Commonwealth Games: ये हैं देश की पहली महिला प्रोफेशनल बॉक्सर, जिन पर टिकी है मणिपुर की उम्मीदें

Daily news network Posted: 2018-04-05 14:20:59 IST Updated: 2018-04-05 14:20:59 IST
Commonwealth Games: ये हैं देश की पहली महिला प्रोफेशनल बॉक्सर, जिन पर टिकी है मणिपुर की उम्मीदें
  • वेटलिफ्टर सिखोम मीराबाई चानू ने यहां कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को पहला गोल्ड जिताया।

वेटलिफ्टर सिखोम मीराबाई चानू ने यहां कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को पहला गोल्ड जिताया। उन्होंने गुरुवार को 48 किग्रा कैटेगरी में कुल 196 किग्रा (स्नैच में 86 किग्रा और क्लीन एंड जर्क में 110 किग्रा) वजन उठाया। इस दौरान उन्होंने स्नैच और क्लीन एंड जर्क में अपना ही दो बार रिकॉर्ड तोड़ दिया। बता दें कि 21वें कॉमनवेल्थ में 18 खेलों में से भारत 14 में भाग ले रहा है। वहीं अब  देश की निगाहें सरिता देवी पर टिकी हुई हैं।



 

 

मणिपुर की रहने वाली सरिता देवी भारत में महिला बॉक्सिंग की अहम सदस्य हैं। उनका जन्म एक मार्च 1982 को हुआ था। उनके नाम कई उपलब्धियां दर्ज हैं। 2006 के वल्र्ड चैंपियनशिप्स में गोल्ड,  2014 ग्लास्गो कॉमनवेल्थ में सिल्वर पदक भी उन्होंने जीता है। हालांकि 2014 के एशियाई खेलों का विवाद अब भी उनके साथ है। कोरियाई मुक्केबाज पार्क जी.ना के खिलाफ  सेमीफाइनल मुकाबले में उनकी प्रतिद्वंद्वी को विजेता घोषित किया गया था। हालांकि सरिता का मानना था कि उनके साथ गलत हुआ है। अवॉर्ड सेरिमनी में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद वल्र्ड बॉडी ने उन पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि बाद में सरिता देवी ने रोते-रोते मैडल लिया।


 



 

 

आपको बता दें कि सरिता देवी भारत की पहली महिला प्रोफेशनल बॉक्सर हैं। पिछले साल उन्होंने इंफाल में हंगरी की सोफियो बेडो को हराकर अपने प्रोफेशनल बॉक्सिंग करियर का शानदार जीत से आगाज किया था। सरिता देवी ने सोफियो बेडो को 3-0 से हराकर अपने पहले प्रोफेशनल बॉक्सिंग मुकाबले में शानदार जीत दर्ज की थी। इसके साथ ही सरिता भारत की पहली महिला प्रोफेशनल बॉक्सिर भी बन गई थीं।



 


2014 के कॉमनवेल्थ खेलों की रजत  विजेता सरिता पूरे मुकाबले में 59 प्रो बाउट का अनुभव रखने वाली हंगरी की सोफिया पर पूरी तरह हावी रही थी।  जीत के बाद सरिता ने कहा था कि एशियाई खेलों में हुई घटना बेहद दर्दनाक थी। यह एक बड़ा कारण था, जिसकी वजह से मैंने पेशेवर मुक्केबाजी का रुख किया। किसी भी मां के लिए अपने बच्चे से दूर रहना और उसका पोषण नहीं कर पाना बहुत बड़ा त्याग है। मैंने इस दिन के लिए यह त्याग किया था।


 

मैरीकॉम के कारण 2012 में नहीं जा पाईं ओलंपिक

यूं तो पांच बार की विश्व चैंपियन एमसी मैरीकॉम की अच्छी दोस्त हैं और दोनों इम्फाल में साथ रहकर बॉक्सिंग की कोचिंग करते थे, लेकिन बाद में एक खिलाड़ी के रूप में मैरी कॉम ज्यादा सफल हुईं। सरिता का कहना था कि 2012 में ओलंपिक में नहीं जा पाने का मलाल है और इसका कारण बनी थीं मैरीकॉम। सरिता ने बताया कि मैरीकॉम 46 किग्रा कैटेगरी में खेलती थीं, मेरी 51 किग्रा थी। बाद में मेरी को 51 किलोग्राम में लाया गया और ओलंपिक भेज दिया गया। उस ओलंपिक में भाग नहीं ले पाने की कसक अब तक है।

 

 

चार साल एक इवेंट का इंतजार करता है

मणिपुर में बॉक्सिंग अकादमी की संचालक सरिता का कहना है कि  एक बड़े खेल इवेंट का इंतजार खिलाड़ी चार साल करता है। ऐसे में जब उसके साथ कोई गलत निर्णय होता है, उसका विरोध करना पड़ता है। अगर गलत बात का विरोध नहीं करोंगे, तो हर बार ऐसा होगा। सरिता की अकादमी से खेल मंत्रालय ने छह बॉक्सर ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट के लिए चुना है। यह उनके लिए उपलब्धि से कम नहीं है।

 

 

2014 की कमी को 2018 में पूरा करूंगी

मणिपुर पुलिस में डीएसपी सरिता देवी उन खिलाडिय़ों में हैं, जिन्होंने लंबा संघर्ष किया है। उन्होंने कहा कि 2014 की घटना के बाद फिर से लौटना काफी मुश्किल था, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। इन खेलों की वजह से रियो ओलंपिक में सरिता देवी को नहीं भेजा गया। सरिता का कहना है अब वह एशियाई खेलों में छोड़े गए काम को पूरा करेंगी। 60 किलोग्राम कैटेगरी में 2018 एशियाई व कॉमनवेल्थ खेलों में हिस्सा लूंगी। सरिता देवी को  2009 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

 

बता दें कि सरिता देवी का जन्म थौबुल खुनौ थौबल में हुआ था। उनके पिता मूल रूप से किसान हैं। बचपन में सरिता देवी खेत में अपने माता-पिता की मदद करती थीं। सरिता ने वाइटौ मचल हाई स्कूल में अपना हाई स्कूल पूरा किया और फिर मैट्रिक के लिए बाल मंदिर, थौबल चली गईं।