मोदी सरकार की बड़ी सौगात, 2020 तक इस राज्य में तैयार हो जाएगा अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट

Daily news network Posted: 2019-06-19 15:16:58 IST Updated: 2019-06-19 20:31:11 IST
  • गुवाहाटी और इंफाल के बाद, अगरतला हवाईअड्डा इस साल के अंत तक या 2020 की शुरुआत में उत्तरपूर्वी क्षेत्र में तीसरा अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा बनने वाला है। एक मंत्री ने यह जानकार दी।

अगरतला।

गुवाहाटी और इंफाल के बाद, अगरतला हवाईअड्डा इस साल के अंत तक या 2020 की शुरुआत में उत्तरपूर्वी क्षेत्र में तीसरा अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा बनने वाला है। एक मंत्री ने यह जानकार दी। त्रिपुरा के परिवहन और पर्यटन मंत्री प्रणजीत सिंघा रॉय ने कहा, 'भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने हमें सूचित किया है कि अगरतला के महाराजा बीर बिक्रम (एमबीबी) हवाईअड्डे को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए चल रहे कार्य इस साल के अंत तक पूरे हो जाएंगे। लेकिन अगर मॉनसून के मौसम या किसी अन्य कारक के कारण काम में बाधा आती है, तो 2020 तक इसकी घोषणा की जाएगी।'


एएआई ने विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करके अगरतला हवाईअड्डे को अंतर्राष्ट्रीय मानकों में अपग्रेड करने के लिए 438 करोड़ रुपये की परियोजना शुरू की थी। मंत्री ने कहा, '438 करोड़ रुपये के बजटीय व्यय में वृद्धि की उम्मीद है। हालांकि, हमारी सरकार लगातार एएआई को कह रही है कि वह कार्य जल्द पूरा करे और निर्धारित मानकों को बनाए रखे।'

 

 मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने हाल ही में नई दिल्ली में नागरिक उड्डयन मंत्री के साथ अगरतला हवाईअड्डे के उन्नयन के बारे में चर्चा की, जिसे 1942 में तत्कालीन राजा महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर ने बनवाया था।


 एयरपोर्ट की खास बातें-

 -भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण (एएआई) 438 करोड़ रुपए की लागत से अगरतला हवाई अड्डे को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार करेगी अपग्रेड।


-वर्तमान में मौजूद अगरतला हवाई अड्डे को 1942 में तत्कालीन राजा महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर द्वारा बनाया गया था।


 -अगरतला हवाई अड्डा पूर्वोत्तर का दूसरा सबसे व्यस्त हवाई अड्डा है।


-द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इस हवाई अड्डे का उपयोग अमेरिकी वायुसेना के चौथे लड़ाकू कार्गो समूह द्वारा म्यांमार के ऊपर कर्टिस सी-46 कमांडो विमान उड़ाने के लिए किया गया था।

 


 -द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यह हवाई अड्डा, जमीन पर मौजूद सहयोगी सेनाओं को गोला-बारूद की आपूर्ति में सहयोगी साबित हुआ था।


-त्रिपुरा सरकार ने नए टर्मिनल की बिलडिंग, रनवे और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए एएआई को 72 एकड़ भूमि प्रदान की है।


-हवाई अड्डे के उद्घाटन के बाद यहां ढाका और बाग्लादेश के अन्य शहरों के लिए उड़ानें संचालित की जाएंगी। इस एयरपोर्ट जरिए हर साल औसतन 9 लाख यात्री यात्रा करेंगे।


 -केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने पिछले साल इस एयरपोर्ट का नाम बदलकर त्रिपुरा के अंतिम शासक महाराजा बीर बिक्रम किशोर माणिक्य बहादुर के नाम पर रखा था।


-यह हवाई अड्डा राजधानी अगरतला से 20 किमी उत्तर में स्थित है और बांग्लादेश की सीमा के पास है।