Modi सरकार के इस कदम से उड़े चीन के होश, बॉर्डर पर झटपट पहुंच सकेगी सेना

Daily news network Posted: 2019-02-10 14:29:27 IST Updated: 2019-02-12 19:34:19 IST
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को तवांग से अरुणाचल प्रदेश के बाकी हिस्से को जोड़ने वाली सी ला सुरंग का शिलान्यास किया। डोकलाम गतिरोध के बाद से चीन बॉर्डर पर केंद्र सरकार अपनी रक्षा तैयारियों को बेहद पुख्ता बनाने पर फोकस किया है।

ईटानगर।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को तवांग से अरुणाचल प्रदेश के बाकी हिस्से को जोड़ने वाली सी ला सुरंग का शिलान्यास किया। डोकलाम गतिरोध के बाद से चीन बॉर्डर पर केंद्र सरकार अपनी रक्षा तैयारियों को बेहद पुख्ता बनाने पर फोकस किया है। दरअसल, सी ला एक पर्वत दर्रा है, जिससे होकर सुरंग निकलेगी। सीमा के बेहद करीब इस सुरंग के बनने से सैनिकों का कम समय में बॉर्डर पर पहुंचना आसान हो जाएगा। इसके साथ ही तनाव के समय की तैयारियों को लेकर सुरक्षाबलों का भरोसा भी बढ़ेगा।

 


 अधिकारियों ने बताया है कि इस सुरंग का काम पूरा करने में बीआरओ को करीब तीन साल लगेंगे। इस प्रॉजेक्ट की लागत 687 करोड़ रुपए तय की गई है। आपको बता दें कि भारत ने बॉर्डर पर यह अहम कदम ऐसे समय में उठाया है जब शनिवार को चीन ने अरुणाचल प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहुंचने पर आपत्ति जताई थी, जिस पर भारत ने करारा जवाब देते हुए इसे भारत का अभिन्न हिस्सा बताया।


 अधिकारी के अनुसार, 'इस प्रॉजेक्ट के तहत 12.04 किलोमीटर का इलाका आएगा। इसमें 1,790 मीटर और 475 मीटर की दो सुरंगें शामिल हैं। एक बार काम होने के बाद इन सुरंगों से किसी भी मौसम में आना-जाना आसान होगा। इससे तेजपुर से तवांग जाने का समय बहुत कम हो जाएगा। लोगों को सी ला चोटी के बर्फीले रास्ते से नहीं जाना पड़ेगा जो 13,700 फुट की ऊंचाई पर है।'

 


 सी ला की चोटी पर तैनात रह चुके सेना के एक सीनियर अधिकारी ने कहा, 'तेंगा से तवांग तक जाने का रास्ता बहुत दुर्गम है। यहां हमेशा भूस्खलन होता रहता है।' उन्होंने कहा कि पिछले 20 साल से यहां कोई बदलाव नहीं आया है। यहां हर मौसम में पहुंचने के लिए आसान रास्ते की जरूरत है।

 


उन्होंने कहा कि सेना को इस प्रॉजेक्ट का लंबे समय से इंतजार था। इसमें काफी देरी हुई है। लगभग दो दशक पहले ही एलएसी पर 73 ऑल वेदर रोड बनाने के प्रॉजेक्ट पर विचार किया गया था। इनमें से 61 सड़कें बीआरओ को बनानी थीं। अभी तक 34 सड़कों का काम ही पूरा हो पाया है।

 


 बता दें कि चीन ने तिब्बत के क्षेत्र में 14 एयरबेस बनाए हैं और 58,000 किलोमीटर की सड़कों का जाल बिछाया है। पीपल्स लिबरेशन आर्मी के 30 से 32 डिविजन यहां आसानी से पहुंच सकते हैं और उनकी रसद का इंतजाम किया जा सकता है। चीन अब यहां कुछ अंडरग्राउंड हैंगर और पार्किंग भी बना रहा है।