केएमएसएस ने सोनोवाल सरकार को घेरा, शिक्षित बेरोजगारों को धोखा देने का लगाया आरोप

Daily news network Posted: 2018-04-06 15:33:19 IST Updated: 2018-04-07 16:54:09 IST
केएमएसएस ने सोनोवाल सरकार को घेरा, शिक्षित बेरोजगारों को धोखा देने का लगाया आरोप
  • कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) ने सोनोवाल सरकार पर राज्य के शिक्षित बेरोजगारों को धोखा देने का आरोप लगाया है

गुवाहाटी।

कृषक मुक्ति संग्राम समिति (केएमएसएस) ने सोनोवाल सरकार पर राज्य के शिक्षित बेरोजगारों को धोखा देने का आरोप लगाया है। परिषद ने कहा है कि राज्य के बेरोजगार युवाओं को लिए सृजित पदों पर अन्य राज्यों के युवाओं को नियुक्ति देकर सरकार ने जाति, माटी, भेटी के अपने वादे को भुला दिया है। 




परिषद के मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में केएमएसएस ने आरोप लगाया कि भारतीय डाक सेवा विभाग के असम सर्किल में हाल ही में 96 पदों पर किसी दूसरे राज्य के युवाओं को नियुक्ति दी गई है। इससे पहले ये पद 100 प्रतिशत स्थानीय बेरोजगारों के लिए आरक्षित थे। इसके लिए परीक्षाएं विभाग द्वारा आयोजित की जाती थीं, जिससे स्थानीय भाषा में पढ़े युवाओं को भी मौका मिलता था, लेकिन केंद्र सरकार ने साल 2015 से इन पदों को स्टाफ सेलेक्शन कमिशन की ओर से आयोजित होने वाली परीक्षा के अंतर्गत ला दिया गया है। 





इसके चलते स्थानीय भाषा से पढ़े युवाओं को दिक्कत आने लगी है। केएमएसएस ने आरोप लगाया है कि इन पदों के लिए स्टाफ सेलेक्शन कमिशन द्वारा आयोजित परीक्षा के तहत जारी नियुक्ति की सूची में स्थानीय बेरोजगारों का स्थान शून्य है। ऐसे में इन 98 पदों पर बाहरी राज्यों के युवाओं को ही मौका दिया गया। वहीं दूसरी तरफ कृषक मुक्ति संग्राम समिति के प्रचार सचिव रातुल हुसैन ने एनआरसी  पर केंद्र और राज्य सरकार को घेरा है।





 उनका आरोप है कि केंद्र व राज्य सरकार एनआरसी के जरिए राज्य के एक करोड़ 90 लाख अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को असम में बसाने की साजिश को अभी भी जारी रखा है। अपनी साजिश के तहत भाजपा सरकार नागरिक संशोधन विधेयक को लेकर गठित संयुक्त संसदीय समिति को आगे कर अपना काम निकालना चाह रही है। इसके अलावा विदेशियों के नाम एनआरीस में शामिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट को निर्देशों को दरकिनार कर मोदी सरकार ने एनआरसी की अंतिम सूची प्रकाशन की तिथि को 31 दिसंबर 2018 तक बढ़ा दिया है।