कार्यस्थल पर महिलाओं की शारीरिक प्रताड़ना में आया भारी उछाल, देखें ये रिपोर्ट

Daily news network Posted: 2019-06-04 17:35:54 IST Updated: 2019-06-04 19:12:29 IST
  • असम में कार्यस्थल पर महिलाओं के प्रताणित होने के चौकाने वाले आकड़ें सामने आए हैं।

असम में कार्यस्थल पर महिलाओं के प्रताणित होने के चौकाने वाले आकड़ें सामने आए हैं। अनचाहा शारीरिक संपर्क, स्पष्ट यौन दृश्य, यौन रूप से रंगीन टिप्पणी और भी बहुत कुछ। ज्ञात हो कि राज्य में इस तरह का यह पहला रिसर्च किया गया है जिसमें ये पाया गया कि चाहें व सरकारी संस्थान हो या निजी, लगभग 41 प्रतिशत के करीब महिलाएं असम में शारीरिक प्रताणना का सामना कर रही हैं।

 

 


 असम में कार्यस्थल पर सुरक्षा और महिलाओं का सम्मान' नाम का ये रिसर्च गुवाहाटी विश्वविद्यालय व नार्थ ईस्ट नेटवर्क तथा मूलरूप से गुवाहाटी के एक एनजीओ पर आधारित एक रिपोर्ट है। गुवाहाटी विश्वविद्यालय में महिला अध्ययन के विभाग की सह-प्राध्यापक डा. पोली ने ये बताया कि सभी तरह के यौन उत्पीड़न, चाहे वो बोलचाल की भाषा में हो, शारीरिक रूप से या मानसिक रूप से ही क्यों न हो, दर्ज किए गए हैं।

 

 


 ज्ञात हो कि ये अध्ययन सात इलाकों में किया गया है जिसमें गुवाहाटी, बरपेटा, कोंकराझाड़, तेजपुर, डिब्रूगढ़, डिफू और सिलचर शामिल हैं। 364 उत्तरदाताओं के बीच किए गए शोध में पाया गया कि ज्यादातर महिलाएं इस बात से अवगत नहीं थीं कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न का कारण क्या है। नेशनल क्राइम रिकाॅर्ड्स ब्यूरो के 2016 के आकड़ों के अनुसार दिल्ली के बाद असम महिलाओं के साथ अपराध के चलते देश का दूसरा सबसे बड़ा क्राइम स्टेट बन गया है। जहां एक तरफ राजधानी में एक लाख की जनसंख्या पर 160.4 मामले दर्ज किए गए हैं तो वहीं असम में 131.3

 

 


 एनइएन की निदेशक अनुरिता पी हजारिका ने बताया कि ज्यादातर शिक्षित महिलाओं को यौन उत्पीनड़न और उसके नियम कानून की भी जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि सिक्योरिटी गार्ड और आने जाने के संसाधन मिल जाने को इन महिलाओं ने यौन उत्पीड़न से सुरक्षा मान लिया हैं। यहीं नही अपनी नौकरी खो देने के डर के चलते वो कई बार प्रताड़ना को सहन करने को भी तैयार हो जाती हैं।

 

 


 213 लोगों द्वारा दिए गए जवाबों में पाया गया कि 69% प्रतिशत कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न के खिलाफ रोकथाम, निषेध और निवारण के अधिनियम 2013 के तहत कोई भी तंत्र मुहिया नहीं कराया गया है। यौन उत्पीड़न के मामलों में जिन्होंने शिकायत दर्ज भी कराई उन्हें कोई भी उचित परिणाम प्राप्त नहीं हुआ है, और शायद यहीं कारण है कि सिर्फ 27% ही शिकायत यौन उत्पीड़न के चलते दर्ज की गई हैं। आपको बता दें कि 90 प्रतिशत से ज्यादा कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न को लेकर किसी तरह की जानकारी तक मुहिया नहीं कराई जाती, वहीं दूसरी ओर 71 प्रतिशत मामलों में किसी तरह की मीटिंग, ट्रेनिंग और वर्कशाप भी कर्मचारियों के बीच में सलंघ्न नहीं कराई जाती है, जो कि बहुत ही दुर्भाग्यापूर्ण स्थिति को दर्शाता है।