एनआरसी : राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग, किसी भी भारतीय का नाम नहीं छूटे

Daily news network Posted: 2018-08-10 09:46:39 IST Updated: 2018-08-10 09:46:39 IST
एनआरसी : राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग, किसी भी भारतीय का नाम नहीं छूटे
  • कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वामदल सहित विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल ने आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि असम में राष्टीय नागरिक पंजी (एनआरसी) से एक भी भारतीय नागरिक को बाहर नहीं रखा जाए ।

नई दिल्ली।

कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और वामदल सहित विपक्षी दलों के प्रतिनिधिमंडल ने आज राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि असम में राष्टीय नागरिक पंजी  (एनआरसी) से एक भी भारतीय नागरिक को बाहर नहीं रखा जाए । पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौडा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने श्री कोविंद से गुरुवार दोपहर सवा एक बजे राष्ट्रपति भवन में मुलाकात कर इस मद्दे पर उनका ध्यान इस ओर खींचा और एक ज्ञापन भी दिया । 




प्रतिनिधिमंडल ने कोविंद को एक ज्ञापन सौंपकर सरकार पर राष्ट्र के लोकतांत्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष मूल्यों को कमतर करने का आरोप लगाया । प्रतिनिधिमंडल ने दावा किया कि एनआरसी में 40 लाख से अधिक भारतीय नागरिक बाहर हो गए है जिसमें बंगाली, असमिया, राजस्थानी, मारवाडी, बिहारी, गोरखा, पंजाबी और उत्तर प्रदेश, दक्षिणी राज्यों के लोग और आदिवासी शामिल है जो लंबे वक्त  से असम के निवासी हैं। तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ट नेता डेरेक ओ ब्रायन ने बताया कि श्री कोविंद ने मुलाकात के लिए निर्धारित समय से अधिक देर तक उनकी बातें सुनी और करीब आधे घंटे से अधिक समय तक उनकी बातों पर गौर से सुना । प्रतिनिधिमंडल में ग्यारह लोग शामिल थे ।




 राष्ट्रपति को दिए गए ज्ञापन में जनता दल सेक्युलर के अध्यक्ष देवगोडा के अलावा कांग्रेस के आनंद शर्मा, समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव, राष्ट्रीय जनता दल के मीसा भारती, राष्टीय कांग्रेस पार्टी की सुप्रिया सुले, नेशनल कांफ्रेंस के फारूक अब्दुला, द्रमुक के तिरुची शिव, माकपा के डी सलीम भाकपा के डी राजा, तेलगु देशम के वाई एस चौधरी, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह तथा तृणमूल कांग्रेस के डेरेक श्री ब्रायन, और सुदीप वंशेपाध्याय के हस्ताक्षर शामिल हैं । 




ज्ञापन में कहा गया है कि सत्तारूढ़ दल ने उच्चतम न्यायालय  के खिलाफ भ्रामक बयान देकर देश के लोकतांत्रिक  और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की  अवहेलना की है जबकि शीर्ष अदालत ने किसी भी नागरिक को इस सूची से वंचित करने को नहीं कहा है। इस सूची में सैनिकों, पूर्व राष्ट्रपति तथा पूर्व मुख्यमंत्रियों के परिवार के लोगों के आलावा नागरिक समाज के कई प्रमुख लोगों का भी नाम नही है। 




यह सूची राजनीतिक बदले की कार्रवाई के तहत तैयार की  गयी है। उच्चतम न्यायलय ने असम के राष्टीय नागरिक रजिस्टर के प्रदेश संयोजक और रजिस्टर जनरल को भी फटकार लगाई है। श्री ब्रायन ने यह भी कहा कि ज्ञापन में हमने राष्ट्रपति का ध्यान इस बात की और भी खींचा है कि इस रजिस्टर की धटना के बाद सत्तापक्ष संसद संविधान न्यायपालिका और मीडिया की अवहेलना का उनका अवमूलन कर रहा है । इसलिए संविधान के रक्षक होने के नाते आप से अनुरोध है कि आप इसमें हस्तक्षेप कर किसी भी नागरिक का नाम इस सूची से वंचित न होने को सुनिश्चित करें  ।