अरुणाचल प्रदेशः साल में तीन बार चीनी घुसपैठ के बाद भी सरकारी मशीनरी में ढिलार्इ

Daily news network Posted: 2018-04-09 13:58:16 IST Updated: 2018-04-09 17:10:25 IST
अरुणाचल प्रदेशः साल में तीन बार चीनी घुसपैठ के बाद भी सरकारी मशीनरी में ढिलार्इ
  • आर्इटीबीपी रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने अरुणाचल प्रदेश के उत्तरी पैंगोंग झील के पास गाड़ियों के जरिये 28 फ़रवरी, 7 मार्च और 12 मार्च 2018 को घुसपैठ की है।

नर्इ दिल्ली।

आर्इटीबीपी रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने अरुणाचल प्रदेश के उत्तरी पैंगोंग झील के पास गाड़ियों के जरिये 28 फरवरी, 7 मार्च और 12 मार्च 2018 को घुसपैठ की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पैंगोंग झील के पास 3 जगहों पर चीनी सेना ने घुसपैठ की, जिसमें वे लगभग 6 किलोमीटर तक अंदर घुस आए थे। आईटीबीपी जवानों के विरोध के बाद चीनी सैनिक वापस लौट गए। बता दें कि डोकलाम के बाद चीनी सेना अरुणाचल प्रदेश से सटी सीमा पर तनाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है आैर अब भारतीय सैनिकों के गश्त पर भी चीन ने आपत्ति जताई है।

 

 


 भारत के मुकाबले मजबूत है चीन का बुनियादी ढांचा


अरुणाचल प्रदेश के किबिथू इलाके से सटी सीमा चीन का टाटू कैंप और न्यू टाटू कैंप है। यहां पर चीनी सेना ने कंक्रीट की मजबूत की बिल्डिंग, फायरिंग रेंज और हेलीपैड साफ नजर आते हैं। यहां तक चीन ने पक्की सड़क भी बनाई हुई है। चीन की तुलना में भारत का बुनियादी ढांचा अभी इतना मज़बूत नहीं हुआ है। यहां पर न तो सड़क है, न संचार तंत्र आैर न ही पक्की सड़क। इसके बावजूद यहां तैनात भारतीय जवानों के जोश और उत्साह में कोई कमी नहीं है। यहां पर जवान हर वक्त जवाब देने के लिए तैयार रहते हैं। कठिन पहाड़ी इलाके, घने जंगलों और मौसम की मार के बीच बुलंद इरादे के साथ जवान हमेशा तत्पर रहते हैं।

 



अभी तक पूरे नहीं हो पाए आधे भी प्रोजेक्ट

 


आपको बता दें कि चीन से लगी सीमा पर भारतीय जवानों की पेट्रोलिंग जारी है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक पिछले ही महीने चीन ने यहां रणनीतिक लिहाज से संवेदनशील असाफिला इलाके में भारतीय पेट्रोलिंग पर सवाल उठाए हैं। चीन ने अपने इलाके में अतिक्रमण का आरोप लगाया, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया।

 

 


उलटे भारत का आरोप है कि चीन इस इलाके में कई बार सीमा का अतिक्रमण कर चुका है। चीन की हरकतों को देखते हुए ही भारत ने सरहदी इलाकों में बुनियादी ढांचा पक्का करने में तेज़ी लाई है। करीब साढ़े तीन हज़ार करोड़ रुपए की लागत से चीन से लगी सीमाओं पर सड़क निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। ऐसे 73 प्रोजेक्ट्स में से 18 पूरे हो चुके हैं। बाकी प्रोजेक्ट 2020 तक पूरे किए जाने का लक्ष्य है।



 देश की सुरक्षा में देरी क्याें?


इसमें कोई दो राय नहीं कि पहले की तुलना में चीन से लगी सरहद पर हमारा बुनियादी ढांचा मजबूत हुआ है, लेकिन अब भी चीन की तैयारियों के मुकाबले हम काफी पीछे हैं। भौगोलिक कठिनाइयां इसका एक कारण हैं, लेकिन सरकारी मशीनरी की ढिलाई भी कम बड़ी वजह नही है। यहां सड़क निर्माण के जो प्रोजेक्ट 2012 तक पूरे होने थे, उम्मीद है 2020 तक पूरे हो ही जाएंगे, लेकिन सवाल यही है  कि देश की सुरक्षा से जुड़े कामों में इतनी देरी क्यों?