गुरु नानक देव की यादों से भी जुड़ी है गुरु दोंगमार लेक, कड़ाके की ठंड में भी नहीं जमता यहां का पानी

Daily news network Posted: 2018-04-07 10:18:50 IST Updated: 2018-04-07 10:43:47 IST
गुरु नानक देव की यादों से भी जुड़ी है गुरु दोंगमार लेक, कड़ाके की ठंड में भी नहीं जमता यहां का पानी
  • गुरडोंगमार झील भारतीय राज्य सिक्किम के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। यह सिक्किम के एक छोटे से शांत कस्बे लाचेन में स्थित है।

गुरडोंगमार झील भारतीय राज्य सिक्किम के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों में से एक है। यह सिक्किम के एक छोटे से शांत कस्बे लाचेन में स्थित है। यह झील 5210 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। मीठे पानी की यह झील पूरे विश्व में सर्वाधिक ऊंचाई पर स्थित जलाशयों में से एक है। गुरडोंगमार झील उत्तरी सिक्किम प्रान्त में स्थित है और चीन की दक्षिणी सीमा से 5 किमी की दूरी पर  है। 




इस झील से 5 किमी पहले ही सो लस्मो झील स्थित है। सेना से पूर्व अनुमति के उपरान्त पर्यटक गुरडोंगमार झील से सो लस्मो झील तक ट्रेकिंग कर सकते हैं। पवित्र मानी जाने वाली गुरडोंगमार झील का नाम सिक्किम के संरक्षक संत गुरू पद्मसम्भव के नाम पर रखा गया है। ऐसा माना जाता है कि उन्होंने कुछ धार्मिक आयोजन किये थे और इसीलिए झील का यह भाग वर्ष के सबसे ठंडे महीनों में भी नहीं जमता है।

 



हालांकि सिक्किम के लाचेन के निकट गुरु दोंगमार झील जाने पर इन दिनों सिख पर्यटकों पर राज्य सरकार ने अघोषित रोक लगा रखी है। हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी तरह का प्रतिबंध सिखों के जाने पर नहीं है। उल्लेखनीय है कि लाचेन स्थित गुरु दोंगमार लेक को सिख समुदाय के लोग भी अपने आदि गुरु नानक देव की स्मृति को लेकर पवित्र मानते हैं। 




सिखों की मान्यता है कि गुरु नानकदेव 15 वीं सदी में तिब्बत से लौटने के क्रम में गुरु दोंगमार लेक गये थे। उसी को दृष्टिगत रखते हुए लाचेन सीमा पर तैनात भारतीय सेना के सिख रेजिमेंट ने 17,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित गुरु दोंगमार लेक के करीब एक गुरुद्वारे का निर्माण कराया था, लेकिन इस संबंध में विवाद गहराने के बाद सेना ने 6 जुलाई 2001 को गुरुद्वारे को लाचेन मठ को सौंप दिया।

 


 

दरअसल, सिक्किम सरकार ने इस संबंध में एक उच्च स्तरीय जांच कमेटी का गठन किया था। कमेटी तादोंग स्थित नामग्याल इंस्टीच्यूट ऑफ टिबेटोलॉजी ने दस्तावेज के जरिये इस निष्कर्ष पर पहुंची थी कि सिखों के दावे के पीछे कोई ठोस आधार नहीं है। गुरु दोंगमार लेक दरअसलए तिब्बत में बौद्ध धर्म के संस्थापक गुरु पद्मसंभवा, जिन्हें भूटान और सिक्किम में आदर से गुरु रिमपोछे कहा जाता है, ने लाचेन लेक को अपने स्पर्श से पवित्र कर उसके पानी को जाड़े में भी पीने योग्य बनाया था। उसके बाद से ही यह लेक बौद्ध धर्म के अनुयायियों द्वारा पवित्र माना जाने लगा। 




गौरतलब है कि सिक्किम राज्य को भारतीय संविधान में 371एफ के तहत विशेष दर्जा उसी तरह प्राप्त है जैसा जम्मू-कश्मीर को मिला हुआ है। जानकारों का मानना है कि इसी वजह से राज्य सरकार ने मसले की संवेदनशीलता के मद्देनजर लाचेन जाने वाले  सिखों पर अघोषित रोक लगा रखी है।