लोकसभा चुनाव 2019ः पूर्वोत्तर में मोदी की लहर, NDA बंपर जीत की ओर, ये रहा सबूत

Daily news network Posted: 2019-05-23 06:37:16 IST Updated: 2019-05-23 13:53:15 IST
लोकसभा चुनाव 2019ः पूर्वोत्तर में मोदी की लहर, NDA बंपर जीत की ओर, ये रहा सबूत

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए मतों की गिनती शुरु हो चुकी है। पूर्वोत्तर राज्यों में कमल खिलता नजर आ रहा है। यहां भाजपा और उसके सहयोगी दलों ने शुरुआती रुझानों में अपनी बढ़त बना ली है। बता दें कि पूर्वोत्तर में लोकसभा की कुल 25 सीटें हैं। सर्वाधिक 14 सीटें असम राज्य से आती हैं। 

 


- पूर्वोत्तर राज्य असम की बात की जाए तो यहां भाजपा गठबंधन 9 सीटों पर आगे चल रहा है। वहीं कांग्रेस पार्टी 2 सीट पर आगे चल रही है। एक सीट पर एआईयूडीएफ पार्टी आगे चल रही है। एक सीट पर अन्य आगे चल रहे हैं। 

- त्रिपुरा में बीजेपी 2 सीट पर आगे चल रही है। 

- अरुणाचल प्रदेश की दोनों सीटों पर बीजेपी के उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। 

- मेघालय की एक सीट पर कांग्रेस और एक सीट पर एनपीपी के उम्मीदवार आगे चल रहे हैं। 

- सिक्किम में एसकेएम पार्टी एक सीट पर आगे। 

- मिजोरम में भाजपा की सहयोगी एमएनएफ एक सीट पर अपनी बढ़त बनाए हुए है। 

- नागालैंड में एनडीपीपी के उम्मीदवार एक सीट पर आगे चल रहे हैं। 

- मणिपुर में एनपीएफ एक सीट पर आगे चल रही है।

- असम में पूर्व मुख्यमंत्री तरूण गोगोई के बेटे एवं कालियाबोर से कांग्रेस के मौजूदा सांसद गौरव गोगोई पीछे चल रहे हैं, जबकि राज्य के श्रम मंत्री पल्लब लोचन दास ने तेजपुर लोकसभा सीट से बढ़त बनाई हुई है।

- कालियाबोर से एजीपी के मणि माधव महन्त ने कांग्रेस के उम्मीदवार तरूण गोगोई पर बढ़त बना ली है।

- तेजपुर में प्रदेश सरकार में मंत्री और भाजपा प्रत्याशी पल्लब लोचन दास, कांग्रेस के एमजीवीके भानू से आगे चल रहे हैं। इस सीट पर अच्छी खासी संख्या में गोरखा आबादी है।

- मंगलदोई सीट से भाजपा के दिलीप सैकया कांग्रेस के भुवनेश्वर कलीता से से आगे चल रहे हैं।

-  नौगांव सीट पर भगवा दल के रूपक शर्मा ने कांग्रेस उम्मीदवार प्रद्धयुत बोरडोलोई पर बढ़त बनाई है।

- सिलचर सीट पर भाजपा प्रत्याशी राजदीप रॉय मौजूदा सांसद और कांग्रेस उम्मीदवार सुष्मिता देव से आगे चल रहे हैं।

- कोकराझार और धुब्री में क्षेत्रीय पार्टियों ने बढ़त ली हुई है।

- धुबरी में मौजूदा सांसद और एआईयूडीएफ के उम्मीदवार बदरूद्दीन अजमल, एजीपी के जबल इस्लाम से आगे चल रहे हैं।

- कोकराझार में बीपीएफ में प्रमिला रानी बह्मा यूनाइटेड पीपल्स पार्टी (लिबरल) के उखराव ग्वरा ब्रह्ममा से आगे चल रही हैं।

- डिब्रूगढ़ से भाजपा के रामेश्वर तेली ने कांग्रेस के पवन सिंह घटवार पर बढ़त बनाई हुई है।

-  जोरहट से भाजपा के तपन कुमार गोगोई कांग्रेस के सुशांत बोरगोहेन से आगे चल रहे हैं।

 


दो पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है भाजपा

असम में भाजपा असम गण परिषद और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ रही है। असम में 14 लोकसभा सीटों में स्वायत्त जिला, बारपेटा, धुबरी, डिब्रूगढ़, गुवाहाटी, जोरहाट, कलियाबोर, करीमगंज, कोकराझार, लखीमपुर, मंगलदोई, अबगोंग, सिलचर और तेजपुर शामिल हैं। असम की सभी 14 सीटों पर तीन चरण में मतदान संपन्‍न कराया गया। साल 2014 में बीजेपी ने असम की 14 लोकसभा सीटों में से सात पर जीत हासिल की थी। यहां कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के तीन-तीन सांसद हैं। एक सदस्य निर्दलीय है। बीजेपी के सहयोगी दल बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट और असम गण परिषद (एजीपी) का लोकसभा में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है।  इसके साथ ही अरुणाचल प्रदेश में 2, मणिपुर में 2, मेघालय में 2, मिजोरम में 1, नागालैंड में 1, सिक्किम में 1 और त्रिपुरा में लोकसभा की 2 सीटें हैं। 

 

 


 

असमः बीजेपी गठबंधन को मिल सकती हैं 9 सीटें

एक  एग्जिट पोल के अनुसार असम में बीजेपी गठबंधन को 9 सीटें मिल सकती हैं तो वहीं कांग्रेस को 3 सीटें मिलने की संभावना है। बता दें कि यहां बीजेपी एजीपी और बीपीएफ के साथ गठबंधन के तहत चुनाव लड़ रही है। वहीं बात करें अन्य एग्जिट पोल्स की, तो आपको बता दें कि India News-Polstrat के अनुसार बीजेपी गठबंधन को 9 सीटें मिल सकती हैं तो कांग्रेस के खाते में 4 सीटें आने का अनुमान है। असम में बीजेपी के प्रमुख उम्मीदवार रामेश्वर तेली एक युवा जनजातीय नेता हैं। इसके अलावा एक प्रत्याशी पल्लब लोचन दास असम के वित्त मंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा के करीबी सहयोगी हैं। मोनिमाधब महंत असम गण परिषद (एजीपी) के एक महत्वपूर्ण उम्मीदवार हैं। कांग्रेस के शीर्ष उम्मीदवारों में सुष्मिता देव, गौरव गोगोई, पबन सिंह घाटोवर और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एमजीवीके भानु हैं।




सोनोवाल की होगी परीक्षा

2014 में भाजपा को 36.50 प्रतिशत मत मिले और कांग्रेस को 29.60 प्रतिशत , एआईडीयूएफ को 14.80 प्रतिशत मत मिले थे और असम गण परिषद को 3.80 प्रतिशत मिले थे। ये लोकसभा चुनाव असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के द्वारा किये गए कामों की परीक्षा होंगे। केंद्र की मोदी सरकार ने अन्य राज्यों के साथ-साथ करोड़ों रुपये की योजनाएं इन राज्यों को भी दी और देश से करीब लाने के लिए रोड और एयर कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए काम किया। बता दें कि पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे अधिक सीटें असम में 14 लोक सभा सीट हैं। वहीं अरुणाचल प्रदेश में 2, मणिपुर-2, मेघालय-2, मिज़ोरम-1, नागालैंड-1, सिक्किम-1, और त्रिपुरा-2 हैं। सन 2011 की जनगणना के अनुसार असम की आबादी 3.11 करोड़ से अधिक है। असम की 34.2 फीसदी आबादी मुस्लिम है। असम में 2.19 करोड़ पंजीकृत मतदाता हैं। इन 2.19 करोड़ में से 1.12 करोड़ पुरुष मतदाता, 1.07 करोड़ महिला मतदाता और 491 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं। असम  में 145 उम्मीदवारों ने लोकसभा चुनाव लड़ा है। इनमें पहले चरण में 41, दूसरे चरण में 50 और तीसरे चरण में 54 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे।




कुछ ऐसा है पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों का हाल


अरुणाचल वेस्ट सीट

राज्यवार आंकड़ों और प्रत्याशियों की बात की जाए तो अरुणाचल की वेस्ट सीट पर फिलहाल बीजेपी का दबदबा है। 2014 के चुनाव में देश के गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने यहां से चुनाव जीता था। किरण रिजिजू 2004 का भी चुनाव जीत चुके हैं। बीजेपी ने एकबार फिर से किरण रिजिजू को मैदान में उतारा है। वहीं अन्य प्रत्याशियों में कांग्रेस से नाबाम टुकी, पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल से सुबु केची, जनता दल सेक्युलर से जरजुम एटी, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक से जोमिन न्योकिर कारा, नेशनल पीपुल्स पार्टी से ख्योडा एपिक का नाम शामिल है। वहीं, निर्दलीय उम्मीदवारों में रूमक जोमोह हैं। इस लोकसभा में विधानसभा की कुल 33 सीटें आती हैं।


 

अरुणाचल ईस्ट सीट

अरुणाचल ईस्ट सीट से साल 2014 में कांग्रेस पार्टी के निनोंग इरिंग ने जीत दर्ज की थी, वो इस सीट से दूसरी बार सांसद चुने गए हैं। इस संसदीय सीट से नामांकन रद्द होने और नाम वापस लेने की प्रक्रिया के बाद बीजेपी से तापिर गाओ,  कांग्रेस से लवांगछा वांगलात, पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल से मोंगोल योसमो, जनता दल(सेक्युलर) से बेंडे मिल और निर्दलीय उम्मीदवार सीसी सिंगफों मैदान में हैं।




इनर मणिपुर सीट

पिछले लोकसभा चुनाव में मणिपुर सीट से कांग्रेस पार्टी के डॉ. थोकचोम मेन्या ने जीत दर्ज की थी। वो तीसरी बार यहां से सांसद चुने गए हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उनको दो लाख 92 हजार 102 वोट यानी कुल मतदान का 46 फ़ीसदी वोट मिले थे। डॉ. थोकचोम मेन्या ने अपने प्रतिद्वंदी सीपीआई के मॉयरांग थेम को 94 हजार 674 मतों से करारी हार दी थी। इस चुनाव में मॉयरांग थेम को एक लाख 97 हजार 428 वोट मिले थे। इनर मणिपुर सीट से भाजपा ने इस बार आरके रंजन और कांग्रेस ने ओईनम नबा किशोर को चुनावी मैदान में उतारा है। 




आउटर मणिपुर सीट

2014 के चुनाव में कांग्रेस के थांग्सो बैटे (Thangso Baite) ने NPF के सोसो लोराहो (Soso Lorho) को हराया था। कांग्रेस प्रत्याशी को 296770 और दूसरे नंबर पर रहने वाले NPF प्रत्याशी को 281133 वोट मिले थे। 2014 की डाटा के मुताबिक यहां मतदाताओं की कुल संख्या 918966 है। इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 454309 और महिला मतदाताओं की संख्या 464657 है। यहां की कुल आबादी 2,721,756 है। इस चुनाव में भाजपा ने होलेम शोखोपाओ मैट और कांग्रेस ने के जेम्स को टिकट दिया है। 




शिलॉन्ग (मेघालय) सीट

शिलॉन्ग सीट से इस बार मैदान में 8 उम्मीदवार हैं जिसमें सांसद विंसेंट एच पाला कांग्रेस की टिकट पर मैदान में हैं। उनके अलावा भारतीय जनता पार्टी के सानबोर शुल्लाई, सीपीआई के जस्टिस खारबसंती, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के जेमिनो मावाथो 4 निर्दलीय उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।  इस सीट से कांग्रेस के नेता विंसेंट एच. पाला सांसद हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में विंसेट एच. पाला ने निर्दलीय उम्मीदवार प्रेचर्ड बी.एम. बसाइयामोइट को 40 हजार 379 मतों के अंतर से हराया था। इस चुनाव में विंसेंट एच. पाला को कुल 2 लाख 09 हजार 340 वोट मिले थे, वहीं दूसरे नंबर रहे निर्दलीय उम्मीदवार प्रेचर्ड बी.एम. बसाइयामोइट को 1 लाख 68 हजार 961 वोट मिले थे।

 


तुरा (मेघालय) सीट

इस संसदीय सीट पर 2016 में उपचुनाव हुए थे, जिसमें कोनराड संगमा ने कांग्रेस के उम्मीदवार दिकांची डी. शिरा को करीब 1 लाख 92 हजार 212 मतों से शिकस्त दी। ये सीट पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा के निधन के बाद खाली हुई थी, जिसके बाद यहां उपचुनाव हुआ, जिसमें पी.ए. संगमा के बेटे कोनराड के. संगमा को ऐतिहासिक जीत हासिल हुई थी। यहां मुख्य लड़ाई कांग्रेस, एनसीपी और नेशनल पीपुल्स पार्टी (एपीपी) के बीच ही रहती है, जबकि बीजेपी भी कड़ी टक्कर दे सकती है। इस बार लोकसभा चुनाव में कुल 3 उम्मीदवार मैदान में हैं। एनपीपी की ओर से अगाथा के संगमा मैदान में हैं, जबकि कांग्रेस की ओर से डॉक्टर मुकुल संगमा और भारतीय जनता पार्टी की ओर से रिकमैन गैरी मोमीन अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।



मिजोरम लोकसभा सीट

मिजोरम लोकसभा सीट की बात करें तो यहां भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) के सी.एल. रुआला सांसद हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में सी.एल. रुआला अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय उम्मीदवार रॉबर्ट रोमाविया रोयते को 6 हजार 154 वोटों से हराया। इस चुनाव में रुआला को कुल 2 लाख 10 हजार 485 वोट मिले थे, वहीं उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी रॉबर्ट आर. रोयते को 2 लाख 4 हजार 331 मत मिले। तीसरे नंबर पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार एम. लालमन्जुआला रहे, जिन्हें 11 हजार 890 वोट मिले। 6 हजार 495 वोटरों ने नोटा का इस्तेमाल किया। इस बार भाजपा ने यहां से निरुपम चकमा, काग्रेस ने सीएल रुआला और एमएनएप ने सी लालरोसांगा को टिकट दिया है।



नागालैंड लोकसभा सीट

इस सीट से कांग्रेस ने के. एल. चिशि को मैदान में उतारा है, एनपीपी ने हेइथुंग तुंगो पर दांव लगाया है, वहीं एनडीपीपी ने तोखेहो येपथोमी पर फिर से दांव लगाया है। इस  लोकसभा सीट से 'नागालैंड' से इस वक्त नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोगेसिव पार्टी (एनडीपीपी) के तोखेहो येपथोमी सांसद हैं। तोखेहो येपथोमी ने साल 2018 में हुए उपचुनाव में एनपीएफ उम्मीदवार सी अपोक जमीर को 173746 मतों के भारी अंतर से हराया था। येपथोमी को इस उपचुनाव में 594205 वोट मिले थे, जबकि एनपीएफ प्रत्याशी सी अपोक जमीर को 420459 वोट मिले। 2018 के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी, एनडीपीपी और पीपल्स डेमोक्रेटिक अलायंस (पीडीए) ने मिलकर इस सीट पर पूर्व मंत्री तोखेहो येपथेमी को कैंडिडेट बनाया। एनपीएफ प्रत्याशी सी अपोक जमीर को कांग्रेस का भी समर्थन हासिल था।

 


सिक्किम लोकसभा सीट

सिक्किम की राजनीति में दो दशक से अधिक समय दबदबा कायम रखने वाले सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) ने राज्य की एकमात्र लोकसभा सीट पर मौजूदा सांसद प्रेम दास राय पर एक बार फिर दांव लगाया है जिनके सामने कोई खास चुनौती नहीं है। बता दें कि भाजपा ने यहां से लातेन शेरिंग शेरपा, कांग्रेस ने  भारत बैसनेट और एसडीएफ प्रेम दास राय पर दांव लगाया है।



त्रिपुरा वेस्ट लोकसभा सीट

1996 से यहां कम्युनिस्ट पार्टी का कब्जा रहा है। इस लोकसभा सीट में विधानसभा की 60 सीटें हैं। 2014 के चुनाव में शंकर प्रसाद की जीत हुई थी। 2004 और 2009 के चुनाव में खगेन दास की जीत हुई थी। इस बार भाजपा ने यहां से प्रतिमा भौमिक, कांग्रेस ने सुबल भौमिक और सीपीआईएम ने शंकर प्रसाद दत्ता को चुनावी मैदान में उतारा है।




त्रिपुरा ईस्ट लोकसभा सीट

त्रिपुरा ईस्ट संसदीय क्षेत्र से फिलहाल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के जितेंद्र चौधरी सांसद हैं। उन्होंने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में अपने प्रतिद्वंदी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार सचित्र देबर्मा को हराया था। बीजेपी की टक्कर कांग्रेस और लेफ्ट के अलावा इंडीजीनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा से है।  जनजाति समुदाय के लिए आरक्षित त्रिपुरा पूर्व संसदीय क्षेत्र से बीजेपी ने इस बार रेबती त्रिपुरा को मैदान में उतारा है। टीचर रहे रेबती त्रिपुरा की जमीनी पकड़ अच्छी है। सीपीएम ने यहां से मौजूदा सांसद जितेन्द्र चौधरी को ही टिकट दिया है। जबकि कांग्रेस ने महाराज कुमारी प्रज्ञा देबबर्मन को टिकट दिया है। बीजेपी की सहयोगी रही इंडीजीनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा ने इस सीट से नरेंद्र चंद्र देबबर्मा को टिकट दिया है। इस सीट पर निर्दलीय समेत 10 उम्मीदवार मैदान में हैं।