मिलिए मीराबाई और संजीता के गुरु से, जिनकी ट्रेनिंग से वेटलिफ्टर बने पदक विजेता

Daily news network Posted: 2018-04-16 17:34:09 IST Updated: 2018-04-16 17:34:09 IST
मिलिए मीराबाई और संजीता के गुरु से, जिनकी ट्रेनिंग से वेटलिफ्टर बने पदक विजेता
  • ऑस्टे्रलिया के गोल्ड कोस्ट में आयोजित 21वें राष्ट्रमंडल खेलों में वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में कोच विजय शर्मा के खिलाडिय़ों ने पांच गोल्ड, दो सिल्वर मेडल जीते हैं।

नई दिल्ली।

ऑस्टे्रलिया के गोल्ड कोस्ट में आयोजित 21वें राष्ट्रमंडल खेलों में वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता में कोच विजय शर्मा के खिलाडिय़ों ने पांच गोल्ड, दो सिल्वर मेडल जीते हैं। कोचिंग की पूरी जिम्मेदारी इनके पास थी। खिलाडिय़ों की ट्रेनिंग से लेकर उनकी डाइट तक पर नजर रखते थे। इन्हीं की बदौलत खिलाडिय़ों का प्रदर्शन शानदार रहा।

 

विजय शर्मा वेटलिफ्टिंग कोचिंग के धाकड़ गुरु हैं। टे्रनिंग के दौरान खिलाडिय़ों पर कड़ी निगरानी रखते हैं। करीब पांच साल से राष्ट्रीय स्तर के वेट लिफ्टर्स को ट्रेनिंग दे रहे हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स शुरु होने से पहले इन्होंने अलग तरह की रणनीति बनाई। खिलाडिय़ों को पौष्टिक जर्मन डाइट और सप्लीमेंट्स की व्यवस्था स्पोट्र्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की ओर से कराई ताकि खिलाड़ी बेहतरीन प्रदर्शन कर सकें। मेडल जीतने के लिए एक स्ट्रैटजी बनाई, जिमें खिलाडिय़ों को अपने विरोधी खिलाड़ी की तकनीक को जानने समझने के लिए कहा। विरोधी खिलाडिय़ों की तकनीक जानने के बाद अपने खिलाडिय़ों को उसे पछाडऩे का गुर सिखाने के लिए दनिरात एक कर देते थे। खिलाडिय़ों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए मेंटल कोचिंग ट्रेनर्स भी लगाए थे। खुद भी हैल्दी डाइट लेते थे। 

 

 



खिलाडिय़ों को चार साल में सिर्फ 12 छुट्टी

पिछले चार साल में इन्होंने सभी खिलाडिय़ों को केवल 12 दिन की छुट्टी दी थी। छुट्टी में भी खिलाडिय़ों को पूरा शेड्यूल देते थे, जिसका पालन करना जरूरी था। इनका मंत्र है कि जो समय है उसमें कड़ी मेहनत करनी होगी, तभी हम कुछ नया और बेहतर कर सकते हैं। डोप टैस्ट में खिलाडिय़ों के फंसने के मामले पर कह चुके हैं कि खिलाड़ी डोप टैस्ट में फंसेंगे ही नहीं, जब अच्छी डाइट के साथ बढिय़ा सप्लीमेंट मिलेगा। इसी में सुधार किया गया और गोल्ट कोस्ट कॉमनवैल्थ में अच्छे परिणाम देखने को मिले।

 




इन्होंने पदक जीत मान बढ़ाया

इनके प्रशिक्षण के बाद खिलाडिय़ों ने अपना पूरा दमखम लगाया। मीराबाई चानु, संजीता, सतीश वेंकट और पूनम यादव ने गोल्ड मैडल तो वहीं पी गुरुराजा और प्रदीप सिंह ने सिल्वर मैडल जीता। वहीं विकास ठाकुर और अठारह साल के दीपक लाथर ने कांस्य पदक अपने नाम किया। मीराबाई से इन्हें बहुत उम्मीद थी। उन्होंने एशियन गेम्स में 194 किलोग्राम की जगह 196 किलो का भार उठा अपना ही रिकॉर्ड तोड़ दिया। 

 



खास बातें

- 2014 में भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम के चीफ कोच बने, लेकिन 2012 से ही ये खिलाडिय़ों के बीच में रहते थे और उन्हें हर समय गाइड करते थेे, ताकि वे प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन कर सकें।

- 2016 के रियो ओलंपिक में खराब प्रदर्शन के बाद इन्होंने वेट लिफ्टिंग खिलाडिय़ों की ट्रेनिंग देने के लिए अगल रणनीति तैयार की थी। इसी की बदौलत गोल्ड कोस्ट में पदक की झड़ी लगी।

- 500 से अधिक  बार खिलाडिय़ों का डोप टैस्ट नेशनल एंडी डोपिंग एजेंसी के साथ मिलकर हर साल कराते थे। 2014 से ही डोप टैस्ट की प्रक्रिया इन्होंने शुरु कराई ताकि मैच के दिन खिलाड़ी पर दाग न लगे।