असम : किसान उत्पादक संगठनों के नाम पर सरकारी धनराशि की लूट खसोट

Daily news network Posted: 2018-04-10 15:01:45 IST Updated: 2018-04-10 15:02:16 IST
असम : किसान उत्पादक संगठनों के नाम पर सरकारी धनराशि की लूट खसोट
  • कृषि मंत्री अतुल बोरा के बागवानी विभाग में दरअसल क्या चल रहा है यह विधानसभा की विभागीय स्थाई समिति (डीआरएससी) की रिपोर्ट में उजागर हुआ है। इसमें कहा गया है कि बागवानी विभाग के तहत तमाम फार्म कार्यरत तो है पर उनके बारे में विधायकों को ही कुछ नहीं मालूम ।

गुवाहाटी

कृषि मंत्री अतुल बोरा के बागवानी विभाग में दरअसल क्या चल रहा है यह विधानसभा की विभागीय स्थाई समिति (डीआरएससी) की रिपोर्ट में उजागर हुआ है। इसमें कहा गया है कि बागवानी विभाग के तहत तमाम फार्म कार्यरत तो है पर उनके बारे में विधायकों को ही कुछ नहीं मालूम । 






डीआरएससी की रिपोर्ट के अनुसार किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को विभाग की ओर से भारी मात्रा में धनराशि तो दी गई है पर उस धन का कहां कहा उपयोग हुआ, उसका विभाग के पास कोई लेखा जोखा नहीं है । पिछले तीन सालों में बागवानी विभाग के विकास के लिए जितनी राशि दी गई उसका नतीजा कहीं दिखा भी नहीं जिसके कारण  डीआरएससी विभाग की कार्यशैली और विकास कतई दिखाई नहीं पड़ता है।

 





हाल ही में संपन्न बजट सत्र में दाखिल विकास (बी) विभाग की निगरानी के लिए विधानसभा की स्थाई समिति की 20वीं  रिपोर्ट में बागवानी  विभाग के कामकाज और mसरकारी धन की बरबादी को उजागर किया है । विभाग को जारी धनराशि और इसके परिणामों में कोई मेल नहीं है तथा विभाग के पास कोई सटीक लेखाजोखा भी मौजूद नहीं है । इसके चलते डीआरएससी ने विभाग को एक जांच समिति गठन का पिछले तीन सालों के कामकाजों पर अगले 6 महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा है ।

 





मालूम हो कि डीआरएससी की बैठक गत 16 मार्च को हुईं थी तथा 26 मार्च को सदन में अपनी रिपोर्ट दी थी। डीआरएससी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राज्य के विभिन्न जिलों खासकर नगांव और मोरीगांव में एफपीओं  की गतिविधियां  संदिग्ध पाई गई हैं। इन एफपीओं को विभाग की  ओर से धनराशि की मंजूरी के बाद भी उस राशि का उपयोग कहां हुआ उसका कोई भी रिकार्ड विभाग के पास मौजूद नहीं है। इसके अलावा  स्थायी समिति ने इंद्रमालती नामक हाजो के एक एफपीओं के मामले में भारी अनियमितता पाई है, जिसकी पर्याप्त जांच की जरूरत पर बल दिया है ।







एफपीओं की अनियमितताओं  की जांच के लिए डीआरएससी ने विधायक रमेंद्र नारायण कलिता के नेतृत्व में पांच सदस्यों की एक उप- समिति का गठन करते हुए अगले छह महीने के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है ।