हाईकोर्ट ने पूछा, क्या 'चिंकी' कहना जातीवादी टिप्पणी है?

Daily news network Posted: 2018-04-07 16:36:13 IST Updated: 2018-04-07 17:35:22 IST
हाईकोर्ट ने पूछा, क्या 'चिंकी' कहना जातीवादी टिप्पणी है?
  • दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सीबीआई से यह पूछा है कि क्या पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ इस्तेमाल किए जाने वाले अपमानजनक शब्द 'चिंकी' को अनुसूचित जातियों और जनजातियों पर जातिवादी टिप्पणी के रूप में किया जाता है।

नई दिल्ली।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सीबीआई से यह पूछा है कि क्या पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ इस्तेमाल किए जाने वाले अपमानजनक शब्द 'चिंकी' को अनुसूचित जातियों और जनजातियों पर जातिवादी टिप्पणी के रूप में किया जाता है।


 जस्टिस अनू मल्होत्रा ​​ने सीबीआई से इस बारे में पता लगाने को कहा है कि क्या ऐसी कोई सूचना जारी की गई है या नहीं।


 बता दें कि यह मामला सीबीआई और पूर्वोत्तर के छात्र नीडो तानिया के पिता के याचिकाओं की सुनवाई के दौरान यह मामला उभरा, जिसे दक्षिण दिल्ली के लाजपत नगर में कुछ लोगों ने कथित तौर पर 2014 में हत्या कर दी थी। आरोपी के खिलाफ एससी/एसटी अधिनियम के तहत आरोप है।

 



सुनवाई के दौरान, सीबीआई अभियोजक राजदीप बेहुरा ने कहा कि चस्मदीद गवाह के बयान के मुताबिक, आरोपी ने पीड़िता को फोन करने के दौरान 'चिंकी' जातिगत शब्दों का इस्तेमाल किया था।


 जब अदालत ने यह जानने की मांग की कि क्या एससी/एससी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत इस शब्द की कोई अधिसूचना है, तो अभियुक्त के वकील ने कहा कि आरटीआई के जवाब के अनुसार इस बारे में कोई सूचना नहीं थी।

 



उच्च न्यायालय ने जनवरी 2015 में तानिया के पिता नीडो पवित्रा की अदालत के आदेश के खिलाफ याचिका पर चार वयस्क आरोपी फरमान, पवन, सुंदर सिंह और सनी उप्पल की प्रतिक्रिया मांगी थी। सीबीआई ने इस मामले में भी इसी तरह की याचिका दायर की है।

 


 बता दें कि फरमान अभी जेल में है, वहीं अन्य तीन आरोपी जमानत पर बाहर हैं। जबकि कोर्ट की सुनवाई अंतिम चरण में है।


 अरुणाचल प्रदेश के कांग्रेस विधायक पवित्रा द्वारा दायर की गई याचिका में 25 सितंबर, 2014 के सत्र न्यायालय के आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी, जिसमें अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत आरोपी के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया जा सकता था। जिसमें उन्होंने कहा था कि जनजाति (एससी/एसटी) अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के तहत मामला दर्ज नहीं किया जा सकता।

 



बता दें कि तानिया(19) दिल्ली में एक निजी विश्वविद्यालय में बीए प्रथम वर्ष का छात्र था। 29 जनवरी 2014 को लाजपत नगर मार्केट के कुछ दुकानदारों के साथ उसका झगड़ा हो गया था, जिसमें दुकानदारों ने तानिया के हेयर स्टाइल को लेकर मजाक उड़ाया था। वहीं दुकानदारों ने कथित तौर पर उसकी पिटाई की थी। जिसके बाद अगले दिन एम्स में उसे मृत लाया गया था।