भारत ने सीमा पर बढ़ाई ताकत, ब्रह्मोस और होवित्जर भी तैनात

Daily news network Posted: 2018-04-02 12:42:29 IST Updated: 2018-06-22 15:16:14 IST
  • डोकलाम में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच भारत ने भी अरुणाचल प्रदेश में अपनी ताकत बढ़ा दी है। दिबांग, दाऊ देलाई और लोहित घाटियों में भारतीय सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी गर्इ है।

नर्इ दिल्ली।

डोकलाम में चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच भारत ने भी अरुणाचल प्रदेश में अपनी ताकत बढ़ा दी है। दिबांग, दाऊ देलाई और लोहित घाटियों में भारतीय सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी गर्इ है। इसके साथ ही अरुणाचल की सीमाओं पर ब्रह्मोस मिसाइल के साथ ही होवित्जर तोपें भी तैनात की गई है। 

 

 

 

तिब्बत क्षेत्र में चीन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सीमा पर निगरानी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है और नियमित रूप से हेलीकॉप्टरों की तैनाती की गई है। जानकारी के मुताबिक भारत ने पूर्वी लद्दाख आैर सिक्किम में टी-72 टैंकों की तैनाती की है आैर अरुणाचल में ब्रह्मोस मिसाइलों और होवित्जर तोपें भी तैनात कर दी गई है। इसके साथ ही पूर्वोत्तर में सुखोई-30 एमकेआई स्क्वेड्रन्स को भी उतारा गया है।


 


 ट्राइजंक्शन पर बढ़ी भारतीय सेना की मौजूदगी


डोकलाम विवाद के बाद चीन सीमा के पास तैनात भारतीय सैनिकों ने भारत-चीन अौर म्यांमार के ट्राइजंक्शन के आप पास अपनी गश्त भी बढ़ा दी है। ताकि डोकलाम जैसे किसी भी गतिरोध का रोका जा सके। सेना के शीर्ष अधिकारियों ने बताया कि तिब्बत क्षेत्र के पास वालोंग से तकरीबन 50 किलोमीटर दूर स्थित ट्राइजंक्शन नजदीकी पहाड़ी दर्रे और अन्य इलाकों में अपना प्रभुत्व बरकरार रखने के लिहाज से भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण है।

 

 


उन्होंने बताया डोकलाम गतिरोध के बाद ट्राइजंक्शन पर हमने भारत की मौजूदगी बढ़ा दी गर्इ है, क्योंकि सामरिक दृष्टिकोण से यह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है। चीनी फौज ट्राइजंक्शन में अकसर नहीं घुसती, लेकिन इसने इलाके के आस-पास सड़कें बना ली हैं, जहां जरूरत पड़ने पर सैनिकों को आसानी से पहुंचाया जा सकता है।

 

 


 इस वजह से बढ़ार्इ गर्इ सेना की मौजूदगी


लोहित नदी के किनारे स्थित वालोंग में 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों ने काफी बहादुरी का परिचय दिया था। चीन और म्यांमार के बीच सैन्य संबंध बढ़ना भी ट्राइजंक्शन पर भारतीय सैनिकों की मौजूदगी बढ़ाने का कारण है। अधिकारी ने बताया कि म्यांमार के सैनिक ट्राइजंक्शन पर गश्त नहीं करते। उन्होंने कहा कि सिक्किम सेक्टर के डोकलाम में ट्राइजंक्शन के बाद भारत-चीन सीमा पर यह सबसे महत्वपूर्ण ट्राइजंक्शन है।

 

 

 

पिछले वर्ष 16 जून को भारत और चीन के सैनिकों के बीच डोकलाम में गतिरोध शुरू हुआ था जो 28 अगस्त तक चला था। डोकलाम गतिरोध के बाद चीन के साथ लगते तिब्बती क्षेत्र में भारत ने सैनिकों की संख्या बढ़ा दी है और सीमा के पास गश्त बढ़ा दी है। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि भारत ने ट्राइजंक्शन के पास लोहित घाटी के सभी क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति बढ़ा दी है।

 

 


 नियमित हो रहा है युद्ध का अभ्यास


सेना के अधिकारियों ने कहा कि इलाके में 18 पहाड़ी दर्रे हैं और इन दर्रों पर हम नियमित रूप से लंबा गश्त करते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम नियमित रूप से युद्ध का अभ्यास करते हैं। लाभदायक स्थिति में रहने के लिए आपको आक्रामक बने रहना आवश्यक है।’’ भारत के साथ लगती 4000 किलोमीटर लंबी सीमा पर चीन नयी सड़कें बना रहा है और आधारभूत ढांचे में सुधार ला रहा है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले महीने कहा था कि चीन ने डोकलाम के पास हेलिपैड, संतरी पोस्ट और सैनिकों के लिए बंकर बनाए हैं।

 

 


 विवादित इलाके में आधारभूत ढांचे को मजबूत कर रहा है चीन

 

सूत्रों ने बताया कि चीन ने उत्तर डोकलाम में अपने सैनिकों को तैनात कर रखा है और विवादित इलाके में आधारभूत ढांचे को मजबूत कर रहा है। सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने जनवरी में कहा था कि समय आ गया है कि भारत अपना ध्यान पाकिस्तान के साथ लगती सीमा से हटाकर चीन के साथ लगती सीमाओं पर लगाए। उनका बयान स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।

 

 

अरुणाचल की रक्षा के लिए 12,000 सैनिक तैनात

 

अकेले अरुणाचल की रक्षा के लिए 4 इन्फ्रेंट्री माउंटेड डिविजन्स को तैनात किया गया है। हर इन्फेंट्री में 12,000 सैनिकों को रखा गया है। इसके अलावा 2 डिविजंस को रिजर्व रखा गया है। खासतौर पर तवांग में, जिसे चीन दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताता है, सैनिकों की तैनाती पहले से कहीं अधिक है। किबिथू-वालॉन्ग फ्रंटियर में तैनात एक सीनियर अफसर ने कहा, ‘हमारा प्राथमिक काम एलएसी पर शांति और स्थिरता बनाए रखना है और शांति के दौर में पर्वतीय चोटियों पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना है।’

 


जरूरत पड़ने पर युद्ध के लिए तैयार

 

 किबीथू-वालोंग सेक्टर में एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा- हमारा प्राथमिक कार्य एलएसी की पवित्रता और प्रभावी तरीके से शांति बनाए रखना है। इसके अलावा जरूरत पड़ने पर युद्ध के लिए तैयार रहना भी है। इस बार हम उन्हें निकलने नहीं देंगे।