सिक्किम की टेमी चाय की दीवानी है दुनिया, जानिए इसका पूरा इतिहास

Daily news network Posted: 2018-04-20 16:36:02 IST Updated: 2018-04-20 16:36:02 IST
सिक्किम की टेमी चाय की दीवानी है दुनिया, जानिए इसका पूरा इतिहास

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चाय उत्पादन में असम देश का सबसे बड़ा राज्य है। तमिलनाडु का नीलगिरि पहाड़ भी चाय उत्पादन के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। केरल का मुन्नार हिल स्टेशन भी एक ऐसी जगह है, जहां बड़ी मात्रा में चाय बागान हैं। हिमाचल प्रदेश की कांगड़ा चाय भी देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान रखता है। हालांकि इन सबसे बीच सिक्किम की टेमी चाय की अपनी खासियत है।  इस खबर में हम आपको टेमी चाय के इतिहास से रूबरू करवा रहे हैं। 



 

टेमी चाय बागान की स्थापना सिक्किम के पूर्व नरेश चोग्याल के शासनकाल में 1969 में हुई थी और बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन 1977 में शुरू हुआ। चाय बागान के रोजमर्रा के कामकाज को व्यवस्थित रखने के लिए 1974 में चाय बोर्ड की स्थापना की गई और बाद में यह सिक्किम सरकार के अंतर्गत उद्योग विभाग की सहायक कम्पनी बन गई। टेमी चाय से जहां एक ओर 4 हजार से अधिक श्रमिकों और 30 कर्मचारियों को सीधे रोजगार मिलता है। वहीं यह कम्पनी सरकारी क्षेत्र में रोजगार प्रदान करने वाली एक बड़ी कम्पनी बन गई है। यहां साल में लगभग 100 टन चाय की पैदावार होती है। यदि बड़े चाय बागानों से मुकाबला किया जाए, तो यह पैदावार बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन इसकी गुणवत्ता और सुगंध ने भारत और दुनिया भर के चाय प्रेमियों का दिल जीत लिया है।



 

टेमी चाय बागान में पैदा हुई चाय को टेमी चाय जैसे कई ब्रांड नामों से पैक किया जाता है, जो सबसे बढिय़ा क्वालिटी की चाय होती है, जिसमें सुनहरी फूलों जैसी नारंगी झलक वाली बढिय़ा काली चाय होती है। इसके बाद दूसरी बढिय़ा चाय का लोकप्रिय ब्रांड नाम है सिक्किम सोलजा और उसके बाद मिस्टीक चाय और कंचनजंगा चाय का नाम आता है। इसे ऑर्थोडोक्स डस्ट टी के नाम से बेचा जाता है। चाय की लगभग 70 प्रतिशत पैदावार अधिकृत दलाल के माध्यम से कोलकाता में सार्वजनिक नीलामी से बेची जाती है और बाकी की चाय के रिटेल पैकेट बनाए जाते हैं और स्थानीय बाजार में बेचे जाते हैं।



 

लेखक खगेंद्रमणि प्रधान का कहना है कि चाय बागान की भूमि की भौगोलिक स्थिति और चाय के पौधों को जैविक खाद से पोषित करने से इस चाय बागान में पैदा होने वाली चाय के पत्तों की कीमत और सुगंध और बढ़ जाती है। टेमी चाय बागान ने स्विटजरलैंड की बाजार नियंत्रण से संबंधित संस्था आईएमओ  के निर्देशों का पालन किया और पर्यवेक्षण की अवधि पूरी होने के बाद आईएमओ इंडिया ने, जो आईएमओ स्विटजरलैंड का सदस्य समूह है, 2008 में टेमी चाय बागान को 100 प्रतिशत ऑर्गेनिक का प्रमाण पत्र दिया। इसके अलावा खाद्य सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली के अंतर्गत भी यह आईएसओ-22,000 मानक के अनुसार एचएसीसीपी द्वारा भी परमाणीकृत चाय बागान है. जिससे यह सुनिश्चित होता है कि बाजार पहुंचने वाला उत्पाद उत्तम गुणवत्ता वाला है।



 

चाय उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को परंपरागत से ऑर्गेनिक में बदलने से न केवल इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ी है, बल्कि सिक्किम जाने वाले पर्यटक भी बड़ी संख्या में इसकी मांग करते हैं। चाय की ऑर्गेनिक खेती के लिए जैविक खाद और वर्मिन कम्पोस्ट खाद, नीम और अरंण्डी की बट्टियों के रूप में कीटनाशक भी उपलब्ध होते हैं। चाय बागान के पास लगभग 100 एकड़ वन भूमि भी है, जिससे बड़ी मात्रा में चाय बागान के लिए जैविक खाद-पदार्थों की पूर्ति हो जाती है जो इसे आवश्यक संसाधनों की दृष्टि से आत्मनिर्भर बनाता है।



 

जर्मनी, ब्रिटेन, अमरीका और जापान टेमी चाय के प्रमुख खरीददार हैं। ग्रीन टी की बढ़ती मांग को देखते हुए इसमें विविधता लाने के कई प्रयास किए जा रहे है और इसकी कीमत बढ़ाने के लिए अधिक आकर्षक डिजाइन वाले पैकेट तैयार किए जा रहे हैं। इसके अलावा सिक्किम की इस चाय के लिए विदेशी बाजार में सीधे खरीददार बनाने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। चाय बोर्ड ने कनाडा और जापान को ऑर्गेनिक चाय के छोटे पैकेट सीधे निर्यात करना भी शुरू कर दिया है, जहां इसके लिए आकर्षक दाम मिल रहे हैं।