चीनियों को भगाने के लिए 19 घंटे पैदल चले हमारे सैनिक

Daily news network Posted: 2018-01-13 11:58:13 IST Updated: 2018-01-13 11:58:13 IST
चीनियों को भगाने के लिए 19 घंटे पैदल चले हमारे सैनिक
  • चीनी सेना की रोड बनाने वाली टुकड़ी ने हाल ही में अरुणाचल के तूतिंग इलाके में घुसपैठ की थी

गुवाहाटी।

चीनी सेना की रोड बनाने वाली टुकड़ी ने हाल ही में अरुणाचल के तूतिंग इलाके में घुसपैठ की थी। अरुणाचल के ऊपरी सियांग जिले में सड़क नहीं है। जब तूतिंग में चीनी घुसपैठ की खबर मिली तो हमारे जवान उस इलाके के लिए रवाना हो गए लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए उन्हें 19 घंटे पैदल चलना पड़ा। भारतीय सैनिकों की एक टुकड़ी के वहां पहुंचने के बाद चीनी सेना की सड़क बनाने वाली टुकड़ी के जवान वापस लौट गए। 

 

 

 


यह शायद डोकलाम में देरी से प्रतिक्रिया के चलते चीनी सैनिकों के साथ 73 दिन तक चले गतिरोध की सीख थी कि  28 दिसंबर को एक कुली से सूचना मिलते ही तुरंत सेना की टुकड़ी रवाना की गई। आपको बता दें कि चीनी सेना के सड़क निर्माण की सूचना एक कुली ने दी थी, जिसके बाद तुरंत सैनिकों को मैकमोहन लाइन के लिए रवाना किया गया था। भले ही सेना ने इस मामले में जीवटता दिखाई लेकिन सीमावर्ती क्षेत्रों के इंफ्रास्ट्रक्चर की समस्या भी इससे उजागर होती है कि सैनिकों को पैदल इतना लंबा सफर तय करना पड़ा।

 

 

 

 


भारतीय सेना के 120 जवान राशन के साथ सीमा पर भेजे गए ताकि वे वहां पर करीब एक महीने तक आसानी से रह सकें। सीमा पर सड़क नहीं होने और खच्चर आदि की सुविधा न होने की वजह से भारतीय सेना को अपने 300 पोर्टर लगाने पड़े जिससे सैनिकों के लिए वहां राशन पहुंचाया जा सके। एक रक्षा सूत्रों ने कहा, शुरू में ऐसा लगा कि चीनी सेना डोकलाम के बाद विवाद का एक और मोर्चा खोलना चाहती है। हमें यह विश्वास था कि वहां पर लंबे समय तक रुकना पड़ सकता है।

 

 

 


डोकलाम विवाद से सबक लेते हुए हमने 29 दिसंबर को ही घुसपैठ स्थल के लिए सैनिकों को रवाना कर दिया। दूसरी तरफ 6 जनवरी को फ्लैग मीटिंग के लिए आए चीनी सैनिक सीमा तक अपनो वाहन से आए थे। मामला तत्काल सुलझ गया और चीन के सैनिक सड़क बनाने वाली अपनी मशीनों के साथ वापस लौट गए। हालांकि उनके उपकरणों को स्थानीय लोगों ने नुकसान पहुंचा दिया था। सूत्र ने बताया कि स्थानीय लोगों के विरोध के बाद चीन के सिविलियन वर्कर अपने उपकरण छोड़कर भाग गए। लेकिन अगर वे बड़ी संख्या में चीनी सैनिकों के साथ वापस आते तो क्या होता।

 

 


इसी आशंका को देखते हुए हमने सबसे पहले रक्षात्कम उपाय किए लेकिन हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने संसाधनों को जमा करना था। हालांकि इसमें भी चुनौतियां और कठिनाइयां थी। पोर्टर के आने से पहले सेना ने हेलिकॉप्टर से 100 पैकेट भोजन और 30 हजार पैकेट चॉकलेट गिराया। वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भीषण ठंड और पथरीली जमीन को देखते हुए चॉकलेट जिंदा रहने के लिए ऊर्जा के ोत के रूप में काम करता है।

 

 


सूत्र ने कहा, शुरू में पानी का कोई स्रोत नही था और पानी की केन को हेलिकॉप्टर से गिराना पड़ा। कुलियों का काम कठिन था। प्रत्येक आदमी को 10 से 15 किलो राशन ले जाना था। साथ ही उन्हें वापस नीचे आने और दूसरी यात्रा से पहले आराम करना भी जरूरी था। हमने 120 जवानों के लिए 30 दिन का राशन भेजा। प्रत्येक सैनिक को करीब डेढ़ किलो राशन की जरूरत होती है जिसमें पानी और मिट्टी का तेल शामिल है। उन्होंने बताया कि दूसरी तरफ चीनी सेना को भौगोलिक लाभ है। सूत्र ने कहा, चीन की तरफ की मिट्टी कठोर और हमेशा जमी रहती है। हमने उलट वे आसानी से सड़क बना सकते हैं। भारतीय क्षेत्र में मिट्टी भुरभुरी है और भूस्खलन का खतरा बना रहता है । इससे जो भी सड़कें बनेंगी वे नष्ट हो जाएंगी। जिस तगह पर घुसपैठ हुई, वहां शुक्रवार को तीन फीट बर्फ पड़ी थी। हमने अपने सैनिकों को नजदीक के निचले इलाकों में वापस बुला लिया है। इस जगह पर एक निश्चित समय पर ही गश्त लगाई जाती है।