खदान में फंसे मजदूरों तक पहुंचे गोताखोर, नहीं मिला कोई भी श्रमिक, जानिए हादसे से जुड़ी खास बातें

Daily news network Posted: 2019-01-01 12:28:45 IST Updated: 2019-01-02 08:34:05 IST
खदान में फंसे मजदूरों तक पहुंचे गोताखोर, नहीं मिला कोई भी श्रमिक, जानिए हादसे से जुड़ी खास बातें
  • मेघालय की बाढ़ग्रस्त काेयला खदान में फंसे 15 खदानकर्मी को बचाने के लिए नौसेना आैर एनडीआरएफ के गोताखोर सोमवार को अंदर घुसे।

शिलांग।

मेघालय की बाढ़ग्रस्त काेयला खदान में फंसे 15 खदानकर्मी को बचाने के लिए नौसेना आैर एनडीआरएफ के गोताखोर सोमवार को अंदर घुसे। इस बार नेवी के गोताखोर खदान की तलहटी तक पहुंचने में कामयाब रहे, लेकिन उन्हें वहां फंसा हुआ कोर्इ मजदूर नहीं दिखा। गोताखोरों का कहना है कि शाफ्ट के अंदर जलस्तर 30 मीटर की सुरक्षित गोताखोरी सीमा तक घटने के बाद ही खोजबीन सहज हो पाएगी। अभियान के प्रवक्ता आर सुस्नगी ने कहा कि अभियान के 18वें दिन नौसेना के गोताखोर उच्च तकनीकी उपकरण ‘अंडर वॉटर रिमोटली ऑपरेटिड व्हीकल’ (यूडब्ल्यूआरओवी) के साथ तीन घंटे तक शाफ्ट के अंदर रहे लेकिन इसमें दृश्यता एक फुट रही जो बहुत कम है।

 


खदान हादसे से जुड़ी कुछ खास बातें

 मेघालय के पूर्वी जैंतिया हिल्स जिले में 370 फुट गहरी अवैध कोयला खदान में पास की लैटिन नदी से पानी चले जाने के बाद से 13 दिसंबर से 15 खदानकर्मी फंसे हुए हैं।

 


 भारतीय नौसेना ने प्रशासन को सुझाव दिया है कि खनन शाफ्ट के अंदर से पंपों की मदद से पानी निकालकर जलस्तर करीब 30 मीटर (98 फुट) तक या सुरक्षित गोताखोरी सीमा तक कम किया जाए, उसी के बाद गोताखोरी शुरू की जाएगी।

 


 नौसेना का कहना है कि सभी ऐहतियाती उपाय किए जा रहे हैं ताकि सुनिश्चित हो कि गोताखोरों के लिए कोई संकट पैदा न हो जाए। 

 


 कई एजेंसियों के इस संयुक्त अभियान की शुरुआत रविवार को नौसेना के टीम लीडर लेफ्टिनेंट कमांडर संतोष खेतवाल ने की जो खोताखोरों को अंदर भेजने से पहले खुद खदान में पानी की सतह तक उतरे जहां उन्होंने स्थिति का जायजा लिया।

 


 पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले के पुलिस अधीक्षक सिल्वेस्टर नोंगटिंगर ने बताया कि भारतीय नौसेना और एनडीआरएफ के छह गोताखोर खदान के भीतर गए और पानी की सतह से 80 फुट ऊपर की गहराई तक पहुंचे। वे दो घंटे तक खनिकों का पता लगाते रहे। 

 


 उन्होंने बताया कि नौसेना के अधिकारियों के मुताबिक सतह से पानी की गहराई खदान के तल तक करीब 150 फुट के आस-पास है।

 


 एनडीआरएफ के सहायक कमांडेंट संतोष कुमार जो की तलाश एवं बचाव अभियान में दो दलों की अगुवाई कर रहे हैं, ने बताया कि वह पानी में एक नाव उतारने में सक्षम रहे जो गोताखोरों को उनके उपकरण रखने में मददगार साबित होगा।

 


 एनडीआरएफ के 100 विशेषज्ञों की टीम ने वहीं डेरा डाला हुआ है, लेकिन उचित उपकरण न होने की वजह से राहत एवं बचाव कार्य में बाधा आ रही है।


एनजीटी ने इस इलाके में खनन पर लगा दी थी रोक। स्थानीय लोगों के विरोध प्रदर्शन के बाद यह फैसला लिया गया था।

 


 खदान में पास से बह रही नदी से पानी भर गया है, जिसकी वजह से खदान की तह तक जाने में दिक्कत हो रही है।