पहले मिजोरम में घुसने दिया,अब जा नहीं रहे तो मोदी से मांग रहे मदद

Daily news network Posted: 2018-01-14 15:13:50 IST Updated: 2018-01-14 15:13:50 IST
पहले मिजोरम में घुसने दिया,अब जा नहीं रहे तो मोदी से मांग रहे मदद
  • मिजोरम के मुख्यमंत्री लल थनहवला ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार ने 1440 म्यांमार के नागरिकों को राहत मुहैया कराने के लिए केन्द्र से मदद मांगी है

आईजोल।

मिजोरम के मुख्यमंत्री लल थनहवला ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार ने 1440 म्यांमार के नागरिकों को राहत मुहैया कराने के लिए केन्द्र से मदद मांगी है,जिन्होंने उनके राज्य में शरण मांगी है। म्यांमार के लोगों ने पिछले साल नवंबर में सीमा पार कर मिजोरम में घुसपैठ की थी। म्यांमार की सेना और आतंकी संगठन अराकान आर्मी(एए)के आतंकियों के बीच हिंसक संघर्ष के बाद ये लोग मिजोरम में घुसे थे।

 

 

 


ललथनहवला ने कहा कि उन्होंने शरणार्थियों की मदद मुहैया कराने के लिए केन्द्र से अपील की है। ये लोग 25 नवंबर से दक्षिण मिजोरम के लॉग्नतलई जिले के तीन राहत शिविरों में रुके हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार यह सुनिश्चत करने के लिए कोशिश कर रही है कि सभी शरणार्थी म्यांमार लौट जाएं। हालांकि अधिकारी ने बताया है कि म्यांमार के नागरिक अपने संबंधित गांवों में लौटने से मना कर रहे हैंजबकि म्यांमार की सेना की वहां शांति स्थापित होने और अराकान आर्मी के सभी विद्रोहियों को उनके शिविरों से खदेड़ा जा चुका है।

 

 

 


आपको बता दें कि म्यांमार से कुल 1600 लोगों ने मिजोरम के लॉन्गतलई जिले के कई गांवों में शरण ली थी। मिजोरम सरकार ने इन्हें अपने यहां शरण दी थी और सभी के लिए खाने व रहने के इंतजाम किए थे। असम राईफल्स के सूत्रों का कहना है कि फोर्स ने शरणार्थियों को उनके देश भेजने की कोशिश की थी। यह कोशिश उस वक्त की गई थी जब म्यांमार की सेना के अधिकारियों ने कहा था कि उन्होंने अशांत रखाइन प्रांत को अपने कब्जे में ले लिया है।

 

 


सूत्रों के मुताबिक कुछ शरणार्थी अपने देश लौट गए लेकिन 1440 शरणार्थियों ने अपने घर जाने से इनकार कर दिया। इनमें 998 वयस्क हैं। इनमें 773 महिलाएं और 442 नाबालिग शामिल हैं। इनमें से कुछ को डर है कि अगर वे वापस अपने घर गए तो वहां पर सरकारी बलों और अराकान आर्मी के आतंकियों के बीच किसी भी वक्त हिंसक संघर्ष शुरू हो सकता है। जबकि कईयों ने राज्य में ही सैटल होने को तरजीह दी है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ शरणार्थियों ने घर बनाने की कोशिश की थी लेकिन जिला प्रशासन ने उन्हें रोक दिया और वापस राहत शिविरों में भेज दिया। मिजोरम में म्यांमार से जो शरणार्थी आए हैं उनमें से ज्यादातर जखई और खुमी ट्राइब्स से ताल्लुक रखते हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि गांवों के लोगों को समस्याएं हैं क्योंकि उनके अपने गांवों में शरणार्थियों की संख्या बढ़ गई है। हालांकि उनमें से कई उनके रिश्तेदार हैं।