी सिखाने का काम करना शुरु किया था।

 

इनकी पहली स्टूडेंट बनीं हिंदी टीचर

इन्होंने सबसे पहले एक महिला को हिंदी भाषा सिखाने का काम किया, जिसका पति छोड़कर चला गया। इनकी मेहनत से ही महिला गांव में हिंदी शिक्षक है। इन्हीं के प्रयास से पूरा गांव अच्छी हिंदी बोलना जानता है। इन्हें फादर ऑफ हिंदी इन नागालैंड भी कहा जाता है। बड़ा बेटा वालेन जमीर अब इनके हिंदी के अभियान को आगे बढ़ा रहा है।

 

बता दें कि 86 साल के पियोंग टेमजेन जमीर को 2006 में हिंदी भाषा को बढ़ावा देने के लिए दिवंगत राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने गंगा सरन अवॉर्ड दिया था। 1982 से 1987 तक इनके पास अपना खर्च चलाने के लिए नौकरी तक नहीं थी।

 


गौरतलब है कि नागा महिला लेंटिना ओ ठक्कर को सामाजिक सेवा के क्षेत्र में पद्मश्री प्रदान किया गया था।  नागा हिल्स जिले में मोकोकचुंग जिले के मरेंकोंग गांव में जन्मी लेंटिना शुरुआत से ही समाज से आगे रहीं। इसके साथ ही वह अपने गांव में सातवीं कक्षा तक पहुंचने वाली पहली लड़की थी। दशकों से पहाडयि़ों में गांधी की विचारधाराओं का फैला रही हैं साथ गांधीवादी दादी के नाम से फेमस है। लेंटीना ए ठक्कर को नगालैंड में दादी के नाम से जाना जाता है। ये अपने गांव (चुचुइमलांग) की पहली महिला हैं, जिन्होंने सातवीं तक पढ़ाई की। वह नगालैंड की पहाडिय़ों में दशकों से गांधी के विचारों को फैलाने के लिए घूमती रहती हैं।

 

 

 

 

लेंटीना ए ठक्कर अभी 86 साल की है और ये स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नटवर ठक्कर की पत्नी है। जानकारी के मुताबिक लेटिना ए ठक्कर ऐसी पहली महिला हैए जिन्होंने गांधीवादी विचारों से प्रभावित होकर 1950 में असम की राजधानी गुवाहाटी में स्थित कस्तूरबा गांधी आश्रम से शिक्षा ली है।