क्या ज्योति बसु का रिकॉर्ड तोड़ पाएंगे माणिक सरकार?

Daily news network Posted: 2018-02-13 10:10:11 IST Updated: 2018-02-13 10:10:11 IST
क्या ज्योति बसु का रिकॉर्ड तोड़ पाएंगे माणिक सरकार?
  • बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री व माकपा के ही दिग्गज नेता ज्योति बसु के नाम बतौर मुख्यमंत्री का सबसे लंबा कार्यकाल रहा है। वह जून 1977 से लेकर आठ नवंबर 2000 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे थे। उन्होंने 23 साल, चार महीने और 16 दिन बतौर मुख्यमंत्री अपनी सेवाएं दी थीं।

अगरतला।

बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री व माकपा के ही दिग्गज नेता ज्योति बसु के नाम बतौर मुख्यमंत्री का सबसे लंबा कार्यकाल रहा है। वह जून 1977 से लेकर आठ नवंबर 2000 तक पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री रहे थे। उन्होंने 23 साल, चार महीने और 16 दिन बतौर मुख्यमंत्री अपनी सेवाएं दी थीं।

 


 वहीं त्रिपुरा में पिछले 25 सालों से एक छत्र राज कर रही मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और 20 साल से लगातार शासन कर रहे मुख्यमंत्री माणिक सरकार के लिए 2018 का चुनाव इतिहास रचने वाला है।

 

 

 अगर माकपा इस बार फिर सत्ता में आती है तो वह भारतीय इतिहास में सबसे ज्यादा शासन करने वाले मुख्यमंत्रियों की सूची में पहले स्थान पर पहुंच जाएंगे। खास बात यह है कि अपनी सादगी, जनता में अलग तरह की लोकप्रियता और पार्टी के अंदर साफ-सुथरी छवि इस चुनावों में ये सभी चीजें माणिक राव को बहुत मजबूत बनाती हैं।

 

 माणिक सरकार एक बार फिर अपनी पारंपरिक सीट धानपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। धानपुर सेमी अरबन सेंटर है जो राजधानी अगरतला से 65 किलोमीटर दूर स्थित है। धानपुर सिपाहिजाला जिले में पड़ता है। माणिक सरकार 1998 से लगातार इस सीट से चुनाव जीतते आ रहे हैं। 1998 में इसी सीट से चुनाव जीतने के बाद माणिक सरकार पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने थे। धानपुर सीट शुरु से वामपंथियों का गढ़ रही है। 1972 से लेकर अब तक(2013) हर बार यहां से सीपीएम उम्मीदवार ही चुनाव जीतते आ रहे हैं।


 माणिक सरकार चार बार इस सीट से चुनाव जीत चुके हैं। इससे पहले सीपीएम के ही समर चौधरी पांच बार यहां से विधायक रहे हैं। इस लिहाज से देखें तो यहां से माणिक सरकार को हराना करीब करीब नामुमकिन है।

 

 

 इस बार भी इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला है। भाजपा ने फिर प्रतिमा भौमिक को चुनाव मैदान में उतारा है। भौमिक पहले भी इस सीट से दो बार चुनाव लड़ चुकी है लेकिन दोनों बार उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। प्रतिमा चौधरी 1998 और 2003 में दोनों बार तीसरे स्थान पर रही। बता दें कि त्रिपुरा विधानसभा चुनाव के वोटिंग 18 फरवरी को होगी और मतों की गिनती 3 मार्च को होगी।