मुख्यमंत्री ने फिर जताया भरोसा, 'लोगों को NRC को लेकर घबराने की कतई जरूरत नहीं'

Daily news network Posted: 2019-08-24 09:22:37 IST Updated: 2019-08-24 16:53:45 IST
  • असम में चल रहे एनआरसी में कथित रूप से गलत नाम जोड़े और हटाए जाने को लेकर BJP द्वारा की गई समीक्षा की मांग के बीच सरकार ने हाल ही में संकेत दिए थे कि वह इस पर कानून बनाने का रास्ता अख्तियार कर सकती है...

गुवाहाटी।

असम में चल रहे एनआरसी में कथित रूप से गलत नाम जोड़े और हटाए जाने को लेकर BJP द्वारा की गई समीक्षा की मांग के बीच सरकार ने हाल ही में संकेत दिए थे कि वह इस पर कानून बनाने का रास्ता अख्तियार कर सकती है, लेकिन अब मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने साफ कहा कि राज्य के लोगों को एनआरसी मुद्दे पर घबराने की कतई ज़रूरत नहीं है।

 


 उन्होंने कहा कि 31 अगस्त को प्रकाशित होने जा रही अंतिम एनआरसी में जिनके नाम नहीं हैं, उन्हें घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है। ड्राफ्ट एनआरसी में लगभग 41 लाख लोगों के नाम दर्ज नहीं हैं।


 गुवाहाटी में गुरुवार रात एक कार्यक्रम में शिरकत के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, 'राज्य तथा केंद्र सरकार हर मुमकिन कोशिश कर रही है, ताकि गलतियों के बिना एनआरसी का प्रकाशन सुनिश्चित हो सके। हम सुप्रीम कोर्ट का पूरा आदर करते हुए समूची प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट स्वयं वर्ष 2013 से एनआरसी अपडेशन के काम की निगरानी कर रहा है। मुझे भरोसा है कि राज्य के लोग अंतिम एनआरसी के प्रकाशन के बाद भी उसी तरह सहयोग देते रहेंगे, जिस तरह उन्होंने ड्राफ्ट एनआरसी के प्रकाशन के बाद दिया था। अंतिम एनआरसी के प्रकाशन के बाद भी सभी समुदायों के बीच एकता, भाईचारा और शांति इसी तरह बनी रहेगी।'



इससे पहले इसी सप्ताह सर्बानंद सोनोवाल केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से एनआरसी के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए दिल्ली आए थे, और संकेत दिया था कि केंद्र और राज्य की BJP-नीत सरकारें अंतिम एनआरसी के री-वेरिफिकेशन के विकल्पों पर विचार कर रही हैं, क्योंकि पहले सरकार ने दावा किया था कि इसमें गलत नाम जोड़े और हटाए गए हैं। अब मुख्यमंत्री के इस बयान को अहम माना जा रहा है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने री-वेरिफिकेशन योजना के आग्रह को खारिज करते हुए अंतिम एनआरसी का प्रकाशन 31 अगस्त तक करने का निर्देश दिया था।


 एक अहम घटनाक्रम में गृह मंत्रालय ने भी एनआरसी से हटा दिए गए लोगों को इसके खिलाफ अपील करने देने की डेडलाइन को बढ़ाने का फैसला किया। मौजूदा समय में यह डेडलाइन 60 दिन की है, जिसे 120 दिन तक बढ़ा दिया गया है।


 असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, 'अगर किसी का नाम हट गया है, तो घबराने की ज़रूरत नहीं है। उनकी शिकायतों को सुनने के लिए पंचाट के ज़रिये व्यवस्था मौजूद है, और गृह मंत्रालय ने भी अपील के लिए 120 दिन की मोहलत दे दी है। गृह मंत्रालय ने पहले ही उन कदमों और प्रक्रियाओं को स्पष्ट कर चुकी है, जो अंतिम एनआरसी से नाम हटा दिए जाने की सूरत में उठाए जाने हैं।'