कारोबार सुगम बनाने में पूर्वोत्तर के राज्य सबसे पीछे

Daily news network Posted: 2018-03-29 11:10:31 IST Updated: 2018-03-29 12:41:20 IST
कारोबार सुगम बनाने में पूर्वोत्तर के राज्य सबसे पीछे
  • सरकार जहां एक आेर देश भर में उद्यमशीलता को बढ़ावा देना चाहती है तो वहीं पूर्वोत्तर के राज्यों में कोर्इ सुधार देखने को नहीं मिल रहा है।

नर्इ दिल्ली।

सरकार जहां एक आेर देश भर में उद्यमशीलता को बढ़ावा देना चाहती है तो वहीं पूर्वोत्तर के राज्यों में कोर्इ सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि विश्व बैंक के द्वारा की जाने वाली कारोबार सुगमता काे लेकर राज्यों के सालाना रैंकिंग की तीसरे संस्करण की रिपार्ट में सामने आया है। जिसमें कमजोर रहें राज्यों में त्रिपुरा और नागालैंड शामिल हैं। जबकि अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, मेघालय और मणिपुर जैसे राज्य एक भी सुधार लागू नहीं कर रहे हैं, जिसकी वजह से उनके अंक शून्य के करीब है।

 

 

 



बुधवार को आए रैंकिंग के इस संस्करण में बंगाल पश्चिम बंगाल 15वें स्थान से पहले स्थान पर आ सकता है जिसमें छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश भी शामिल होंंगें। पिछले साल आंध्र प्रदेश व तेलंगाना प्रमुख राज्य के रूप में उभरे थे, जहां कारोबार सुगम था जबकि गुजरात तीसरे स्थान पर था। इस साल 3 प्रमुख राज्यों के बाद झारखंड, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक को 10 प्रमुख राज्योंं की सूची में जगह मिल रही है। उत्तराखंड और महाराष्ट्रप्रमुख 10 राज्यों की सूची से बाहर हो सकते हैं, जबकि कर्नाटक वापसी करने जा रहा है।

 

 

 


 

आंकड़ों के मुताबिक यह संकेत मिलते हैं, जो रैंकिंग कराने वाले औद्योगिक  नीति एवं संवर्धन विभाग (डीआईपीपी) के ऑनलाइन डैशबोर्ड से पता चलता है। पिछले साल डीआईपीपी ने बिजनेज रिफॉर्म ऐक् शन प्लान 2017 के तहत नियामकी प्रक्रिया, नीतियों, कार्यप्रणाली या कार्यवाही में 372 सुधारों की सूची को अंतिम रूप दिया था। इसे 12 प्रमुख सुधार क्षेत्रों में विभाजित किया गया था। प्रत्येक राज्य द्वारा सफलतापूर्वक सुधार करने को डैशबोर्ड पर अद्यतन किया गया है जिसमें सुधारों को सबसे ज्यादा लागू करने वाले राज्यों को उच्चतम रैंक में रखा गया है।

 

 


 बता दें कि पहली रैंकिंग में सिर्फ 7 राज्यों ने सरकार द्वारा दिए गए सुझावों का 50 प्रतिशत लागू किया था, जबकि दूसरे संस्करण में 18 राज्यों ने इस स्तर से ज्यादा सुधार लागू किए। इस साल यह संख्या सिर्फ 21 राज्यों तक पहुंच चुकी। बहरहाल राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को 0 से 100 के पैमाने में से महज 34 अंक मिले हैं आैर पूर्वोत्तर के राज्यों की रैंकिंग शून्य है। बता दें कि यह महत्त्वपूर्ण है कि विश्व बैंक अपनी रैंकिंग में भारत का स्कोर तय करने के लिए सिर्फ दिल्ली और मुंबई से आंकड़े लेता है। विश्व बैंक के अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक सर्वेक्षण कराया जाता है।

 

 

 


 गौरतलब है कि ये रैंकिंग शुरुआत मेंं जनवरी 2017 में आने की उम्मीद थी, लेकिन इसमेंं देरी हो गई। डीआईपीपी के अधिकारियों ने कहा कि अब अगले 4-5 सप्ताह में सूची आ जाएगी। डीआईपीपी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'राज्यों द्वारा किए गए सुधार की वैधता सहित सभी प्रक्रिया केंद्र की ओर से पूरी कर ली गई है। इस साल हम पहली बार उद्योग जगत से फीडबैक ले रहे हैं, जिससे इस प्रक्रिया को त्रुटिरहित बनाया जा सके और उसके बाद अंतिम रैंकिंग की गणना की जा सके। यही वजह है कि इस बार ज्यादा समय लगा।'