कभी सैक्स स्कैंडल में घिरे थे मेघालय के राज्यपाल, पद से देना पड़ा था इस्तीफा

Daily news network Posted: 2018-04-19 16:21:28 IST Updated: 2018-04-19 17:52:49 IST
  • मेघालय के राज्यपाल वी षणमुगनाथन सेक्स स्कैंडल में फंस चुके हैं

शिलॉन्ग।

तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित पर एक तरफ  'डिग्री के लिए सेक्स' केस में आरोपी महिला ने आरोप लगाया है कि उसके और राज्यपाल के बीच काफी घनिष्ठ संबंध हैं तो वहीं दूसरी तरफ  प्रेस कान्फ्रेंस में पुरोहित ने सबके सामने महिला पत्रकार के गाल सहलाकर विवाद को खुद जन्म दिया है। राज्यपाल की इस हरकत की देशभर में आलोचना हो रही है। हालांकि ये पहला मामला नहीं है जब किसी राज्यपाल ने विवादों को जन्म दिया हो इससे पहले भी मेघालय के राज्यपाल  वी षणमुगनाथन सेक्स स्कैंडल में फंस चुके हैं। आइए जानते हैं कि आखिर उनसे जुड़ा मामला क्या था। 



 

षण्मुगनाथन को देना पड़ा था इस्तीफा 

दरअसल यौन उत्पीडऩ के आरोपों में मेघालय के राज्यपाल वी षण्मुगनाथन को इस्तीफा देना पड़ा था। मामला जनवरी 2017 का है, जब राजभवन के 80 से अधिक कर्मचारियों के हस्ताक्षर वाली चि_ी प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को भेजी गई थी, जिसमें षणमुगनाथन के खिलाफ गंभीर शिकायतें की गई थीं, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। पत्र में कहा गया था कि उन्होंने राजभवन को लेडीज क्लब में बदल दिया था, जहां सिर्फ युवा महिला कर्मचारियों की नाइट ड्यूटी लगाई जाती थी।



 

राष्ट्रपति से पीएम तक हुई थी शिकायत

राजभवन के कर्मियों के एक समूह ने उन पर राज्यपाल के कार्यालय की गरिमा से गंभीर समझौता करने का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाए जाने की मांग की थी, जिसके बाद राज्यपाल ने इस्तीफा दिया। आरोप था कि राजभवन यह एक ऐसा स्थान बन गया है जहां राज्यपाल के प्रत्यक्ष आदेश से युवतियां अपनी मर्जी से आती-जाती हैं। आरोपों के तहत कई की पहुंच सीधे उनके शयन कक्ष तक थी। इस बीच महिला कार्यकर्ताओंं ने राज्यपाल को हटाने की मांग करते हुए यहां हस्ताक्षर अभियान शुरू किया था। नौकरी पाने की प्रत्याशी एक महिला ने भी राज्यपाल पर आरोप लगाया था कि वह जब राजभवन में साक्षात्कार देने आई थी तो राज्यपाल ने उसके साथ अनुचित व्यवहार किया था। 


 

संघ से भी जुड़े रहे हैं षणमुगनाथन

बता दें कि मेघालय के राज्यपाल वी षणमुगनाथन ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को तमिलनाडु में मजबूत बनाने में लगाया। परंपरागत तौर पर दक्षिण भारत में संघ की उतनी पैठ नहीं रही है जितनी उत्तर और पश्चिमी भारत में, इस लिहाज से षणमुगनाथन का काम काफी कठिन था, उन्होंने 45 साल से अधिक समय संघ को गांव-गांव में पहुंचाने में लगाया। तमिलनाडु में आरएसएस का वरिष्ठतम प्रचारक के होने की वजह से उन्हें भाजपा सरकार ने राज्यपाल बनाया। 68 वर्षीय षणमुगनाथन मेघायल के अलावा अरुणाचल प्रदेश के भी कार्यवाहक राज्यपाल थे।

 


हिंदू संस्कृति की महानता पर तमिल में तीन किताबें भी लिखी

किसी जमाने में भाजपा के अध्यक्ष रहे जना कृष्णमूर्ति के बाद तमिलनाडु से आने वाले वे संघ के गिने-चुने बड़े प्रचारकों में थे। 1962 में संघ से जुडऩे के बाद वे 1970 में संघ के प्रचारक बने और दो साल तक संघ के प्रांत प्रचारक (राज्य में संघ के सबसे बड़े नेता) भी रहे। तमिलनाडु के तंजावुर जिले से ताल्लुक रखने वाले षणमुगनाथन ने संघ को स्थापित करने के लिए कई अभियान चलाए, जिनमें युवाओं को जोडऩे का अभियान प्रमुख था। राजनीति शास्त्र में एमफिल कर चुके षणमुगनाथन भाजपा के दिल्ली स्थित मुख्यालय में रिसर्च एंड डॉक्युमेंटेशन के प्रभारी के रूप में काम कर चुके हैं। उन्होंने राष्ट्रवाद और हिंदू संस्कृति की महानता पर तमिल में तीन किताबें भी लिखी हैं।