'हैलाकांडी के विवादित इलाके में रह रहे ज्यादातर लोग अवैध बांग्लादेशी हैं'

Daily news network Posted: 2018-04-12 16:02:55 IST Updated: 2018-04-12 17:13:12 IST
'हैलाकांडी के विवादित इलाके में रह रहे ज्यादातर लोग अवैध बांग्लादेशी हैं'
  • मिजाेरम के स्टूडेंट बाॅडी ने हालही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन भेजा है। जिसमें यह अारोप लगाया गया है कि असम आैर मिजाेरम के विवादित क्षेत्राें में रह रहे ज्यादातर लोग अवैध बांग्लादेशी हैं।

गुवाहाटी।

मिजाेरम के स्टूडेंट बाॅडी ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन भेजा है, जिसमें यह अारोप लगाया गया है कि असम आैर मिजाेरम के विवादित क्षेत्राें में रह रहे ज्यादातर लोग अवैध बांग्लादेशी हैं। ज्ञापन में छात्रों ने दावा किया है कि विवादित क्षेत्राें में रह रहे लोग अवैध नागरिक हैं, जो एनआरसी में अवैध साबित हाे चुके हैं।

 

 


 

हाल ही में मिजाेरम आैर असम के बीच हैलाकांडी इलाके में असम पुलिस आैर छात्रों के बीच संघर्ष हुआ था, जिसमें मिजो छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया था। आंदोलन करने वाले छात्र विवादित जमीन के एक छोटे से हिस्से में अस्थार्इ निर्माण कर रहे थे। उनका कहना था कि ये जमीन मिजाेरम के पूर्व मुख्यमंत्री ने डोनेट की थी। इससे पहले केंद्र सरकार ने यह घोषणा की थी कि गृह मंत्रालय इस मामले पर विचार करेगा आैर मसले पर जल्द ही रिपोर्ट पेश करेगा।

 



ज्ञापन में कहा है कि 1875 में ब्रिटिश शासन काल के दौरान बंगाल इस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन 1873 ने ब्रिटिश आैर मिजोरम के लुशार्इ क्षेत्र के बीच इस अंतर्राष्ट्रीय सीमा को स्वीकार किया था। ब्रिटिश शासन काल के दौरान मिजाेरम आैर असम के कछार के बीच सीमा निर्धारित करने के लिए 46 पिलर खड़े किए गए थे। आज भी इन्हें इनर लाइन के रूप में माना जाता है। असम आैर मिजोरम सीमा काे यही पिलर विभाजित करते हैं। आज भी असम आैर मिजोरम की सीमा को निर्धारित करने के लिए कोर्इ उचित लाइन नहीं है। 

 


 ज्ञापन में कहा है कि ये मिजो के लोग अपने मूल सीमा में वापस जाना चाहते हैं। हैलाकांडी जिले में (29 नवंबर से 1 दिसंबर) तीन दिनों के सर्वे के आधार पर करीब 98 फीसदी अवैध प्रवासी हैं, जिनमें 60 फीसदी मुसलामन हैं आैर 38 फीसदी हिंदू हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक यह सामने आया है कि हैलाकांडी में रह रहे ज्यादातर लोग भारतीय नागरिक नहीं है आैर न ही असमिया है। ज्ञापन में कहा है कि हम पीएम माेदी से ये उम्मीद हैं कि जल्द ही इस मसले हमारी मदद करेगें।