चीन को सबक सिखाने के लिए जरूरी है पूर्वोत्तर राज्यों का विकास

Daily news network Posted: 2018-03-31 10:24:54 IST Updated: 2018-03-31 10:44:54 IST
चीन को सबक सिखाने के लिए जरूरी है पूर्वोत्तर राज्यों का विकास
  • चीन मंसूबों को भांपते हुए भारत ने अपनी कूटनीतिक रणनीति तो बदली ही है साथ ही साथ पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर सरकार की रणनीति भी बदली है।

गुवाहाटी

चीन मंसूबों को भांपते हुए भारत ने अपनी कूटनीतिक रणनीति तो बदली ही है साथ ही साथ पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर सरकार की रणनीति भी बदली है। केंद्र सरकार के साथ अब रक्षा सलाहकारों का भी यही मानना है कि देश के पूर्वोत्तर राज्यों के विकास को लेकर अब सुस्ती नहीं दिखाई जा सकती है।

 

 



केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को पूर्वोत्तर राज्यों को विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। केंद्र सरकार ने राज्यों की तरफ से विकास परियोजनाओं में हो रही दिक्कतों को देखते हुए वहां की तमाम परियोजनाओं को अपने खर्चे से ही पूरा करने का फैसला किया है। इससे वहां सड़क, रेल व इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी तकरीबन 840 परियोजनाओं का काम तेजी से पूरा हो सकेगा।

 

पूर्वोत्तर के विकास को मजबूत करना

 

 लेकिन पूर्वोत्तर में विकास को तेजी देने के लिए सरकार कई अन्य योजनाओं पर भी काम कर रही है जिसमें जापान के साथ मिल कर इस समूचे क्षेत्र को विकसित करने का एक व्यापक एजेंडा तैयार किया जा रहा है। 20 मार्च, 2018 को नई दिल्ली में नार्थ ईस्ट के विकास में भारत-जापान की भागीदारी विषय पर आयोजित एक समारोह में जापान के राजदूत ने केंजी हीरामात्सु ने इस भावी सहयोग के बारे में बताया। उन्होंने कहा, 'अब समय आ गया है कि भारत और जापान नार्थ ईस्ट राज्यों के विकास में कोई कमी नहीं छोड़े।' दोनो देशों के बीच यह बात हो रही है कि पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ी संयुक्त परियोजनाओं को सिंगल विंडो मंजूरी देने की व्यवस्था की जाए।

 

 


आसियान देशों तक पहुंच को बढ़ाना

 

देश के पूर्वोत्तर राज्यों को सड़क मार्ग से म्यांमार व थाइलैंड से जोड़ने की योजना काफी रफ्तार पकड़ चुकी है। इस वर्ष 26 जनवरी के मौके पर आसियान देशों के राष्ट्राध्यक्ष भारत की यात्रा पर आये थे जहां पूर्वोतर राज्यों के सड़क मार्ग को दूसरे देशों तक भी पहुंचाने को चर्चा हुई थी। भारत सरकार की योजना है कि पूर्वोत्तर से आसियान देशों तक जा रही इस सड़क के पास कुछ मैन्यूफैक्चरिंग हब बनाये जाए। इससे पूर्वोत्तर राज्यों को आर्थिक तौर पर सीधे आसियान की मजबूत अर्थव्यवस्थाओं से जोड़ा जा सकेगा और इससे ना सिर्फ पूर्वोत्तर पर भारत का भी विकास संभव हो पायेगा।