छोटे-छोटे ये राज्य बिगाड़ सकते हैं भाजपा और कांग्रेस का सियासी गणित, जानें इनकी भूमिका

Daily news network Posted: 2019-05-22 16:37:09 IST Updated: 2019-05-22 16:37:09 IST
छोटे-छोटे ये राज्य बिगाड़ सकते हैं भाजपा और कांग्रेस का सियासी गणित, जानें इनकी भूमिका

साल 2019 के लोकसभा चुनाव के परिणाम आने में अब कुछ ही घंटे शेष बचे हैं और ऐसे में अटकलों का दौर तेज हो गया है। इस बीच पूर्वोत्तर राज्यों पर राजनीतिक दलों की पैनी नजर है। दरअसल एग्जिट पोल में भाजपा इन राज्यों में बढ़त बनाने में कामयाब रही है। पूर्वोत्तर की कुल 25 लोकसभा सीट हैं। सर्वाधिक 14 सीट असम राज्य से आती हैं। इसके बाद अरुणाचल प्रदेश में 2, मणिपुर में 2, मेघालय में 2, मिजोरम में 1, नागालैंड में 1, सिक्किम में 1 और त्रिपुरा में 2 हैं। 



अरुणाचल वेस्ट सीट

राज्यवार आंकड़ों और प्रत्याशियों की बात की जाए तो अरुणाचल की वेस्ट सीट पर फिलहाल बीजेपी का दबदबा है। 2014 के चुनाव में देश के गृह राज्यमंत्री किरण रिजिजू ने यहां से चुनाव जीता था। किरण रिजिजू 2004 का भी चुनाव जीत चुके हैं। बीजेपी ने एकबार फिर से किरण रिजिजू को मैदान में उतारा है। वहीं अन्य प्रत्याशियों में कांग्रेस से नाबाम टुकी, पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल से सुबु केची, जनता दल सेक्युलर से जरजुम एटी, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक से जोमिन न्योकिर कारा, नेशनल पीपुल्स पार्टी से ख्योडा एपिक का नाम शामिल है। वहीं, निर्दलीय उम्मीदवारों में रूमक जोमोह हैं। इस लोकसभा में विधानसभा की कुल 33 सीटें आती हैं।




अरुणाचल ईस्ट सीट

अरुणाचल ईस्ट सीट से साल 2014 में कांग्रेस पार्टी के निनोंग इरिंग ने जीत दर्ज की थी, वो इस सीट से दूसरी बार सांसद चुने गए हैं। इस संसदीय सीट से नामांकन रद्द होने और नाम वापस लेने की प्रक्रिया के बाद बीजेपी से तापिर गाओ,  कांग्रेस से लवांगछा वांगलात, पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल से मोंगोल योसमो, जनता दल(सेक्युलर) से बेंडे मिल और निर्दलीय उम्मीदवार सीसी सिंगफों मैदान में हैं।




इनर मणिपुर सीट

पिछले लोकसभा चुनाव में मणिपुर सीट से कांग्रेस पार्टी के डॉ. थोकचोम मेन्या ने जीत दर्ज की थी। वो तीसरी बार यहां से सांसद चुने गए हैं। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उनको दो लाख 92 हजार 102 वोट यानी कुल मतदान का 46 फ़ीसदी वोट मिले थे। डॉ. थोकचोम मेन्या ने अपने प्रतिद्वंदी सीपीआई के मॉयरांग थेम को 94 हजार 674 मतों से करारी हार दी थी। इस चुनाव में मॉयरांग थेम को एक लाख 97 हजार 428 वोट मिले थे। इनर मणिपुर सीट से भाजपा ने इस बार आरके रंजन और कांग्रेस ने ओईनम नबा किशोर को चुनावी मैदान में उतारा है। 




आउटर मणिपुर सीट

2014 के चुनाव में कांग्रेस के थांग्सो बैटे (Thangso Baite) ने NPF के सोसो लोराहो (Soso Lorho) को हराया था। कांग्रेस प्रत्याशी को 296770 और दूसरे नंबर पर रहने वाले NPF प्रत्याशी को 281133 वोट मिले थे। 2014 की डाटा के मुताबिक यहां मतदाताओं की कुल संख्या 918966 है। इनमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 454309 और महिला मतदाताओं की संख्या 464657 है। यहां की कुल आबादी 2,721,756 है। इस चुनाव में भाजपा ने होलेम शोखोपाओ मैट और कांग्रेस ने के जेम्स को टिकट दिया है। 




शिलॉन्ग (मेघालय) सीट

शिलॉन्ग सीट से इस बार मैदान में 8 उम्मीदवार हैं जिसमें सांसद विंसेंट एच पाला कांग्रेस की टिकट पर मैदान में हैं। उनके अलावा भारतीय जनता पार्टी के सानबोर शुल्लाई, सीपीआई के जस्टिस खारबसंती, यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी के जेमिनो मावाथो 4 निर्दलीय उम्मीदवार भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।  इस सीट से कांग्रेस के नेता विंसेंट एच. पाला सांसद हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में विंसेट एच. पाला ने निर्दलीय उम्मीदवार प्रेचर्ड बी.एम. बसाइयामोइट को 40 हजार 379 मतों के अंतर से हराया था। इस चुनाव में विंसेंट एच. पाला को कुल 2 लाख 09 हजार 340 वोट मिले थे, वहीं दूसरे नंबर रहे निर्दलीय उम्मीदवार प्रेचर्ड बी.एम. बसाइयामोइट को 1 लाख 68 हजार 961 वोट मिले थे।

 


तुरा (मेघालय) सीट

इस संसदीय सीट पर 2016 में उपचुनाव हुए थे, जिसमें कोनराड संगमा ने कांग्रेस के उम्मीदवार दिकांची डी. शिरा को करीब 1 लाख 92 हजार 212 मतों से शिकस्त दी। ये सीट पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पीए संगमा के निधन के बाद खाली हुई थी, जिसके बाद यहां उपचुनाव हुआ, जिसमें पी.ए. संगमा के बेटे कोनराड के. संगमा को ऐतिहासिक जीत हासिल हुई थी। यहां मुख्य लड़ाई कांग्रेस, एनसीपी और नेशनल पीपुल्स पार्टी (एपीपी) के बीच ही रहती है, जबकि बीजेपी भी कड़ी टक्कर दे सकती है। इस बार लोकसभा चुनाव में कुल 3 उम्मीदवार मैदान में हैं। एनपीपी की ओर से अगाथा के संगमा मैदान में हैं, जबकि कांग्रेस की ओर से डॉक्टर मुकुल संगमा और भारतीय जनता पार्टी की ओर से रिकमैन गैरी मोमीन अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।



मिजोरम लोकसभा सीट

मिजोरम लोकसभा सीट की बात करें तो यहां भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) के सी.एल. रुआला सांसद हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में सी.एल. रुआला अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय उम्मीदवार रॉबर्ट रोमाविया रोयते को 6 हजार 154 वोटों से हराया। इस चुनाव में रुआला को कुल 2 लाख 10 हजार 485 वोट मिले थे, वहीं उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी रॉबर्ट आर. रोयते को 2 लाख 4 हजार 331 मत मिले। तीसरे नंबर पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार एम. लालमन्जुआला रहे, जिन्हें 11 हजार 890 वोट मिले। 6 हजार 495 वोटरों ने नोटा का इस्तेमाल किया। इस बार भाजपा ने यहां से निरुपम चकमा, काग्रेस ने सीएल रुआला और एमएनएप ने सी लालरोसांगा को टिकट दिया है।



नागालैंड लोकसभा सीट

इस सीट से कांग्रेस ने के. एल. चिशि को मैदान में उतारा है, एनपीपी ने हेइथुंग तुंगो पर दांव लगाया है, वहीं एनडीपीपी ने तोखेहो येपथोमी पर फिर से दांव लगाया है। इस  लोकसभा सीट से 'नागालैंड' से इस वक्त नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोगेसिव पार्टी (एनडीपीपी) के तोखेहो येपथोमी सांसद हैं। तोखेहो येपथोमी ने साल 2018 में हुए उपचुनाव में एनपीएफ उम्मीदवार सी अपोक जमीर को 173746 मतों के भारी अंतर से हराया था। येपथोमी को इस उपचुनाव में 594205 वोट मिले थे, जबकि एनपीएफ प्रत्याशी सी अपोक जमीर को 420459 वोट मिले। 2018 के उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी, एनडीपीपी और पीपल्स डेमोक्रेटिक अलायंस (पीडीए) ने मिलकर इस सीट पर पूर्व मंत्री तोखेहो येपथेमी को कैंडिडेट बनाया। एनपीएफ प्रत्याशी सी अपोक जमीर को कांग्रेस का भी समर्थन हासिल था।

 


सिक्किम लोकसभा सीट

सिक्किम की राजनीति में दो दशक से अधिक समय दबदबा कायम रखने वाले सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) ने राज्य की एकमात्र लोकसभा सीट पर मौजूदा सांसद प्रेम दास राय पर एक बार फिर दांव लगाया है जिनके सामने कोई खास चुनौती नहीं है। बता दें कि भाजपा ने यहां से लातेन शेरिंग शेरपा, कांग्रेस ने  भारत बैसनेट और एसडीएफ प्रेम दास राय पर दांव लगाया है।



त्रिपुरा वेस्ट लोकसभा सीट

1996 से यहां कम्युनिस्ट पार्टी का कब्जा रहा है। इस लोकसभा सीट में विधानसभा की 60 सीटें हैं। 2014 के चुनाव में शंकर प्रसाद की जीत हुई थी। 2004 और 2009 के चुनाव में खगेन दास की जीत हुई थी। इस बार भाजपा ने यहां से प्रतिमा भौमिक, कांग्रेस ने सुबल भौमिक और सीपीआईएम ने शंकर प्रसाद दत्ता को चुनावी मैदान में उतारा है।




त्रिपुरा ईस्ट लोकसभा सीट

त्रिपुरा ईस्ट संसदीय क्षेत्र से फिलहाल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के जितेंद्र चौधरी सांसद हैं। उन्होंने साल 2014 के लोकसभा चुनाव में अपने प्रतिद्वंदी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार सचित्र देबर्मा को हराया था। बीजेपी की टक्कर कांग्रेस और लेफ्ट के अलावा इंडीजीनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा से है।  जनजाति समुदाय के लिए आरक्षित त्रिपुरा पूर्व संसदीय क्षेत्र से बीजेपी ने इस बार रेबती त्रिपुरा को मैदान में उतारा है। टीचर रहे रेबती त्रिपुरा की जमीनी पकड़ अच्छी है। सीपीएम ने यहां से मौजूदा सांसद जितेन्द्र चौधरी को ही टिकट दिया है। जबकि कांग्रेस ने महाराज कुमारी प्रज्ञा देबबर्मन को टिकट दिया है। बीजेपी की सहयोगी रही इंडीजीनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा ने इस सीट से नरेंद्र चंद्र देबबर्मा को टिकट दिया है। इस सीट पर निर्दलीय समेत 10 उम्मीदवार मैदान में हैं।