दागी सांसदों-विधायकों के मामले में मणिपुर और मिजोरम की छवि साफ

Daily news network Posted: 2018-03-12 11:45:27 IST Updated: 2018-03-12 14:36:40 IST
दागी सांसदों-विधायकों के मामले में मणिपुर और मिजोरम की छवि साफ
  • भारत में विधायकों और सांसदों की कुल संख्या 4896 है। जिनमें से करीब 36 फीसदी जनप्रतिनिधियों के दामन साफ नहीं है।

नर्इ दिल्ली।

भारत में विधायकों और सांसदों की कुल संख्या 4896 है, जिनमें से करीब 36 फीसदी जनप्रतिनिधियों के दामन साफ नहीं है। दागी जनप्रतिनिधियों के मामले में सबसे आगे उत्तर प्रदेश है। बता दें कि भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से दागी नेताओं की लिस्ट मांगी थी। सरकार की लिस्ट से पता चला है कि देश के 1700 जनप्रतिनिधियों पर केस चल रहा है।


 

उत्तरप्रदेश-तमिलनाडु सबसे अव्वल

 

एक आेर तो देश में एेसे राज्य भी जहां एक भी दागी विधायक नहीं है तो वहीं एेसे राज्य भी जो इस मामले में अव्वल है। दागी विधायकाें के मामले में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। उत्तरप्रदेश के 248 जनप्रतिनिधियों के खिलाफ क्रिमिनल केस दर्ज हैं जबकि दूसरे नंबर पर तमिलनाडु के 178 सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामले दर्ज हैं। इस मामले में बिहार तीसरे नंबर पर है। बिहार के 144 सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।

 

 

मणिपुर-मिजोरम की साफ छवि


पूर्वोत्तर के मिजोरम आैर मणिपुर में किसी भी सांसद आैर विधायक के खिलाफ कोर्इ भी मुकदमा लंबित नहीं है। जबकि उत्तर प्रदेश में 248 सांसदों-विधायकों के खिलाफ कुल 565 मुकदमे दर्ज है। 26 निपट गए, 539 अभी भी लंबित। इसके बाद तमिलनाडु में 178 सांसदों-विधायकों पर कुल 402 मुकदमे दर्ज हैं, 78 निपट गए आैर 324 अभी लंबित। बिहार में 144 सांसदों-विधायकों पर कुल 373 मुकदमे, 67 निपट गए और 306 अभी लंबित।

 


जबकि अगर बता करें पूर्वोत्तर के आैर राज्यों की तो अरुणाचल प्रदेश में 9 सांसदों- विधायकों पर कुल 11 मुकदमे। 5 निपट गए 6 अभी लंबित। असम में 37 सांसदों-विधायकों पर कुल 47 मुकदमे। 15 निपट गए, 32 अभी लंबित। त्रिपुरा में 7 सांसदों-विधायकों पर कुल 23 मुकदमे. 9 निपट गए 14 अभी लंबित। सिक्किम में 2 सांसदों-विधायकों के खिलाफ 2 मुकदमे दोनों लंबित। मेघालय में 6 सांसदों-विधायकों के खिलाफ कुल 8 मुकदमे। 2 निपट गए 6 अभी लंबित आैर नागालैंड में 5 सांसदों-विधायकों के खिलाफ कुल 5 मुकदमे। 4 निपट गए, 1 अभी लंबित।



बता दें कि दागी जनप्रतिनिधियों को लेकर 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश जारी किया था कि एक साल के भीतर सभी जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज मामले निपटाए जाएं, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद पिछले तीन सालों में सिर्फ 771 मुकदमों में ही ट्रायल पूरा हो सका है, जबकि 3045 केस में सुनवाई जारी है। 2014 से 2017 के बीच करीब 1765 सांसदों और विधायकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। बीजेपी नेता ने आपराधिक मामलों में दोषी सांसदों और विधायकों पर आजीवन चुनाव लड़ने पर रोक लगाई जाने की मांग की थी। वर्तमान नियम के मुताबिक अगर किसी जनप्रतिनिधि के खिलाफ दोष साबित हो जाता है तो वह 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता है।