'PM मोदी के कदम को नाकाम कर देंगे असम के लोग'

Daily news network Posted: 2019-01-05 12:38:35 IST Updated: 2019-01-09 17:48:53 IST
'PM मोदी के कदम को नाकाम कर देंगे असम के लोग'
  • ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन(आसू) के मुख्य सलाहकार एस.कुमार भट्टाचार्य ने चेतावनी दी है कि राज्य के इंडिजिनस लोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी पार्टी...

गुवाहाटी।

ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन(आसू) के मुख्य सलाहकार एस.कुमार भट्टाचार्य ने चेतावनी दी है कि राज्य के इंडिजिनस लोग प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी पार्टी के नागरिकता (संशोधन) बिल 2016 को पारित करने के कदम को प्रबल विरोध से नाकाम कर देंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिलचर में रैली के दौरान उम्मीद जताई थी कि संसद जल्द ही नागरिकता (संशोधन) बिल 2016 को पारित कर देगी।

 


मोदी ने कहा था कि उनकी सरकार नागरिकता संशोधन बिल पर भी आगे बढ़ रही है। ये बिल लोगों की भावनाओं और उनकी जिंदगियों से जुड़ा है। ये किसी के फायदे के लिए नहीं बल्कि अतीत में हुए कई गलत कार्यों व अन्याय का प्रायश्चित है। राज्य सरकार ने असम समझौते की धारा 6 को लागू करने का फैसला किया जो कि 35 साल से लटका हुआ था। अब असम की सामाजिक, सांस्कृतिक व भाषायी पहचान की रक्षा का रास्ता साफ है।

  

 


 प्रधानमंत्री के इसी बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भट्टाचार्य ने ने सभी देशभक्त लोगों से, जो अभी भी भाजपा से जुड़े हुए हैं, अपील की है कि वे बिना देरी किए भाजपा से अपने संबंध तोड़ दें। उन्होंने कहा कि भाजपा ने अब साबित कर दिया है कि वह राष्ट्रविरोधियों का समूह है जो अवैध बांग्ला प्रवासियों से मिले हुए हैं। भाजपा और उसके नेतृत्व वाली राज्य व केन्द्र सरकार असम के इंडिजिनस लोगों को हाशिए में धकेलने की कोशिश कर रही है। भगवा पार्टी अवैध 'PM मोदी के कदम को नाकाम कर देंगे असम के लोग'बांग्ला हिंदू प्रवासियों को खुश करने के लिए अब झुक गई है। ताकि वह उनको अपना वोट बैंक बना सकें और आगामी लोकसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा लोकसभा सीटें जीत सके। इसने भाजपा और उसकी सरकारों को राज्य के इंडिजिनस लोगों के हितों की कीमत पर अवैध बांग्ला हिंदू प्रवासियों के रक्षक में तब्दील कर दिया है।

 

 


 इस कारण वे असम समझौते पर वे गुमराह करने वाले बयान दे रहे हैं। एक तरफ वे असम समझौते के क्लॉज 6 को लागू करने के लिए उच्चाधिकार प्राप्त समिति के गठन की घोषणा करते हैं वहीं दूसरी तरफ उसी क्लॉज का उल्लंघन कर रहे हैं। असम समझौते का क्लाज 6 असम में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान करने, मतदाता सूचियों से उनके नाम हटाने और वापस उनके देश भेजने से जुड़ा है। भाजपा और इसकी सरकार इस क्लॉज के विरोध में काम कर रही है। असम समझौता असम के इंडिजिनस लोगों और केन्द्र सरकार के बीच 1985 में हुआ था।  यह समझौता 6 साल तक चले लंबे आंदोलन के बाद हुआ था। इस आंदोलन के दौरान 855 लोग शहीद हुए थे।

 

 


 संयुक्त संसदीय समिति की नागरिकता संशोधन बिल 2016 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सिलचर दौरे से जोड़ा गया था। अब कोई संदेह नहीं रह गया है कि भाजपा और उसके नेतृत्व वाली राज्य व केन्द्र सरकार ने असम के इंडिजिनस लोगों को धोखा दिया है लेकिन उन्हें याद रखना चाहिए कि असम के इंडिजिनस लोग राज्य में अवैध प्रवासियों को बसाने की सभी साजिशों को नाकाम कर देंगे। असम पर पहले से ही अवैध प्रवासियों का बोझ है, जो 1948 से 1971 के बीच आए थे, अत: अवैध प्रवासियों का और बोझ स्वीकार करने का सवाल ही नहीं उठता, चाहे वे हिंदू हो या मुस्लिम।