मिजोरम में सबसे ज्यादा है एचआईवी से ग्रस्त गर्भवती महिलाएं

Daily news network Posted: 2018-04-04 18:03:21 IST Updated: 2018-04-09 10:34:39 IST
मिजोरम में सबसे ज्यादा है एचआईवी से ग्रस्त गर्भवती महिलाएं
  • भारत में पूर्वोत्तर का मिजोरम एक छोटा सा राज्य है लेकिन यहां पर 1.19 फीसदी गर्भवती महिलाआें में एचअार्इवी पाॅजिटिव के केस देखे गए हैं।

आर्इजोल।

मिजोरम देश का छोटा सा राज्य है, लेकिन यहां पर 1.19 फीसदी गर्भवती महिलाआें में एचअार्इवी पाॅजिटिव के केस देखे गए हैं। मिजाेरम स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी के मुताबिक मिजाेरम में गर्भवती महिलाआें में एचआर्इवी का प्रसार भारत में सबसे ज्यादा है। नेशनल लेवल पर एचआर्इवी के 0.28 फीसदी मामले दर्ज किए गए हैं, लेकिन मिजोरम में ये आंकड़ा 1.19 फीसदी हैं। जो भारत में उच्चतम दर है।

 

 

मिजाेरम में बढ़ा है एचआर्इवी का आंकड़ा

 

भारत के किसी भी स्टेट में एचआर्इवी का आंकड़ा एक फीसदी तक भी नहीं पहुंचा है लेकिन मिजोरम में यह आकड़ां इस लेवल को पार कर चुका है। बात करें पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों की तो मिजाेरम के बाद नागालैंड है। नागालैंड में ये आंकड़ा 0.82 फीसदी है। जानकरी के मुताबिक तमिलनाडु, महाराष्ट्र, कर्नाटक आैर आंध्र प्रदेश में एचआर्इवी के केस में गिरावट देखी गर्इ है। जबकि मिजोरम में एचआर्इवी के दर में बढ़ोतरी हो रही है ।

 


 मिजोरम में आर्इजोल, चम्फर्इ, कोलासिब, लुंगलेर्इ आैर ममिट एेसे जिले हैं जो जनसंख्या की दृष्टि से पूर्वोत्तर में टाॅप-20 में शामिल है। अप्रैल 2015 से सितंबर 2017 के दाैरान की गर्इ एक स्टडी के मुताबिक आर्इजोल आैर कोलासिब में 620 एचआर्इवी मामलों का  पता चला था। इसके साथ ही मिजाेरम में एेसे आठ जिले है जहां एचआर्इवी मामले सबसे ज्यादा हैं।

 

 

ये है एचआर्इवी की बड़ी वजह

आर्इजोल सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला जिला है आैर यहां पर नशीली दवाआें का प्रयोग बहुत ज्यादा होता है आैर यहां पर ड्रग को इंजेक्शन के द्वारा लेते हैं। एक ही इंजेक्शन को कर्इ लोगों पर बार-बार इस्तेमाल करने से भी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में एचआर्इवी का प्रसार होता है। इसके अलावा यहां पर सेक्स वर्करों की संख्या ज्यादा है। इस काम को ये व्यवसाय के रूप में करते हैं। एचआर्इवी की एक ये भी बड़ी वजह है।

 


25-35 साल बीच एचआईवी पॉजिटिव के मामलों को ज्यादा

मिजोरम में 25-35 साल बीच एचआईवी पॉजिटिव के मामलों को ज्यादा दर्ज किया गया है। इसके बाद 35-49 साल के लोगों में आैर 15-24 साल के लाेगों में भी एचआर्इवी पाॅजिटिव के मामलों को दर्ज किया गया हैं। मिजोरम में 64.1 फीसदी एचआर्इवी मामले एेसे दर्ज किए गए है जो असुरक्षित यौन संबंध बनाने से होते है। इसके बाद एक ही इंजेक्शन शेयर करने से 33.4 फीसदी लोगों में एचआर्इवी मामले को दर्ज किया गया हैं।

 

 


स्वास्थ विभाग की लापरवाही

 

 ये चिंता की बात है कि बढ़ते एचआर्इवी के मामलों में स्वास्थ विभाग की लापरवाही साफ झलक रही है। पिछले तीन सालों के दौरान एक ही इंजेक्शन काे कर्इ लोगों पर इस्तेमाल करने से एचआर्इवी को मामले में बढोतरी देखी गर्इ है जबिक असुरक्षित यौन संबंध बनाने से हुए एचआर्इवी दरें स्थिर है। इस बीच अभी हाल ही में स्वास्थ मंत्री लाल थनजारा ने विधानसभा में बताया कि पिछले साल 1 अप्रैल आैर मिड मार्च के दौरान मिजोरम सरकार ने 322 मौतें दर्ज की थी जो एडस के कारण हुर्इ थी। जबकि 2014-2015 में 569 मौतें दर्ज की गर्इ थी ।

 

 

 

राज्य सरकार के लिए चिंता का विषय

 

मिजोरम 2013 में एसएसीएस ब्लड टेस्ट करना शुरू किया था उस दौरान 3,17,356 लोगों के ब्लड सैंपल को इकट्ठा किया था। जिनमें से 7,641 लोगों में एचआईवी पॉजिटिव पाया गया था। पिछले दो सालों में मिजोरम में इस कदर बढ़ता एचआर्इवी का खतरा न केवल राज्य सरकार बल्कि गैर सरकारी संगठन के लिए भी चिंता का विषय है।