कर्नाटक चुनाव के बीच आखिर क्यों हो रही है मेघालय और मणिपुर की चर्चा, ये है बड़ा कारण

Daily news network Posted: 2018-05-15 16:33:03 IST Updated: 2018-05-15 16:33:03 IST
कर्नाटक चुनाव के बीच आखिर क्यों हो रही है मेघालय और मणिपुर की चर्चा, ये है बड़ा कारण
  • कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद मंगलवार को हुई मतगणना के रुझानों और नतीजों ने बहुमत पर पेंच फंसा दिया है

बेंगलुरु।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद मंगलवार को हुई मतगणना के रुझानों और नतीजों ने बहुमत पर पेंच फंसा दिया है। वहीं कांग्रेस ने मौके का फायदा उठाते हुए जेडीएस को समर्थन देकर सरकार बनाने का प्रस्ताव दे दिया है, जिसे जेडीएस ने मान लिया है। खबरों के अनुसार कुमारस्वामी ने कांग्रेस के मुख्यमंत्री बनने के प्रस्ताव को मान लिया है। खबर यह भी है कि कुमारस्वामी 18 मई को शपथ ग्रहण करेंगे।



 

अब तक के नतीजों और रुझानों में भाजपा को 104 सीटें मिलती दिख रही हैं और भाजपा बहुमत से काफी दूर है। वहीं कांग्रेस के खाते में 78 जबकि जेडीएस के खाते में 38 सीटें हैं। ऐसे में दोनों ने मिलकर सरकार बनाने की तैयारी की है। वहीं ताजा स्थिति को देखते हुए अमित शाह ने जेपी नड्डाए धर्मेंद्र प्रधान और प्रकाश जावड़ेकर को तत्काल बेंगलुरु पहुंचकर सरकार बनाने की संभावनाएं तलाशने के लिए कहा है। वहीं शाह ने येदयुरप्पा को भी राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए कहा है। इस बीच कांग्रेस नेताओं के दल को लेकर राज्यपाल से मिलने गए जी परमेश्वरा को राजभवन में प्रवेश नहीं करने दिया गया और उन्हें दरवाजे से ही लौटा दिया गया।



 

 

आखिर क्यों याद आया मणिपुर और मेघालय

बता दें कि मेघालय और मणिपुर विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद भी सरकार बनाने में पिछड़ गई थी। मणिपुर में 60 में से कांग्रेस को 28 सीट, जबकि भाजपा ने 21 सीट जीती थी पर भाजपा सरकार बनाने में सफल रही।  वहीं मेघालय की बात की जाए तो यहां हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 21 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, लेकिन वह सरकार नहीं बना पाई। वहीं नेशनल्स पीपुल्स पार्टी ने महज 19 सीटें जीतकर मेघालय में गठबंधन की सरकार बना ली थी।  बता दें कि 6 सीटें जीतने वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (यूडीपी) ने एनपीपी को समर्थन दिया था। वहीं पीडीएफ की 4 और बीजेपी-एचएसपीडीपी की 2-2 सीटे हैं। उन्होंने भी एनपीपी को समर्थन दिया था। वहीं एक निर्दलीय विधायक ने भी एनपीपी को समर्थन दिया था। बता दें कि गोवा में भी कांग्रेस का कुछ ऐसा ही हाल हुआ था। 40 सीट वाली गोवा विधानसभा में भी कांग्रेस को 17 सीटें मिली थीं। जबकि भाजपा 13 सीटों पर जीती।  हालांकि भाजपा दूसरे दलों के साथ मिलकर सरकार बनाने में कामयाब हुई।