बिप्लब सरकार के फैसले का सुनील देवधर ने किया स्वागत, FB पर दी बधाई

Daily news network Posted: 2018-04-13 14:11:18 IST Updated: 2018-04-13 14:11:18 IST
बिप्लब सरकार के फैसले का सुनील देवधर ने किया स्वागत, FB पर दी बधाई

ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद सत्ता में आई बीजेपी सरकार अब त्रिपुरा शिक्षा बोर्ड की किताबों को बदलने की तैयारी में है। अब बोर्ड की किताबों के स्थान पर एनसीईआरटी की किताबों से पढाई कराई जाएगी। वहीं बिप्लब सरकार के इस कदम का त्रिपुरा में भाजपा की प्रचार कमान संभालने वाले सुनील देवधर ने स्वागत किया है। सुनील देवधर ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट कर राज्य के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देव, उप मुख्यमंत्री जिष्णुदेब बर्मा, शिक्षा मंत्री रतनालाल नाथ को बधाई देते हुए लिखा कि त्रिपुरा में साम्यवादी शिक्षा प्रणाली को हटाकर, एनसीईआरटी की शिक्षा प्रणाली को लागू करने के लिए हार्दिक अभिनंदन। 



 

बता दें कि इस पोस्ट में सुनील देवधर ने एक फोटो भी डाली है, जिसमें वामपंथियों पर जमकर हमला बोला है। तस्वीर में साम्यवादी शिक्षा को गलत बताया गया। साथ ही लिखा कि इससे नक्सली, माओवाद और आतंकवाद को बढ़ावा मिलता है। वहीं एनसीईआरटी की शिक्षा प्रणाली को राष्ट्रवादी शिक्षा करार दिया गया। पोस्ट में लिखा गया है कि इससे देशभक्त, समाजसेवी और आदर्श व्यक्ति तैयार होते हैं। 




 

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब ने कहा था कि उनकी सरकार राज्य के स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबों से ही पढ़ाई करवाएगी। उन्होंने ये भी कहा था कि स्टेट बोर्ड में एनसीईआरटी की किताबें लाने पर विचार करने के लिए एक कमेटी बनाई है और उसपर काम चल रहा है।  उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि वो क्वांटिटी एजुकेशन की जगह क्वालिटी एजुकेशन देने में विश्वास रखते हैं। उन्होंने राज्य की शिक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर बात की। 

 




देब कहा था कि पिछली सरकार त्रिपुरा बोर्ड ऑफ  सेकेंडरी एजुकेशन के सहारे अपनी सोच छात्रों पर मढ़ रही थी। वह माक्र्सिस्ट प्रोपेगैंडा फैला रही थी। उन्होंने कम्यूनिस्ट पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा था कि पिछली सरकार चाहती थी कि उसके राज्य के बच्चे सिर्फ  माओ के बारे में पढ़ें और हिंदू राजाओं को भूल जाएं। उन्होंने सरकारी किताबों से महात्मा गांधी को हटा दिया है और अब एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा, जिसमें त्रिपुरा के इतिहास से जुड़े भी कई पाठ होंगे।

 

 




 

उन्होंने कहा था कि अभी किताबों में रूस-फ्रांस की क्रांति, इंग्लैंड में क्रिकेट का जन्म, हिटलर के बारे में पढ़ाया जाता है। साथ ही छात्रों को कार्ल माक्र्स, हिटलर पढ़ाया जाता है, लेकिन हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में नहीं पढ़ाया जाता है। किताबों में रानी लक्ष्मीबाई, सुभाष चंद्र बोस आदि के बारे में जानकारी नहीं है। हालांकि उन्होंने ये भी कहा था कि एनसीईआरटी की किताबों में 10 फीसदी स्टेट बोर्ड का पाठ्यक्रम भी होगा।