मुस्लिम बहुल इस सीट पर किसी भी पार्टी ने मुस्लिम को नहीं दिया टिकट, भाजपा कर सकती है क्लीन स्वीप

Daily news network Posted: 2019-05-22 17:11:09 IST Updated: 2019-05-22 19:30:51 IST

असम की करीमगंज लोकसभा सीट पर रोचक मुकाबला होने के आसार हैं। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) ने इस बार मौजूदा सांसद राधेश्याम ब‍िस्वास पर दांव लगाया है, ज‍िन्हें बीजेपी उम्मीदवार कृपानाथ मल्लाह से कड़ी टक्कर म‍िल सकती है। कांग्रेस ने स्वरूप दास को मैदान में उतारा है तो वहीं आल इंड‍िया तृण मूल कांग्रेस के चंदन दास भी यहां ताल ठोंक रहे हैं। देखने वाली बात होगी क‍ि विधानसभा सीटों में बीजेपी की हवा में मुख्यमंत्री बने सर्बानंद सोनोवाल, लोकसभा में भी इस हवा को बरकरार रख पाते हैं या नहीं? 18 अप्रैल को इस सीट पर मतदान होना हैं। वर्तमान में करीमगंज लोकसभा सीट से ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF)के राधेश्याम बिस्वास सांसद हैं।

 

 

बता दें क‍ि असम की पांच सीटों पर 18 अप्रैल को दूसरे फेज में मतदान होना है। 10 मार्च को लोकसभा चुनाव 2019 की घोषणा होने के बाद देश,  चुनावी माहौल में आ गया है। 19 मार्च को इस सीट के ल‍िए नोट‍िफ‍िकेशन न‍िकला, 26 मार्च को नोम‍िनेशन की अंत‍िम तारीख, 27 मार्च को उम्मीदवारों की अंत‍िम ल‍िस्ट पर मुहर लगी। अब 18 अप्रैल के मतदान के ल‍िए सभी दलों ने अपनी ताकत झोंक दी है। लोकसभा चुनाव 2019 के दूसरे चरण में 13 राज्यों की 97 लोकसभा सीटों पर मतदान होना है। मतदान का पर‍िणाम 23 मई को आना है। लोकसभा की 14 सीटों वाला राज्य असम यूं तो कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था, लेकिन 2016 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में बीजेपी के पक्ष में हवा बनी है। 2016 में सर्बानंद सोनोवाल के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य में बीजेपी की हवा चल रही है। असम की करीमगंज लोकसभा सीट पर ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) का कब्जा है।  AIUDF से राधेश्याम बिस्वास सांसद हैं। इस सीट में 8 विधानसभाएं हैं जिनमें चार पर AIUDF,दो पर कांग्रेस और दो पर बीजेपी काबिज है। यह सीट शुरू से कांग्रेस के प्रभाव वाली रही है। यहां बीजेपी ने सिर्फ 1991 और 1996 में जीत दर्ज की थी। कांग्रेस प्रत्याशी निहार रंजन ने 1962 से 1980 तक लगातार पांच बार जीत दर्ज की थी।

 

 

करीमगंज सीट पर सबसे पहले 1962 में लोकसभा चुनाव हुए। 1952 और 1957 में हुए लोकसभा चुनाव करीमगंज सीट पर नहीं हुए। करीमगंज सीट पर 1962 में हुए पहले चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी निहार रंजन लस्कर ने रिकॉर्ड 50525 मतों से जीत दर्ज की। उनकी जीत का सिलसिला अगले पांच चुनावों तक कायम रहा। 1967 में हुए चौथे लोकसभा चुनाव में भी निहार रंजन ने 76923 मतों से जीत दर्ज की। इसके बाद 1971 के चुनाव में उन्होंने और बड़ी जीत दर्ज करते हुए 121746 मतों से सीपीएम प्रत्याशी हरिनारायण रबिदास को हराया था। 1977 में हुए छठे लोकसभा चुनाव में निहार रंजन ने बीएलडी प्रत्याशी लीलामय दास को 30300 मतों से हराया था। 1980 में हुए सातवें लोकसभा चुनाव में निहार रंजन ने सीपीएम प्रत्याशी कामदेब दास को 72787 मतों से हराया। 1984 में हुए आठवें लोकसभा चुनाव में इंडियन कांग्रेस (सोशलिस्ट) के प्रत्याशी सुदर्शन दास ने जीत दर्ज की। इसके बाद 1991 और 1996 में हुए चुनावों में बीजेपी ने यहां जीत दर्ज की। 1991 में बीजेपी प्रत्याशी द्वारका नाथ दास ने 49753 मतों के अंतर से जतिंद्र चंद्र दास को और 1996 में कांग्रेस प्रत्याशी सबिता दास को 32749 मतों से हराया। 12वें लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की इस सीट पर वापसी हुई। 1998 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी नेपाल चंद्र दास ने बीजेपी प्रत्याशी स्वप्न कुमार दास को 10468 मतों से हराया। अगले ही साल फिर से हुए लोकसभा चुनाव में नेपाल चंद्र दास ने अपनी सीट बचाए रखी। इस बार उन्होंने बीजेपी प्रत्याशी को 42259 वोटों से हराया। 2004 में हुए चौदहवें लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी ललित मोहन ने बीजेपी प्रत्याशी को रिकॉर्ड 91948 मतों से हराया। 2009 के चुनाव में ललित मोहन ने फिर से जीत दर्ज की। इस बार उन्होंने एयूडीएफ के प्रत्याशी राजेश मल्लाह को 7920 मतों से हराया।

 

 

 


करीमगंज लोकसभा सीट में कुल 8 विधानसभा सीटें हैं। इनमें राताबारी BJP के पास, पथरकंडी BJP, करीमगंज नॉर्थ कांग्रेस, करीमगंज साउथ एआईयूडीएफ, बदरपुर कांग्रेस, हैलाकांडी एआईयूडीएफ, कतलीचेरा एआईयूडीएफ और अल्गापुर एआईयूडीएफ के पास है। असम में कुल 126 विधानसभा सीटें हैं। 2016 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। 2016 के चुनाव में 60 सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी। वहीं कांग्रेस को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था। कांग्रेस को महज 26 सीटें मिलीं। इसके अलावा एआईयूडीएफ 13, असम गण परिषद 14, बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट 12 और एक निर्दलीय विधायक ने जीत दर्ज की थी। बता दें कि करीमगंज बांग्लादेश की सीमा से सटा हुआ इलाका है। कुशियारा नदी के उस पार बांग्लादेश लग जाता है। यहां तकरीबन 90 फीसदी ग्रामीण जनता है। असम की करीमगंज लोकसभा सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 11,65,997 है। इसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 6,15,198, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 5,50,799 है। 2011 की जनगणना के मुताबिक करीमगंज की तकरीबन 20 लाख की आबादी में 91.89 प्रतिशत लोग ग्रामीण इलाकों में हैं, जबकि 8.11 फीसदी शहरी आबादी है। इस सीट पर 12.81 फीसदी जनता एससी और 0.15 लोग एसटी हैं। 2009 में हुए चुनाव में जहां इस सीट पर 64.13 फीसदी वोटिंग हुई थी, जो 2014 में बढ़कर 76.14 प्रतिशत हो गई। 2014 में हुए 16वें लोकसभा चुनाव में ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रत्याशी राधेश्याम बिस्वास (69) ने बीजेपी प्रत्याशी कृष्णा दास को रिकॉर्ड 1 लाख दो हजार 94 मतों के भारी-भरकम अंतर से हराया। 2014 के लोकसभा चुनाव में 11,65,997 मतदाताओं में से 8,86,920 मतदाताओं ने ही मतदान किया। इसमें से  8,82,654  वोट ही सही पाए गए. 4,266 मतदाताओं ने किसी भी प्रत्याशी का वोट नहीं दिया, यानि उन्होंने नोटा बटन दबाया।