Mizoram Election 2018: NPP ने उतारे थे 8 उम्मीदवार, नहीं खुला किसी का खाता

Daily news network Posted: 2018-12-11 16:48:19 IST Updated: 2018-12-13 18:28:44 IST
Mizoram Election 2018: NPP ने उतारे थे 8 उम्मीदवार, नहीं खुला किसी का खाता
  • नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) पहली बार मिजोरम में विधानसभा की आठ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी उम्मीदवार पार्टी को जीत नहीं दिला पाए।

नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) पहली बार मिजोरम में विधानसभा की आठ सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी उम्मीदवार पार्टी को जीत नहीं दिला पाए। एनपीपी के सभी आठ उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। 

 

बता दें कि मिजोरम विधानसभा के लिए 28 नवंबर को मतदान हुए थे। मुख्यमंत्री कॉनराड संगमा ने गत 29 सितंबर को इस पार्टी की शुरूआत राज्य में की थी। पूर्व संसदीय सचिव हिंगदाइलोवा खियांगटे असम की सीमा पर स्थित कोलासिब जिले की तुइरिल सीट से एनपीपी के उम्मीदवार थे। खियांगटे ने कांग्रेस द्वारा टिकट नहीं दिए जाने पर प्रदेश विधानसभा से इस्तीफा दे दिया था।

 


डम्पा सीट पर एनपीपी ने लियानजुआला को टिकट दिया था, जबकि रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी बी सुआनजलांग चंफाई नॉर्थ विधानसभा सीट से अपनी किस्मत आजमा रहे थे। वहीं सरलुई सीट से हमिंगचुंगनुआंगा एनपीपी के उम्मीदवार थे। जबकि पत्रकार कप्लियाना पछुआउ पहली बार चुनाव मैदान में थे। वे काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे सेरछिप सीट से मुख्यमंत्री ललथनहवला के खिलाफ चुनाव मैदान में थे। 

 

इसके अलावा पहली बार अपनी किस्मत आजमा रहे जाॅन ललरिमरुआटा, ललहुलियाना  और डी डी चकमा काेलासिब, थोरांग और तुईचवांग सीट से चुनाव मैदान मेें थे। बता दें कि एनपीपी मेघालय में बड़ी पार्टी है। एनपीपी मेघालय में एमडीए का भी हिस्सा है। इसके अलावा एनपीपी नागालैंड और मणिपुर में भी गठबंधन सरकार का हिस्सा है। 


कांग्रेस की करारी हार

मिजोरम में सत्ता विरोधी लहर इतनी जबरदस्त थी कि कांग्रेस के मुख्यमंत्री लल थनहवला दोनों सीटों सेरछिप और चम्फई दक्षिण से चुनाव हार गए। यही नहीं 2013 के विधानसभा चुनाव में 34 सीटें जीतने वाली कांग्रेस इस बार सिर्फ 5 सीटों पर सिमट गई। आपको बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में एमएनएफ को 5 सीटें मिली थी। इस बार के विधानसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और एमएनएफ के बीच ही था। 

 

 

 

 

 

 

 

 

कांग्रेस और एमएनएफ ने 40-40 सीटों पर चुनाव लड़ा था। जहां कांग्रेस का हैट्रिक लगाने का सपना चूर चूर हो गया। वहीं एमएनएफ की 10 साल बाद सत्ता में वापसी हुई है। मिजोरम में हार के साथ ही पूरा पूर्वोत्तर कांग्रेस मुक्त हो गया है। मिजोरम एक मात्र ऐसा राज्य था जहां कांग्रेस की सरकार थी। अब त्रिपुरा सहित पूरे पूर्वोत्तर में भाजपा या उसके सहयोगी दलों की सरकारें हो गई है। आपको बता दें कि एमएनएफ भी भाजपा के नेतृत्व वाले नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस का हिस्सा है। हालांकि उसने मिजोरम में चुनाव पूर्व या चुनाव बाद भाजपा से हाथ मिलाने से साफ इनकार कर दिया था। 

 

 

 

 

 

 

 

इसके बाद भाजपा ने अपने दम पर चुनाव लड़ा। भाजपा ने 39 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। भाजपा को कोई बड़ा फायदा नहीं हुआ, लेकिन उसका खाता जरूर खुल गया। भाजपा के बुद्ध धान चकमा ने तुइचवांग सीट से एमएनएफ के रसिक मोहन को हराया। गौरतलब है कि चकमा पहले कांग्रेस में थे। वे कांग्रेस सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं लेकिन नवंबर में विधानसभा चुनाव से पहले वह भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हें टिकट दिया और वे चुनाव जीत गए।