इस सीट पर कांग्रेस का जीत पाना है नामुमकिन, जानिए कौन दे रहा है टक्कर

Daily news network Posted: 2019-05-22 20:31:29 IST Updated: 2019-05-22 20:31:29 IST
इस सीट पर कांग्रेस का जीत पाना है नामुमकिन, जानिए कौन दे रहा है टक्कर
  • 17वीं लोकसभा चुनाव के नतीजे कल यानि 23 मई को घोषित किए जाएंगे। इसी क्रम में आज हम बात करेंगे पूर्वोत्तर राज्य असम के धुबरी लोकसभा सीट की। यहां 23 अप्रैल को तीसरे चरण वोटिंग हुई थी। इस सीट से ऑल इंडिया युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल सांसद हैं।

17वीं लोकसभा चुनाव के नतीजे कल यानि 23 मई को घोषित किए जाएंगे। इसी क्रम में आज हम बात करेंगे पूर्वोत्तर राज्य असम के धुबरी लोकसभा सीट की। यहां 23 अप्रैल को तीसरे चरण वोटिंग हुई थी। इस सीट से ऑल इंडिया युनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) के प्रमुख बदरुद्दीन अजमल सांसद हैं। इस बार बदरूद्दीन अजमल का मुकाबला कांग्रेस उम्मीदवार पूर्व विधायक अबु ताहिर बेपारी और बीजेपी की सहयोगी असम गण परिषद के उम्मीदवार जावेद इस्लाम से होगा।

 


  

 बता दें कि कांग्रेस विधायक रहे बेपारी 2015 में कांग्रेस मंत्री हिमंत बिस्व सरमा के पार्टी छोड़ने के बाद बीजेपी में शामिल हो गए थे। लेकिन फिर 2016 के विधानसभा चुनाव में भाजपा द्वारा टिकट नहीं दिए जाने के बाद वह फिर से कांग्रेस में शामिल हो गए। साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में एआइयूडीएफ ने लगभाग डेढ़ लाख से अधिक वोटों से जीत हासिल की थी। जबकि इससे पहले भी इस सीट से बदरुद्दीन अजमल सांसद थे लेकिन उस समय इनकी पार्टी का नाम असम यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट था। इस सीट के लिए कुल मतदातों की संख्या 15,52,554 है। जिसमें 7,98,124 पुरुष मतदाता है और 7,54,430 महिला मतदाता है।

 


 

  इस सीट के लिए पहली बार लोकसभा चुनाव 1951 हुआ था तब इस सीट से प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के नेता अमजद अली सांसद चुने गए। इसके बाद 1957 में हुए चुनाव में अमजद अली दोबारा संसद चुने गए। लेकिन 1962 के लोकसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी ने सीट पर कब्जा जमाया। इसके बाद 1967 में हुए लोकसभा चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी ने जहानुद्दीन अहमद को चुनाव मैदान में उतारा और उन्होंने कांग्रेस को मात देते हुए जीत हासिल की।


 

  1971 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने मोइनुल हक चौधरी को चुनाव में उतारा और उन्होंने प्रजा सोशलिस्ट पार्टी को मात देते हुए जीत हासिल की। तब से लेकर 2004 तक कुल 9 बार लोकसभा चुनाव हुए लेकिन यह सीट कांग्रेस के कब्जे में ही रही। उम्मीदवार बदलते रहे और जीत मिलती रही। लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव में बदरुद्दीन अजमल चुनाव मैदान में उतरे और कांग्रेस को मात देते हुए उनका विजय रथ रोक दिया। इसके बाद 2014 में भी बदरुद्दीन ने जीत हासिल की।


 

  इस सीट की कुल जनसंख्या 27,71,883 है, इनमें से 89.10 फीसदी लोग गांवों में निवास करते हैं जबकि 10.90 फीसदी लोग शहरों में रहते हैं। इस सीट में अनुसूचित जाति के लोगों को संख्या 3.54 फीसदी है जबकि 5.78 फीसदी लोग अनुसूचित जनजाति से आते हैं। इस सीट पर राजनातिक पार्टियों के स्ट्राइक रेट के बारे में बात करे तो कांग्रेस का 75 फीसदी है जबकि पीएसपी की 25 फीसदी है। इस सीट से मौजूदा विधायक बदरुद्दीन अजमल का मुख्य व्यवसाय बिजनेस का है।


 

  सांसद बदरुद्दीन अजमल ने सदन में अब तक 384 सवाल किये हैं। सदन में इनकी उपस्थिति 59 फीसदी है। जबकि इन्होंने 63 चर्चाओं में हिस्सा लिया है। 2014 के लोकसभा चुनाव पर नजर डाले तो कुल 88 फीसदी वोट पड़े थे। जिसमें 13,69,624 मतदाताओं ने हिस्सा लिया था। इसमें 7,09,191 पुरुष और 6,60,433 महिला मतदाता शामिल थे। ऐसे में 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में किस-किस उम्मीदवारों के बीच टक्कर होगी यह तो समय ही बताएगा, लेकिन पिछले आंकड़ों के हिसाब से कांग्रेस यहां से सबसे अधिक बार जीत हासिल की है।


 

  किसको नुकसान और किसका हुआ फायदा 2014 के लोकसभा चुनाव में एआइयूडीएफ को 43 फीसदी वोट मिले थे। इसके बाद भी 2009 की तुलना में इस पार्टी को 8.93 फीसदी वोट का नुकसान सहना पड़ा था। सीट पर दूसरे नंबर की पार्टी रही कांग्रेस के खाते में कुल 26.49 फीसदी वोट पड़े थे, लेकिन पिछले चुनाव की तुलना में कांग्रेस को 7.55 फीसदी वोट का नुकसान सहना पड़ा था। लेकिन इस सीट से कभी चुनाव न जीतने वाली बीजेपी के उम्मीदवार को कुल 21.83 फीसदी वोट मिले थे और पिछले चुनाव की तुलना में भाजपा को 21.83 फीसदी वोटों का फायदा हुआ था।