आप के 20 विधायकों को घर बिठाया लेकिन यहां बचा ली कांग्रेस की सरकार!

Daily news network Posted: 2018-01-22 19:15:36 IST Updated: 2018-01-22 19:15:36 IST
आप के 20 विधायकों को घर बिठाया लेकिन यहां बचा ली कांग्रेस की सरकार!
  • चुनाव आयोग ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य करार देने की राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सिफारिश कर दी।

शिलॉन्ग।

चुनाव आयोग ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य करार देने की राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को सिफारिश कर दी। राष्ट्रपति ने विधायकों को अयोग्य करार दे भी दिया लेकिन मेघालय के उन 17 विधायकों पर चुनाव आयोग ने अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है,जिनकी संसदीय सचिव के रूप में नियुक्ति को मेघालय हाईकोर्ट ने 10 नवंबर को अवैध करार दिया था। हाईकोर्ट ने मेघालय संसदीय सचिव(नियुक्ति, वेतन, भत्ते और अन्य प्रावधानों)एक्ट, 2015 को अवैध करार दिया था। हाईकोर्ट ने संसदीय सचिव के रूप में नियुक्त किए गए 17 विधानसभा को अयोग्य ठहराने का फैसला राज्यपाल गंगा प्रसाद के विवेक पर छोड़ दिया था। कोर्ट का कहना था कि यह उसके क्षेत्राधिकार में नहीं आता। 

 

 

 

 

चीफ जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस वेद प्रकाश की खंडपीठ ने एम.सुमेर की जनहित याचिका पर यह फैसला दिया था। कोर्ट के फैसले के बाद सुमेर ने राज्यपाल से मुलाकार कर उन विधायकों को अयोग्य करार देने की मांग की थी जिनके नाम उनकी जनहित याचिका में थे। सुमेर का कहना था कि ऑफिस ऑफ प्रॉफिट होल्ड करने के कारण वे अब विधायक नहीं रहे। हाईकोर्ट के फैसले के बाद इन विधायकों ने संसदीय सचिव पद से इस्तीफा दे दिया था। पिछले दो महीने से विधायकों की अयोग्यता का मामला लंबित है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्यपाल गंगा प्रसाद के मामले को चुनाव आयोग के पास रैफर कर दिया था। 

 

 

 

 

अगर चुनाव आयोग अपनी राय दे देता और राज्यपाल इन्हें अयोग्य करार दे देते तो पिछले साल ही कांग्रेस की अल्पमत में आ जाती लेकिन चुनाव आयोग के जवाब नहीं देने के कारण राज्यपाल अभी तक कोई फैसला नहीं ले पाए हैं। अब चुनाव आयोग की राय पर राज्यपाल कोई फैसला ले भी ले तो उसका कोई मतलब नहीं रहेगा क्योंकि राज्य में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। मेघालय में फरवरी में 27 फरवरी को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होगी और 3 मार्च को चुनाव परिणाम घोषित होंगे।  जिन 17 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत नहीं मिला था। 

 

 

 

 

कांग्रेस को 29 सीटें मिली थी जबकि बहुमत के लिए 31 का जादुई आंकड़ा छूना था। कांग्रेस ने निर्दलीयों व एनसीपी के सहयोग से गठबंधन सरकार बनाई थी। कांग्रेस ने कुल 17 विधायकों को संसदीय सचिव बना दिया। इनमें कांग्रेस के 8, एनसीपी का 1 और 8 निर्दलीय विधायक थे। राज्यपाल गंगा प्रसाद ने चुनाव आयोग को रिमाइंडर भेज कर इस मामले पर राय जानी चाही है। राजभवन के एक अधिकारी ने शनिवार को बताया कि राज्यपाल ने चुनाव आयोग को रिमाइंडर भेजा है। 

 

 

 

 

राजभवन के अधिकारी ने बताया कि राज्यपाल ने पिछले सप्ताह चुनाव आयोग को रिमाइंडर भेजा था। विधायकों की अयोग्यता के मामले पर राज्यपाल के लिए चुनाव आयोग की राय जानना संविधान के अनुच्छेद 192(2) के तहत जरूरी है। राज्यपाल गंगा प्रसाद ने पिछले साल 16 नवंबर को इस मामले को चुनाव आयोग को रैफर किया था। हालांकि चुनाव आयोग ने अभी तक इस मामले पर अपना व्यू राज्यपाल को सबमिट नहीं किया है। दरअसल मुख्य चुनाव आयुक्त अचल कुमार जोति ने पिछले महीने पत्रकारों को बताया था कि आयोग राज्यपाल की ओर से रैफर किए गए मामले का परीक्षण कर रहा है। मामले का कानूनी परीक्षण किया जा रहा है और आयोग राज्य सरकार से इनपुट्स ले रहा है। उचित फैसला लिया जाएगा।