टूट सकता है त्रिपुरा में भाजपा-आईपीएफटी गठबंधन!

Daily news network Posted: 2018-04-02 17:21:00 IST Updated: 2018-06-26 11:50:30 IST
टूट सकता है त्रिपुरा में भाजपा-आईपीएफटी गठबंधन!
  • त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत के बाद भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) और इंडिजिन्यस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) गठबंधन की सरकार ने 9 मार्च को शपत ग्रहण किया है, लेकिन दोनों पार्टियों के बीच अब दरार सामने आ रहे हैं।

अगरतला।

त्रिपुरा में विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत के बाद भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) और इंडिजिन्यस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी)  गठबंधन की सरकार ने 9 मार्च को शपथ ग्रहण किया, लेकिन दोनों पार्टियों के बीच अब दरार सामने आ रहे हैं।

 


 त्रिपुरा से 20 किमी की दूरी पर आईपीएफटी की युवा ब्रिगेड ने शुक्रवार को त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्रों के स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) के मुख्यालय, खूमुलूंग में पांच घंटे तक बैठकर प्रदर्शन किया है।

 


 भाजपा और आईपीएफटी ने त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में 60 सीटों में से 44 सीटें हासिल की है। गठबंधन सरकार में आईपीएफटी के दो नेताओं को कैबिनेट सीट मिली है।


 आईपीएफटी के युवा इकाई का आंदोलन शनिवार दोपहर 12 से 24 घंटों के लिए आयोजित किया गया था, लेकिन मूसलाधार बारिश के कारण प्रदर्शन पांच घंटे के बाद ही रोक दिया गया।

 


 पत्रकारों से बात करते हुए यूथ आईपीएफटी के नेता शुक्ल चरण नोतिया ने कहा कि आंदोलन का मकसद स्थानीय लोगों के सामाजिक-आर्थिक, भाषाई और सांस्कृतिक स्थितियों के अध्ययन के लिए सरकार के द्वारा एक मॉड्यूलिटी कमिटी के गठन की मांग करना है। जिससे स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को सुधारा जा सके।


 बता दें कि आईपीएफटी का एक प्रतिनिधिमंडल 5 जनवरी को नई दिल्ली में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात की थी। जिसके बाद प्रधानमंत्री ने एक मॉड्यूलिटी कमिटी के गठन के लिए सहमति जताई थी।

 


 इस कमिटी की के गठन की घोषणा 8 जनवरी को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने की थी। जिसे लेकर पहले ही काम शुरू करने की उम्मीद थी। लेकिन चुनाव में गठबंधन के बाद भी इस मुद्दे को लेकर भाजपा के द्वारा अबतक कोई पहल नहीं की गई है। अब हम चाहते हैं सरकार इसको लेकर एक समयसीमा निर्धारित करे कि कब तक मॉड्यूलिटी कमिटी गठिन की जाएगी। उन्होंने आगे कहा, हमें भाजपा के साथ कोई विवाद या विश्वास की कमी नहीं है।


 आईपीएफटी नेता ने कहा, अगर कमिटी गठित नहीं की जाती है तो हम लोगों प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग करेंगे।

 


 इस बीच, भाजपा ने अपने गठबंधन साथी के साथ किसी भी तरह के तनावपूर्ण संबंधों से इनकार किया है। भाजपा प्रवक्ता मृणाल कांती देब ने बताया कि उनकी पार्टी ने युवा आईपीएफटी नेताओं के आंदोलन को एक रिमांइडर के रूप में देखा है। इसे किसी और रूप में नहीं देखा जा सकता है।