नॉर्थईस्ट के राज्यों को लेकर आई ये रिपोर्ट आपके होश उड़ा देगी

Daily news network Posted: 2018-02-13 08:27:51 IST Updated: 2018-02-13 08:27:51 IST
नॉर्थईस्ट के राज्यों को लेकर आई ये रिपोर्ट आपके होश उड़ा देगी
  • पिछले दो साल में भारत के वन क्षेत्र में एक फीसदी की बढ़ोतरी हुई है

गुवाहाटी।

पिछले दो साल में भारत के वन क्षेत्र में एक फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह 2015 के 7, 01,495 वर्ग किलोमीटर से 2017 में बढ़कर 7,08,273 वर्ग किलोमीटर हो गया है। यानी कुल वनक्षेत्र में 6,778 वर्ग किलोमीटर का इजाफा हुआ है। इस दौरान आंध्र प्दरेश, कर्नाटक, केरल, ओडिशा और तेलंगाना में वन क्षेत्र में सबसे ज्यादा बढ़त हुई है। इस मामलू इजाफे के बाद देश का वन क्षेत्र कुल क्षेत्रफल के 21.54 फीसदी तक पहुंच गया है।

 

 

 

 


पर्यावरण मंत्रालय ने इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (आईएसएफआर) 2017 जारी करते हुए यह जानकारी दी। इस रिपोर्ट में यह सामने आया कि देश में कुल वन और वृक्ष क्षेत्र बढ़कर 8,02,088 वर्ग किलोमीटर हो गया है। यह कुल 8,021 वर्ग किलोमीटर की बढ़त है। वर्ष 2015 के आकलन के अनुपात में यह कुल 1 फीसदी का इजाफा है। अब देश के कुल 24.39 प्रतिशत भू-क्षेत्रफल पर वन और वृक्ष क्षेत्र है।

 

 

 


 पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन ने बताया कि 2015 के मुकाबले 2017 में अत्यंत सघन वनों का क्षेत्रफल 1.36 प्रतिशत बढ़ा है। उन्होंने कहा कि यह अच्छी खबर है क्योंकि वेरी डेंस फॉरेस्ट (वीडीएफ) वातावरण से सबसे ज्यादा कार्बन अवशोषित करते हैं।  2017 की मूल्यांकन रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि करीब 15 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में 33 फीसदी से ज्यादा इलाका वन क्षेत्र में आता है। इनमें से सात केंद्र शासित प्रदेशों और राज्यों- मिजोरम, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मेघालय और मणिपुर में 75 प्रतिशत इलाका वन्य क्षेत्र है। वहीं 8 राज्यों- त्रिपुरा, गोवा, सिक्किम, केरल और उत्तराखंड, दादर और नगर हवेली, छत्तीसगढ़ और असम में 33-75 प्रतिशत इलाका वन्य क्षेत्र है।

 

 

 

 


रिपोर्ट में सामने आया है कि पांच उत्तर-पूर्वी राज्यों- मिजोरम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, मेघालय में 2015 के मुकाबले 2017 में वन्य क्षेत्र में गिरावट हुई है। दिल्ली स्थित सेंटर फॉर साइंस ऐंड इन्वायरमेंट ने इस रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'यह देखना अच्छी बात है कि अत्यंत सघन वनों के क्षेत्रफलों में इजाफा हुआ है। हालांकि इसके पीछे की वजह 2015 के मुकाबले इस बार अधिक जिलों को आकलन में शामिल करना हो सकता है।' सीएसई ने कहा कि 2015 के पिछले मूल्यांकन में 589 जिलों को शामिल किया गया था जबकि इस बार 633 जिलों को शामिल किया गया है।