शपथ ग्रहण समारोह देखने के लिए ट्रेन से आ रही थी संताना चकमा और बन गई मंत्री

Daily news network Posted: 2018-03-13 16:30:21 IST Updated: 2018-03-13 16:30:21 IST
शपथ ग्रहण समारोह देखने के लिए ट्रेन से आ रही थी संताना चकमा और बन गई मंत्री
  • 32 साल की संताना चकमा भाजपा की सरकार में मंत्री बनने से पहले आम महिला थी। वह बहुत ही गरीब परिवार से आती हैं।

अगरतला।

32 साल की संताना चकमा भाजपा की सरकार में मंत्री बनने से पहले आम महिला थी। वह बहुत ही गरीब परिवार से आती हैं। संताना चकमा सपने के सच होने संबंधी मुहावरे का सटीक उदाहरण है।  संताना चकमा ने सोशल साइंस में मास्टर डिग्री ले रखी है। उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी गरीबी के साथ लड़ाई में बिताई है। संताना के पिता चंद्रधान चकमा अपने गांव में प्राइवेट ट्यूशन पढ़ाते थे। सेलेब्रल अटैक के बाद वे लकवे से पीडि़त हो गए। संताना के दो बड़े भाई हैं जो उनके साथ पेचारथाल में रहते हैं।

 

 

मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद संताना चाहती थी कि वह अपने परिवार की मदद करे। उन्होंने नौकरी के लिए प्रयास किया लेकिन रिजेक्ट हो गई। बकौल संताना, मैं भाजपा के चोलो पलटई(बदलाव करें) के नारे से बहुत प्रभावी थी, इसलिए पार्टी में शामिल हो गई और दिन रात पार्टी के लिए काम करने लगी। 

 

 

 

जब संताना को पेचारथल विधानसभा से भाजपा के उम्मीदवार के रूप में चुना गया तो पहले तो उन्होंने चुनाव लडऩे से इनकार कर दिया क्योंकि उनके पास चुनाव लडऩे के लिए पैसा नहीं थे। पार्टी की सीनियर लीडरशिप और इलाके के लोगों के जोर देने पर वह चुनाव लडऩे के लिए तैयार हुई। इसके बाद लोगों ने संताना के चुनाव के लिए फंड एकत्रित करना शुरु किया। 

 

 

 

 

2018 के विधानसभा चुनाव में संताना ने सीपीएम के वरिष्ठ नेता और पेचारथाल विधानसभा सीट से कई बार विधायक रहे अरुण कुमार चकमा को 1373 वोटों से हराया। संताना की जीत के बाद चकमा समुदाय ने मांग की थी कि स्टेट कैबिनेट में समुदाय को भी प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए क्योंकि त्रिपुरा में कभी चकमा मंत्री नहीं रहा है। मंत्री बनने से पहले चकमा एक एनजीओ के लिए काम करती थी। मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद उसने एनजीओ ज्वाइन किया था। 

 

 

 

 

वह लोगों के लिए बहुत कुछ करना चाहती थी। चकमा सिर्फ एक बार गुवाहाटी गई थी, वो भी एनजीओ के काम क लिए। बकौल चकमा, मैं शपथ ग्रहण समारोह देखने के लिए अपने बड़े भाई के साथ सुबह की ट्रेन से अगरतला के लिए रवाना हुई। तक मुझे पता नहीं था कि मैं भी मंत्री बनने जा रही हूं। शपथ ग्रहण समारोह से कुछ घंटे पहले बिप्लब देब ने बताया कि मुझे भी मंत्री पद के लिए चुना गया गया। इस पर मुझे विश्वास ही नहीं हुआ। 

 

 

 

 

 

यह लिविंग ड्रीम की तरह है। संताना चकमा को समाज कल्याण और सोशल एजुकेशन विभाग के साथ साथ एनिमल रिसोर्स डिवलपमेंट विभाग दिया गया है। संताना के मंत्री बनने से उनके समुदाय के लोग काफी खुश हैं कि उनकी बेटी पूरे राज्य की बेटी बन गई है। उन्हें उम्मीद है कि वह समुदाय के कल्याण व बेहतरी के साथ साथ पूरे राज्य की बेहतरी के लिए काम करेंगी।