दृढ़ इच्छाशक्ति के बूते युवक ने जीती जीवन की जंग

Daily news network Posted: 2019-02-22 17:42:14 IST Updated: 2019-02-22 17:42:42 IST
दृढ़ इच्छाशक्ति के बूते युवक ने जीती जीवन की जंग
  • मनुष्य के मन में यदि दृढ़ इच्छाशक्ति है तो वह किसी भी तरह की बाधा, विपत्ति को पार कर अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।

मनुष्य के मन में यदि दृढ़ इच्छाशक्ति है तो वह किसी भी तरह की बाधा, विपत्ति को पार कर अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। इस बात का प्रमाण दिया है रोहा-चापरमख के एक तीस वर्षीय युवक मृदुल तामुली ने, जो शारीरिक रूप से अक्षम है।

 

 


चापरमुखथ आटीगांव निवासी तथा रोहा मत्स्य महाविद्यालय के डीन डाॅ. कृष्णकांत तामुली और दीपाली तामुली का एकमात्र पुत्र मृदुल भयावह एनसेफेलाइटिस रोग से पीड़ित होकर तीन महीने बीस दिन तक कोमा में रहकर जन्म-मृत्यु की जंगत लड़ी परंतु अंत में मृदुल ने अपनी इच्छाशक्ति और मनोबल के बलबूते बीमारी को मात देकर असंभव को भी संभव करके दिखाया। वर्ष 2007 में मृदुल आकस्मिकत भयानक एनसेफेलाइटिस से पीड़ित हो गया। इसके बाद उसे गुवाहाटी जीएनआरसी अस्पताल में भर्ती कराया गया। परंतु मृदुल की तबीयत दिनों दिन बिगड़ती चली गई और मृदुल कोमा में चला गया। जिसके बाद माता पिता के पैर तले जमीन खिसक गई। मृदुल के इस अवस्था को एक चैंलेज के तौर पर लेकर विशिष्ट चिकित्सकत डाॅ. नोमल चंद्र बोरा और सहयोगियों ने मृदुल को बचाने के लिए दिनरात एक कर दिया।

 


दिल्ली स्थित सर्वभारतीय आयुर्विज्ञान प्रतिष्ठान से भी प्रख्यात स्नायुरोग विशेषज्ञको भी आमंत्रित किया गया और मृदुल की चिकित्सा शुरू की गई। माता-पिता की प्रार्थना और चिकित्सकों की मेहनत से तीन महीने बीस दिन के लंबे अंतराल के बाद मृदुल को होश आया और उसके माता पिता और चिकित्सकों के मुखपर हंसी दिखाई दी। चिकित्सक डाॅ. नोमल चंद्र बोरा के लिए भी मृदुल हो गया उनकी सफलता का उदाहरण। परंतु फिर भी दुर्भाग्यवश दृष्टि और स्मृति शक्ति खो दी और पैदल चलने में असमर्थ हो गया। परंतु मृदुल ने अपने मनोबल को कमजोर नहीं होने दिया। चिकित्सक डाॅ.नोमल बोरा के परामर्श पर इसबार मृदुल को वेलोर में चार महीने की लंबी चिकित्सा के बाद मृदुल स्वस्थ होने लगा। धीरे-धीरे मृदुल बोलने के साथ ही उसकी स्मृतिशक्ति भी लौटने लगी और वह आज पूरी तरह से स्वस्थ हो गया है।