'एनआरसी को रोकने की बांग्लादेश की धमकी से सरकार अवगत नहीं '

Daily news network Posted: 2018-03-14 12:30:03 IST Updated: 2018-03-14 13:48:57 IST
'एनआरसी को रोकने की बांग्लादेश की धमकी से सरकार अवगत नहीं '
  • राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) को रोकने के लिए बांग्लादेश द्वारा विधिवत विरोध जताने संबंधी सूचना से राज्य सरकार अवगत नहीं है

गुवाहाटी।

राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (एनआरसी) को रोकने के लिए बांग्लादेश द्वारा विधिवत विरोध जताने संबंधी सूचना से राज्य सरकार अवगत नहीं है। एनआरसी कार्य जारी है तथा सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार चालू वर्ष के 30 जून तक एनआरसी मसौदा जारी करने के लिए पूरी सक्रियता के साथ काम चल रहा है।

 

 

 


विधानसभा के शून्यकाल में भाजपा विधायक मृणाल सइकिया ने एक खबर की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट किया तो संसदीय कार्यमंत्री चंद्रमोहन पटवारी ने सदन को इस आशय की जानकारी दी। मंत्री ने बताया कि असम में जारी एनआरसी कार्य को रोकने की बांग्लादेश की धमकी के बारे में राज्य सरकार अवगत नहीं है। केंद्र सरकार के समक्ष बांग्लादेश सरकार ने इस बारे में विधिवत कोई विरोध  जताया है या नहीं, इस बारे में असम सरकार को पता नहीं हैं, क्योंकि एक विदेशी सरकार के साथ संपर्क का विषय केंद्र सरकार के विदेश मंत्रालय के तहत होता है।

 

 

 

 

गौरतलब है कि असम में जारी राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) से चिंतित बांग्लादेश ने यहां चिन्हित होने वाले घुसपैठियों को वापस लेने से साफ  इनकार कर दिया था। यहां तक कि उसने अपने राष्ट्रपति अब्दुल हामिद की असम यात्रा में घुसपैठ मुद्दे पर बातचीत की संभावनाओं को भी नकार दिया था। पत्रकारों के सामने भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त सइद मुअज्जम अली ने साफ  कर दिया था कि उनके राष्ट्रपति व असम के मुख्यमंत्री के बीच इस बारे में बातचीत की गुंजाइश उनका देश नहीं देखता। उन्होंने कहा कि असम में एनआरसी पूरी होने के बाद उनका देश यहां के घुसपैठियों को वापस नहीं लेगा।

 

 

 


अली के मुताबिक उनका देश एनआरसी प्रक्रिया से खासा चिंतित है। वे नहीं मानते कि असम में एनआरसी प्रक्रिया से उनके देश का कोई संबंध है। इसलिए घुसपैठियों को वापस लेने का सवाल ही नहीं उठता। बता दें कि राज्य में एनआरसी की मूल वजह ही यहां अरसे से रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों ही हैं। उनकी पहचान के अहम उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट की सीधी देखरेख में यह प्रक्रिया तीन साल से चल रही है। राज्य में तमाम जातीय संगठन एनआरसी के बाद चिन्हित घुसपैठियों को बांग्लादेश वापस भेजने के लिए अभी से दबाव बना रहे हैं। वे केंद्र की तरफ से भारतीय नागरिकता कानून संशोधन विधेयक को पारित कराने की कोशिशों का पुरजोर विरोध जताते आ रहे हैं।