इन दो लोगों ने दिया मोदी सरकार को झटका, जानिए कैसे

Daily news network Posted: 2019-01-11 15:22:35 IST Updated: 2019-01-12 08:28:34 IST
इन दो लोगों ने दिया मोदी सरकार को झटका, जानिए कैसे

गुवाहाटी।

केन्द्र सरकार ने असम समझौते के क्लॉज 6 को लागू करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। असम साहित्य सभा के पूर्व अध्यक्ष डॉ नगेन सैकिया और रोंग्बोंग तेरांग को असम समिति का सदस्य बनाया गया था, लेकिन दोनों ने पैनल का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया है। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव(पूर्वोत्तर) को लिखे पत्र में डॉ सैकिया ने समिति का हिस्सा होने में असमर्थता जाहिर की है।

 

 



उन्होंने कहा कि नागरिकता(संशोधन)बिल 2016 देश की धर्मनिरपेक्ष भावना के खिलाफ है। पत्र में सैकिया ने कहा कि असम समझौते के क्लॉज 5 को अलग रखकर क्लॉज 6 पर चर्चा करना निरर्थक है। अगर नागरिकता(संशोधन)बिल पारित हुआ तो असम अपनी भाषाई और सांस्कृतिक पहचान खो देगा। उन्होंने सवाल किया कि संसद में बिल लाए बिना और उसे पारित किए बिना सरकार कैसे असमिया लोगों के लिए विधानसभा में सीटें आरक्षित करने के लिए कुछ कर सकती है। सरकार किस तरह असमी और राज्य की अन्य मूल भाषाओं की रक्षा करेगी।


 

 


डॉ. सैकिया ने कहा कि खुद प्वाइंट ऑफ नोटिफिकेशन ही गुमराह करने वाला है। बिना असम सरकार को रेफरेंस बनाए भारत सरकार को असमिया लोगों के रोजगार को सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए। उन्होंने कहा कि जब सरकार का कार्यकाल खत्म होने वाला है तब इस तरह की समिति गठित करने के भारत सरकार की कोशिश को मैं कुछ नहीं सिर्फ असम के लोगों को मूर्ख बनाना मानता हूं। मैं सरकार के इस तरह के स्टैंड का विरोध करता हूं।

 

 

 

 


ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन(आसू) असम समझौते की महत्वपूर्ण पार्टी थी लेकिन आसू पहले ही समिति में भाग नहीं लेने की घोषणा कर चुका है। मेरा मानना है कि आसू के प्रतिनिधित्व के बिना समिति उस फैसले पर नहीं पहुंच सकती, जिसके लिए इसका गठन हुआ है। पैनल का सदस्य होने से इनकार करते हुए तेरांग ने कहा कि समिति में आसू का कोई प्रतिनिधित्व नहीं है इसलिए समिति में रहना का कोई मतलब नहीं है क्योंकि आसू ने असम समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। आसू की सहभागिता के बिना असम समझौते को लागू करने के बारे में बात करने का कोई सेंस नहीं है। मेरी आत्मा मुझे समिति का हिस्सा बनने से रोक रही है। पैनस छोडऩे की वजह खराब स्वास्थ्य भी है।