ये है उत्तर भारत का खजुराहो, पांडवों ने यहां बिताया था बनवास

Daily news network Posted: 2019-01-12 18:11:18 IST Updated: 2019-01-15 17:15:08 IST
  • अगर आप धार्मिक यात्रा पर जा रहे हैं और किसी प्राचीन मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं तो हरियाणा चले जाएं। यहां के पंचकुला में 8वीं शताब्दी का पौराणिक भीमा देवी मंदिर है।

नई दिल्ली।

अगर आप धार्मिक यात्रा पर जा रहे हैं और किसी प्राचीन मंदिर के दर्शन करना चाहते हैं तो हरियाणा चले जाएं। यहां के पंचकुला में 8वीं शताब्दी का पौराणिक भीमा देवी मंदिर है। इस मंदिर का संबंध महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। मंदिर की वास्तुशैली बेहद प्राचीन है। भीमा देवी मां दुर्गा का ही एक रूप है।


 संरक्षित स्मारक में शामिल है यह मंदिर

 भीमा देवी मंदिर संरक्षित स्मारक में शामिल है। इस मंदिर का पता 1974 में उस वक्त चला जब पुरातत्व विभाग ने यहां खुदाई की। खुदाई में मंदिर परिसर में लगभग 100 प्राचीन मूर्तियां मिली। मंदिर की वास्तु शैली, समकालीन खजुराहो और भुवनेश्वर मंदिरों में दिखने वाली शैली की तरह है।

 


 उत्तर भारत का खजुराहो

 भीमा देवी मंदिर को उत्तर भारत का खजुराहो कहा जाता है। इसकी वजह खुदाई में यहां मिली कामुक छविओं वाली अप्सराओं की मूर्तियां हैं। इस मंदिर में मिली ज्यादातर मूर्तियों को संग्राहलय में रखा गया है।


भीमा देवी मंदिर

 भीमा देवी मंदिर हरियाणा के पंचकुला जिले के पिंजोर शहर में है। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 8वीं से 11वीं सदी के बीच हुआ था। इस मंदिर को गुर्जर प्रतिहार के शासनकाल के दौरान बनाया गया था। मंदिर परिसर में ही पिंजौर गार्डन है।

 


 पिंजौर गार्डन

 भीमा देवी मंदिर परिसर में ही पिंजौर गार्डन है। गार्डन को औरंगजेब के सौतेले भाई ने बनवाया था। कहा जाता है कि इस गार्डन को औरंगजेब के सौतेले भाई ने हिंदू मंदिरों को तोड़ने से बचाने के लिए बनवाया था। हरियाणा के जिस पिंजौर शहर में यह मंदिर स्थापित है उसका पौराणिक संबंध पांडवों से है।

 


कहा जाता है कि पांडव अपने वनवास के दौरान पिंजौर में भी रहे थे। यही उन्होंने मां काली की पूजा और यज्ञ किया था। भीमा देवी के बारे में कहा जाता है कि वो भीमा के रूप में ऋषियों की रक्षा करने के लिए प्रकट हुई थी।