Loksabha Election: डिब्रूगढ़ लोकसभा सीट पर भाजपा ने कांग्रेस के चक्रव्यूह तोड़कर लहराई थी विजय पताका

Daily news network Posted: 2019-03-21 10:47:04 IST Updated: 2019-03-21 10:47:04 IST
Loksabha Election: डिब्रूगढ़ लोकसभा सीट पर भाजपा ने कांग्रेस के चक्रव्यूह तोड़कर लहराई थी विजय पताका
  • सत्रहवीं लोकसभा की 543 सीटों के लिए चुनाव 11 अप्रैल से 19 मई के बीच सात चरणों में होंगे। मतगणना 23 मई को की जायेगी। लोकसभा चुनाव में ज्यादा समय नहीं बचा है। असम राज्य की 14 सीटें दांव पर होंगी। आज हम आपको बताते हैं असम की डिब्रूगढ़ सीट (आरक्षित) के बारे में। जिसपर अभी भाजपा का कब्जा है।

सत्रहवीं लोकसभा की 543 सीटों के लिए चुनाव 11 अप्रैल से 19 मई के बीच सात चरणों में होंगे। मतगणना 23 मई को की जायेगी। लोकसभा चुनाव में ज्यादा समय नहीं बचा है। असम राज्य की 14 सीटें दांव पर होंगी। आज हम आपको बताते हैं असम की डिब्रूगढ़ सीट (आरक्षित) के बारे में। जिसपर अभी भाजपा का कब्जा है। असम एक समय कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था, लेकिन 2016 विधानसभा चुनाव के बाद समीकरण एकदम बदल गए। 2016 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपना परचम लहराया। सर्बानंद सोनोवाल प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

 

 


2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से भाजपा प्रत्याशी रामेश्वर तेली ने बड़ी जीत दर्ज की थी। इसके अलावा  राज्य के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल भी इस सीट पर 2004 का लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। वहीं डिब्रूगढ़ संसदीय सीट की कुल 9 विधानसभा सीटों में से 8 पर भाजपा और एक पर असम गण परिषद काबिज है। चाय का शहर के नाम से मशहूर डिब्रूगढ़ असम का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। यह शहर पूरे उत्तर पूर्व का सबसे बड़ा आर्थिक हब है। डिब्रूगढ़ लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 13) में कुल मतदाताओं की संख्या 11,24,305 है। इनमें से 5,79,657 मतदाता पुरुष हैं और 5,44,648 महिलाएं हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में 8,90,968 लोगों मतदान किया था। इनमें 4,62,412 मतदाता पुरुष और 4,28,556 मतदाता महिलाएं थी।

 


 अगर बात डिब्रूगढ़ लोकसभा सीट की तो इस सीट पर आजादी के बाद लगातार कांग्रेस का कब्जा रहा है। 1952 से लेकर 2014 के बीच इस सीट पर कांग्रेस को सिर्फ दो बार ही हार का मुंह देखना पड़ा है। 1952 में कांग्रेस के टिकट पर जोगेंद्र नाथ हजारिका पहली बार सांसद चुने गए। 1952 से लेकर 1967 तक जोगेंद्र नाथ हजारिका चार बार सांसद बने। 1971 में कांग्रेस ने रोबिन्द्र नाथ काकोटी को टिकट दिया और वे भी इस सीट से चुनाव जीत गए। 1977 और 1985 में इस सीट पर कांग्रेस ने नया प्रत्याशी उतारा। इस बार टिकट हरेन भूमजी को दी। दोनों बार वे यहां से चुनाव जीते।

 


 1991 में कांग्रेस ने इस सीट से पबन सिंह घाटोवार को टिकट दिया। 1991 से लेकर 1999 तक पबन सिंह घाटोवार इस सीट से चार बार सांसद चुने गए। 2004 में असम गण परिषद के सर्वानंद सोनेवाल यहां से सांसद बने। 2009 में कांग्रेस इस सीट पर फिर कब्जा जमा लिया। लेकिन 2014 के चुनाव में मोदी लहर के चलते कांग्रेस ने इस सीट को फिर से गंवा दिया। 2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर कुल 79 फीसदी मतदान हुआ था। 1952 से 2014 के बीच यहां पर इस सीट पर 12 बार कांग्रेस और 1 बार बीजेपी जीती है।

 


 रामेश्वर तेली बीजेपी की टिकट से पहली बार सांसद पहुंचे हैं। उन्हें कांग्रेस के पबन सिंह घाटोवार को हाराया। अगर हम उनके पांच साल के कार्यकाल पर नजर डालें तो उन्होंने पांच साल में लोकसभा में 86 प्रश्न पूछे, जबकि उन्होंने 74 डिबेट में हिस्सा लिया। वहीं अगर उनकी लोकसभा में उपस्थिति की बात करें तो वे मई 2014 से दिसंबर 2018 के बीच उनकी उपस्थिति 92 फीसदी रही।

 


 डिबूगढ़ एक ग्रामीण सीट है। इस लोकसभा सीट के अंतर्गत 9 विधानसभा सीटें मोरन, डिब्रूगढ़, लाहोवाल, दुलियाजानस तिंगखोंग, नाहरकटिया, तिनसुकिया, डिग्बोई, मार्गेरिटा आती हैं। यहां पर इस बार के चुनाव में किसानों के मुद्दे और नेशनल वोर्टस रजिस्टर, नागरिकता के कानून में बदलाव के अलावा असम अकार्ड को लागू करना अहम मुद्दे रहेंगे।


 सामाजिक ताना-बाना

 2011 की जनगणना के अनुसार डिब्रूगढ़ सीट पर कुल 19 लाख 37 हजार 415 जनसंख्या थी। इसमें से 76.38 फीसदी ग्रामीण आबादी और 23.62 प्रतिशत आबादी शहरी थी। इसमें 3.66 प्रतिशत लोग एससी और 6.54 फीसदी आबादी एसटी है। 2014 के चुनाव के वक्त इस सीट पर 11 लाख 24 हजार 305 मतदाता थे, जिनमें पुरुष 5 लाख 79 हजार 658 और महिला मतदाता 5 लाख 44 हजार 647 हैं। 2014 में 16 हजार 809 लोगों  ने नोटा का बटन दबाया था।


 

 टी सिटी के नाम से फेमस

 असम का डिब्रूगढ़ जिला चाय के बागानों के लिए विश्वविख्यात है। इसे टी सिटी भी कहते हैं। बीते वर्ष 25 दिसंबर को ही पीएम मोदी ने डिब्रूगढ़ में देश का सबसे लंबा और एशिया का दूसरा सबसे लंबा रेल-सड़क पुल बोगीबील ब्रिज का उद्घाटन किया था। असम की ब्रह्मपुत्र नदी पर बने इस बोगीबील पुल की लंबाई 4.94 किलोमीटर है।